यूपी की इस अदालत में आते है सबसे ज्यादा वीआईपी ,भगवान के भरोसे सुरक्षा व्यवस्था

कोर्ट परिसर में कागजों पर हो रही सुरक्षा

प्रयागराज | यूपी की अदालतों में बढ़ रही आपराधिक घटनाओं से प्रयागराज पुलिस कोई सबक लेता नहीं दिख रहा है। जबकि यहां की यहां की नैनी जेल में बंद कुख्यात कैदियों का पेशी पर आना जाना लगा रहता है। वही प्रदेश की एमपीएमए कोर्ट होने के नाते बड़े नेताओं की आवाजाही आम बात है। बीते दिनों आगरा और बिजनौर जिला अदालतों में हत्या उसके बाद लखनऊ जिला कचेहरी में दिन दहाड़े हुई बमबाजी की घटनाओं से भी प्रयागराज जिला प्रशासन अनजान बना हुआ है। जिला अदालत की सुरक्षा व्यवस्था के लिए प्रशासन जैसे खानापूर्ति कर रहा है।जिला अदालत में सात गेट है पर न कही भी सीसीटीवी कैमरे और न ही इन गेटों पर डोर फ्लोर मेटड डिटेक्टर की कोई व्यवस्था है।


अदालत परिसर के अंदर पहुंचने पर मेन गेट पर बैगेज स्कैनर जरुर लगा हुआ और डोर फ्लोर मेटल डिटेक्टर भी मौजूद है। लेकिन यहां पर तैनात पुलिस कर्मी परिसर में आने जाने वालों पर उनकी सुरक्षा छोड़ रखी है। हालाकि मिडिया और कैमरे को देख सजग होते हुए सुरक्षाकर्मी मुस्तैद होने लगे। ये हाल जिला अदालत की पुरानी बिल्डिंग का है। वहीं नई बिल्डिंग में पहुंचे तो वहां पर भी कमोवेश ऐसी ही स्थिति नजर आयी। सेशन अदालतों के प्रवेश के मेन गेट से बेरोकटोक वादाकारी और वकील और आम आदमी अन्दर आते जाते रहते है। ऐसे में आसानी से कोई भी व्यक्ति कोर्ट परिसर के अंदर विस्फोटक और असलहे लेकर दाखिल हो सकता है।


वहीं पार्किंग की व्यवस्था न होने से हजारों वाहन भी कोर्ट परिसर के अंदर खड़े होते हैं। लेकिन अदालत की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार अधिकारी लापरवाह बने हुए हैं। हाईकोर्ट ने बिजनौर की जिला अदालत में फायरिंग और हत्या के बाद जिला अदालतों की सुरक्षा को लेकर कड़े दिशा निर्देश भी जारी किए थे। लेकिन चंद दिनों बाद ही हाईकोर्ट की नाक के नीचे प्रयागराज ज़िला अदालत की सुरक्षा भगवान भरोसे हो गयी। सुरक्षा के लिए भारी भरकर फोर्स की तैनाती का दावा जरुर किया जा रहा है, मेटल डिटेक्टर सहित तमाम व्यवस्थायें भी उपलब्ध है लेकिन सब कागजी खाना पूर्ति जैसा ही है।


वहीं एसपी सिटी बृजेश कुमार श्रीवास्तव जिला अदालत की सुरक्षा को लेकर कहते है की जिला अदालत में पर्याप्त पुलिस बल की तैनात की गई है।लगातार चेकिंग करायी जा रही है। उन्होंने तो यहां तक दावा किया है कि वादकारियों, वकीलों, जजों और कर्मचारियों के लिए अलग-अलग गेट तय किए हैं।

प्रसून पांडे
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