MLA murder: 24 जुलाई को यूपी के चर्चित हत्याकांड की होगी अंतिम बहस, 23 साल पहले हुई इस घटना में पहली बार चली थी एके 47

- 24 जुलाई को चर्चित जवाहर पंडित हत्याकांड की अंतिम बहस


-सरकार के केस वापसी की अपील को खारिज कर शुरू हुई है बहस

-जिले में पहली बार चली थी ak47

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश चर्चित जवाहर पंडित हत्याकांड मामले में 23 बरस बाद 24 जुलाई को सरकारी पक्ष अंतिम बहस करेगा। 23 बरस पहले समाजवादी पार्टी के तत्कालीन विधायक जवाहर पंडित की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।इस हत्याकांड में दिग्गज राजनीतिक घराने का नाम सामने आया। जिसमें हत्याकांड के 17 सालों बाद करवरिया बंधुओं को जेल जाना पड़ा और अब 23 बरस बाद 24 जुलाई को इस मामले में सरकारी बहस पूरी होगी और बचाव पक्ष की बहस शुरू होगी। जिसके बाद फैसला आने की उम्मीद है।

13 अगस्त 1996 को समाजवादी पार्टी के विधायक जवाहर यादव पंडित की हत्या कर दी गई थी जिसमें जवाहर पंडित समेत दो लोगों की मौत हो गई थी इस मामले में दो बार सीबीसीआईडी की जांच तीन बार हत्या की विवेचना की जा चुकी है। सत्ता की हनक रही हो या कानूनी दांव की जवाहर पंडित हत्याकांड मामले में 17 बरस बाद हत्याकांड के नामजद आरोपी पूर्व विधायक उदय भान करवरिया ने 2014 को न्यायालय में सरेंडर किया था। जिसके बाद हत्याकांड में आरोपी बनाये गये पूर्व सांसद कपिल मुनि करवरिया पूर्व एमएलसी सूरज भान करवरिया और उनके चचेरे भाई रामचंद्र को भी सरेंडर कर जेल जाना पड़ा। पांच सालों से सलाखों के पीछे कैद तीनों माननीयों सहित करवरिया बंधुओं ने जमानत के लिए पूरी ताकत लगा दी लेकिन हर बार इन्हें नाकामी हाथ लगी। अब यह मामला अपने अंतिम चरण में है 24 तारीख को सरकारी पक्ष की तरफ से आखरी बार बहस होनी है।

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सत्ता बदलते ही केस वापसी की अपील
यूपी में सत्ता बदली जिसके बाद करवरिया बन्धुओं को रिहाई की उम्मीद जगी और बीते दिनों उत्तर प्रदेश शासन की तरफ से तत्कालीन सेशन जज रमेश चंद्र की कोर्ट में मुकदमे को वापस लेने की अर्जी अक्टूबर माह में दी गई । जिसमें यह अपील की गई थी कि मुकदमे को वाद वापसी के आधार पर खत्म कर दिया जाए इस मामले में इनकी ओर से तमाम तर्क पेश किए गए थे जिसमे कहा गया था की अब तक जो भी सुबूत न्यायालय के सामने आए हैं इनके अनुसार मामले की सफलता संदिग्ध जान पड़ती है इसलिए न्याय हित में मुकदमे को वापस लिए जाने की अनुमति प्रदान की जाए।

हाइकोर्ट के आदेश पर शुरू हुई बहस
जिसके खिलाफ जवाहर पंडित की पत्नी पूर्व विधायक विजमा यादव ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इस मामले में शासन की तरफ से दाखिल की गई अर्जी पर दोनों पक्षों की लंबी बहस के बाद सेशन जज ने शासन की अर्जी को खारिज कर दिया सेशन जज ने सरकारी पक्ष से मामले में अंतिम बहस पूरी कराने का निर्देश दिया गया।करवरिया बंधुओं की ओर से हाईकोर्ट में अर्जी खारिज किए जाने के फैसले के खिलाफ याचिका प्रस्तुत की गई।सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखे जाने पर कचहरी में इस मामले की सुनवाई में बहस नहीं हो पाई और फैसला आने तक सुनवाई टाली गई। लेकिन बीते 18 जुलाई को हाईकोर्ट ने सरकारी पक्ष को अंतिम और शेष बहस पूरी कराने का निर्देश दिया सरकारी पक्ष की बहस पूरी होने के बाद फिर बचाव पक्ष की बहस शुरू होगी इसके बाद फैसला सुनाए जाने की तारीख लगाई जाए।


फ़िल्मी स्टाइल में हुई थी हत्या
हत्याकांड के बाद जवाहर यादव के भाई सुलाखी यादव ने सिविल लाइंस थाने में लिखवाई थी। पूर्व सांसद कपिल मुनि करवरिया पूर्व विधायक उदय भान करवरिया पूर्व एमएलसी सूरजभान करवरिया और रामचंद्र शुक्ल को नामजद करते हुए दर्ज कराई थी। आरोप लागाया की इन लोगो ने मिलकर जवाहर पंडित की हत्या कराई है और दर्ज मुकदमे में इनके मौके पर मौजूद होने की भी बात कही गई। यह हत्याकांड जिले में बड़े आपराधिक मामलों की शुरुवात थी। जिले में पहली बार किसी को अत्याधुनिक हथियार से मारा गया था।जवाहर पंडित की हत्या जिसमें अत्याधुनिक असलहे का इस्तेमाल हुआ था। 13 अगस्त 1996 को पूर्व विधायक जवाहर पंडित पंडित को सिविल लाइंस व कॉफी हाउस के पास AK 47 से बीच रोड पर घेर न गोलियों से भून दिया था।

सालों कोर्ट से रहा स्टे
पूर्व विधायक जवाहर हत्याकांड मामले में पूर्व विधायक उदय भान को छोड़कर बाकी पूर्व सांसद कपिल मुनि करवरिया पूर्व एमएलसी सूरजभान और रामचंद्र की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट ने रोक लगायी थी। मुकदमे का ट्रायल शुरू हुआ तो सबसे पहले उदय भान को अदालत में वारंट जारी हुआ 1 जनवरी 2014 को कोर्ट में सरेंडर किए और जेल भेज दिए गए। हाईकोर्ट का स्टे समाप्त होने के बाद बाकी तीनों को 28 अप्रैल 2015 को जेल जाना पड़ा। कहा जाता है कि हत्या के लिए भाड़े के शूटरों केा सुपारी दी गई थी। इसके पीछे बालू खनन शराब के कारोबार और सियासी वर्चस्व होने की बात सामने आई थी।

जब गायब हुए साक्ष्य
जवाहर पंडित हत्या काण्ड़ की सालो बाद सुनवाई शुरू होने के बाद कई बार साक्ष्य पेश करने का आदेश दिया गया। साक्ष्य के रूप में सदर मालखाने में हत्याकाण्ड से जुड़ी परिक्षण रिपोर्ट बुलेट और कारतूस और कई चीजें साक्ष्य के रूप में रखी थीं। जिसे आदेश के बाद भी कोर्ट के समक्ष नही पेश किया गया । इस मामले में सुनवाई के दौरान तीन पुलिस कर्मियों के खिलाफ के मुकदमा दर्ज किया गया। इस्ंपेक्टर सिविल लाइन ने सीबीसीआइडी बाराणसी में तैनात इस्ंपेक्टर एके निगम इलाहाबाद के सिपाही मो कलीम तत्कालीन मालखाना प्रभारी हरिराम चौधरी के खिलाफ मामला दर्ज हुआ। साथ ही विघायक हत्या काण्ड़ के बाद सिविल लाइन थाने के माल खानें में रखें गए उनके कपड़े को दिमक खा गए थे। बहस की शुरुवात में पुलिस की ओर से विषेश न्यायाधीश रमेश चन्द्र की अदालत में पुलिस की ओर से यह रिपोर्ट दी गयी थी। 23 साल पहले हुए इस हत्या काण्ड़ पर सबकी नजर है।

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प्रसून पांडे
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