फूलपूर की ऐतिहासिक सीट पर अब नये इतिहास का इंतज़ार...

उपचुनाव सपा भाजपा कांग्रेस सहित 22 उम्मीदवार है मैदान में है

By: प्रसून पांडे

Published: 13 Mar 2018, 05:03 PM IST

इलाहाबाद : गंगा यमुना सरस्वती की रेती को अपनी बाहों में लिया फूलपुर संसदीय क्षेत्र धार्मिकता को लेकर जितना प्रभावशाली और विश्व प्रसिद्ध है।उतना ही फूलपुर लोकसभा का राजनीतिक इतिहास भी गौरवशाली रहा है। धर्म आस्था और विश्वास के लिए जितना आकर्षण गंगा यमुना सरस्वती की त्रिवेणी धारा में है । उतनी धार्मिक मान्यताओं के लिये भी जिसे जाना जाता है ।वही सियासत की बात करे तो देश की राजनीत में फूलपुर संसदीय क्षेत्र का अपना विशेष महत्व है।भौगोलिक दृष्टि से जितनी उन्नत माटी फूलपुर संसदीय क्षेत्र की है। उतना ही शिक्षा प्राप्ति के लिये महत्वपूर्ण माना जाता है।भारत के लोकतंत्र को गति देने और देश को संचालित करने के लिये पंडित जवाहर लाल नेहरु ने इसी संसदीय क्षेत्र को चुना और सांसद हुए ।फूलपुर संसदीय क्षेत्र का राजनितिक इतिहास सियासत के मानचित्र पर आज भी अपना मजबूत हस्ताक्षर रखता है ।

दिग्गज सूरमाओं ने ठोकी ताल
फूलपुर लोकसभा में 1952 से लेकर 2014 तक जितने भी सियासी सूरमाओं ने जीत हासिल की उन सबको राजनीति के राष्ट्रीय पटल पर पहचान मिली। यह फूलपुर लोकसभा का आकर्षण था।कि आजाद के पहले प्रधानमंत्री ने अपना संसदीय क्षेत्र फूलपुर लोकसभा को चुना ,वही पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह दिग्गज नेता जनेश्वर मिश्रा ए देश की सियासत में अपना बढ़ा कद रखने वाला बहुगुणा परिवार जिसमें कमला बहुगुणा रामपूजन पटेल जंग बहादुर पटेल सहित केशव प्रसाद मौर्या का क्षेत्र है । और इन सभी राजनीतिक शख्सियतों को सियासी क्षितिज पर एक बड़ी पहचान मिली ।

लम्बे समय तक कांग्रेस का कब्जा
फूलपुर संसदीय क्षेत्र का गौरवान्वित करने वाला इतिहास जो पंडित जवाहरलाल नेहरु से 1952 में शुरू हुआ जो 1962 तक बरकरार रहा ।पंडित जवाहरलाल नेहरू अपने तीनों कार्यकाल में डेढ़ लाख से ज्यादा मतों से जीत दर्ज की तो वहीं उनकी बहन विजयलक्ष्मी पंडित वर्ष 1967 में कांग्रेस से चुनाव जीती । उनके इस्तीफे के बाद छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्रा फूलपुर के सियासी मैदान में उतरे सात बार केंद्र में मंत्री रहने वाले जनेश्वर मिश्रा ने यहां से इतिहास रच दिया।

कल परिणाम पर सब की नजर
फूलपुर संसदीय क्षेत्र कभी कांग्रेस का गढ़ था। लेकिन बीते कुछ सालो में कांग्रेस की दुरी जनता से बनी तो जनता ने कांग्रेस को यहाँ से दूर कर दिया। 2009 में बसपा को मिली पहली जीत के बाद 2014 में पहली भाजपा का कमल यहाँ खिला,एक बार फिर हुए उपचुनाव में सभी दलों ने पानी ताकत लगाई है । देखना यह है की कल आने वाला परिणाम भाजपा को फिर ख़ुशी देने जा रहा है ।की सपा बसपा के गठबंधन पर मोहर लगाने । वही कांग्रेस को इस बार कुछ बेहतर होने की उम्मीद है। तो वही निर्दलीय बाहुबली के समर्थक भी जीत का डीएम भर रहे है ।

एक नजर में 2014 का परिणाम

केशव प्रसाद मौर्य भाजपा 503564
धर्मराज पटेल सपा 195256
कपिल मुनि करवरिया बसपा 163710
मोहम्मद कैफ कांग्रेस 58127
नोटा 8424

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प्रसून पांडे
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