बाबा रामदेव की पतंजली आयुर्वेद के इस मामले की पांच अक्टूबर को होगी सुनवाई, कोर्ट की अन्य खबरें

पतंजलि आयुर्वेद के लिए पेड़ काटने का मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट में पांच अक्टूबर को होगी।

इलाहाबाद. इलाहाबाद उच्च न्यायालय में पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड कंपनी गौतमबुद्ध नगर को यमुना औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा आवंटित भूमि से हजारों पेड़ काटने के खिलाफ याचिका पर जिलाधिकारी ने हलफनामा दाखिल किया। कोर्ट ने याची औसाफ व अन्य को जिलाधिकारी के हलफनामे का जवाब दाखिल करने का समय दिया और याचिका को सुनवाई हेतु 5 अक्टूबर को पेश करने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति तरूण अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति अशोक कुमार की खण्डपीठ ने दिया है।

 

याची का कहना है कि उसे दो सौ बीघा जमीन तीस साल के लिए वृक्षारोपण के लिए पट्टे पर दी गयी थी किन्तु उसी जमीन सहित अन्य जमीन अथारिटी ने पतंजलि कंपनी को दे दी जिस पर लगे पेड़ अथारिटी के अधिकारियों की मौजूदगी में जेसीबी से उखाड़ दिये गये। कोर्ट ने डीएम को मौके का निरीक्षण कर फोटोग्राफ के साथ हलफनामा दाािख्ल करने का आदेश दिया था।


गोरखपुर दंगे की सुनवाई 15 सितम्बर तक स्थगित
गोरखपुर 2007 दंगे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ , पूर्वमेयर अंजू चैधरी व विधायक राधामोहन अग्रवाल को भी अभियोजित करने की मांग के साथ घटना की सीबीआई जांच की मांग में दाखिल याचिका की सुनवाई 15 सितम्बर को होगी। एक घंटे बहस के बाद समयाभाव के कारण सुनवाई की तिथि तय की गयी। कोर्ट के निर्देश पर केस डायरी व सचिवालय की पत्रावली परवेज परवाज की तरफ से अधिवक्ता ने बहस की। याचिका की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी तथा न्यायमूर्ति ए.सी.शर्मा की खण्डपीठ कर रही है। याचिका में योगी पर दंगा भड़काने का आरोप लगाते हुए अभियोजन की अनुमति न देने के सरकारी फैसले की चुनौती दी गयी है।


हाईकोर्ट ने काशी विश्वनाथ ट्रस्ट व मंदिर के सीईओ से मांगा जवाब
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बांसफाटक वाराणसी स्थित भार्गव काम्प्लेक्स मामले में काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट व मंदिर के सीइओ से तीन दिन में जवाब मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति अशोक कुमार की खंडपीठ ने दुकानदार दीपक कुमार अग्रवाल व् 13 अन्य की याचिका पर दिया है। याचिका में मंदिर ट्रस्ट द्वारा काम्प्लेक्स खरीदने की अधिकारिता को चुनौती दी गयी है।

 

याची अधिवक्ता हेम प्रताप सिंह का कहना है कि मंदिर के कार्यपालक अधिकारी को केवल प्रबंधन का अधिकार है। जमीन या मकान खरीदने का वैधानिक अधिकार उन्हें नहीं है। ऐसे में ट्रस्ट द्वारा काम्प्लेक्स की खरीद करना शून्य होने के कारण रद्द होने योग्य है। मंदिर प्रशासन काम्प्लेक्स के दुकानदारों को जबरन मकान खाली करने को विवश कर रहा है। कोर्ट ने ट्रस्ट को इस मुद्दे पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

by  PRASOON PANDEY

 

 

रफतउद्दीन फरीद
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned