नेहरू के शहर में कांग्रेस पार्टी कार्यालय खाली करने को मिली नोटिस, कार्यकर्ताओं में मचा हड़कंप

कार्यकर्ता और पदाधिकारियों ने उसे बचाने की राहुल गांधी से की भावुक अपील, कहा यह कांग्रेस की धरोहर इसे बचाया

 

By: sarveshwari Mishra

Updated: 20 Jul 2018, 09:30 AM IST

इलाहाबाद. पंडित नेहरू के शहर में कांग्रेस पार्टी के कार्यालय पर एक बार फिर खतरा मंडराने लगा है। हजारों रुपये किराया बकाया होने पर पार्टी का दफ्तर हटाने को नोटिस मिल गया है। नोटिस में यह चेतावनी दी गई है कि अगर जुलाई के अंत तक किराया जमा नहीं किया गया तो 34 जवाहर स्क्वायर स्थित मकान से शहर कांग्रेस कार्यालय को हटा दिया जाएगा।

 


नेहरु, गांधी परिवार और कांग्रेस दिग्गजों ने आजादी के पहले इस भवन में कार्यालय को स्थापित किया था। शहर कांग्रेस कमेटी का कार्यालय पुराने शहर में स्थित है। नोटिस मिलने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओ में हड़कम्प मचा है। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु,कमला नेहरु, इंदिरा गांधी ने इसी कार्यलय से अपनी राजनीतिक पारी शुरू की थी। गौरतलब है कि इसी कार्यालय पर बतौर शहर अध्यक्ष पंडित नेहरू ,कमला नेहरू और इंदिरा गांधी बैठा करती थी।

 

कांग्रेस पार्टी के लिए धरोहर हो चुके इस कार्यालय को खाली कराने के लिए मकान मालिक ने पदधिकारियों को नोटिस देकर सूचित किया है। बताया जा रहा है कि ऐतिहासिक कांग्रेस के कार्यालय का किराया न मिलने के लिए खाली कराने की नौबत आयी है। जानकारी के मुताबिक कई सालों से मकान मालिक को इस कार्यालय का भुगतान नहीं किया गया। जिसके बाद इसे खाली कराया जा रहा है। नोटिस मिलने के बाद कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में खलबली मची है और पार्टी की विरासत और धरोहर को बचाने के लिए पदाधिकारियों ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सहित राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से भावनात्मक गुहार लगायी है।गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु की जन्म स्थली मीरगंज से चंद कदम की दूरी पर शहर कांग्रेस कमेटी का दफ्तर 34 जवाहर स्क्वायर पर स्थित है।

 

35 रुपये महीना किराया नहीं दे पाई कांग्रेस पार्टी
जानकारी के मुताबिक़ देश की आजादी के पूर्व 1932 में शहर कांग्रेस कमेटी के कार्यालय को यह स्थापित किया गया था। देश में कांग्रेस पार्टी का यह पहला कार्यालय था। जिसका किराया उस समय तीन या चार पैसे हुआ करता था। आज भी शहर कांग्रेस कमेटी के कार्यलय का किराया मात्र 35 रुपये प्रतिमाह है। इसके बावजूद कई सालों से राजनीतिक आयोजनों पर लाखों रुपये फूंकने वाली पार्टी शहर कांग्रेस कार्यालय के भवन का 35 रुपये महीना किराया नहीं दे पाई। किराए को लेकर मकान मालिक राजकुमार सारस्वत और पार्टी के बीच विवाद लगभग 40 साल पहले न्यायालय पहुंचा। न्यायालय ने मकान का किराया 35 रुपये महीने तय किया। कुछ वर्ष तक शहर कांग्रेस ने किराया दिया। उसके बाद किराया जमा करना बंद कर दिया। यही किराया बढ़कर 50 हजार रुपये से अधिक हो गया। जिसके बाद मकान मालिक ने दफ्तर को खाली करने की नोटिस दे दी है।

 

जवाहर स्क्वायर पर स्थित के कार्यालय केवल कांग्रेस की राजनीतिक परिदृश्य का ही गवाह नही रहा बल्कि इस कार्यालय में बैठकर क्रांतिकारियों ने देश में जंग ए आजादी की रणनीतियां तैयार की है। यह कार्यालय आजादी की जंग के बलिदानों का गवाह है। कांग्रेस की कई पीढ़ियों ने सीढ़ी पर चढ़कर अपनी सियासी पारी शुरू की है। पंडित जवाहरलाल नेहरू, कमला नेहरू , इंदिरा गांधी ,राजीव गांधी , संजय गांधी लाल बहादुर शास्त्री विश्वनाथ प्रताप सिंह सहित कांग्रेस के कई बड़े दिग्गज नेताओं ने यहां पर अपना समय बिताया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बाबा अभय अवस्थी बताते हैं कि आजादी के जंग में यह कार्यालय अंग्रेजो के खिलाफ लड़ाई लड़ने और रणनीति तैयार करने का प्रमुख केन्द्र था।

 

पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु की पत्नी कमला नेहरु शहर कांग्रेस कमेटी की पहली अध्यक्ष रहीं। पंडित जवाहर लाल नेहरु भी शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद पर रहे। जिसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी इस कार्यालय से पार्टी का संचालन किया।वरिष्ठ कांग्रेसी बाबा अवस्थी ने कहा कि इस कार्यालय से कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता और नेहरू,गांधी परिवार के पुरखों ने देश भर में संचालन किया है। अब इसे बचाने की जिम्मेदारी इस पीढ़ी पर है। बाबा अवस्थी ने भावुक अपील करते हुए कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व से बचाए यह पार्टी की धरोहर है यह पार्टी की आन बान और शान है।
By- Prasoon Pandey

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