Pitru Paksha 2021: प्रयागराज में पिंडदान को उमड़ा श्रद्धालुओं का हुजूम, संगम घाट के किनारे पिंडदान का है विशेष महत्व

Pitru Paksha 2021: संगमनगरी के तीर्थपुरोहित मनोज पांडा ने बतया कि जो कोई व्यक्ति अपने पूर्वजों की मृत्यु की तिथि भूल जाता है वह विशेष रूप पितृ अमावस्या के दिन संगम में आकर दिवंगत माता-पिता और पूर्वजों का पिंडदान करता है। ऐसा करने से उनकी आत्मा की शान्ति, सुखसमृद्धि की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही गया श्राद्ध करने वाले व्यक्ति भी अपने पूर्वजों का पिंडदान संगम किनारे आ कर करता है।

By: Hariom Dwivedi

Updated: 06 Oct 2021, 04:25 PM IST

प्रयागराज. Pitru Paksha 2021- पितृ पक्ष के आखिरी दिन संगमनगरी में श्रद्धालुओं और यात्रियों का जन सैलाब देखने को मिला। सुबह भोर से ही यात्रियों का आगमन शुरू हो गया था। यात्री अपने पूर्वजों का पिंडदान करने के लिए संगम घाट पर पहुंचे। पितृ अमावस्या के दिन से ही पितृ पक्ष का समापन हो जाता है। बुधवार को संगम के किनारे यात्रियों ने अपने पूर्वजों की विधिविधान से पिंडदान करके विदाई किया। दूर-दूर से आये यात्रियों ने अपना सिर मुड़वा कर गंगा में स्नान किया और विधि पूर्वक पूर्वजों का पिंडदान किया। संगम के किनारे पिंडदान करने का विशेष महत्व होता है, इसीलिए दूर दराज से यहां यात्री पिंडदान के लिए आते हैं।

आत्मा की शान्ति के लिए किया जाता है संगम किनारे पिंडदान
तीर्थ पुरोहित मनोज पांडा पत्रिका उत्तर प्रदेश से खास बातचीत करते हुए बताया कि पितृ पक्ष का आखिरी दिन पितृ अमावस्या पड़ता है। आज बुधवार को पितृ अमावस्या से पितृ पक्ष का समापन हो जाता है। इस दिन लोग अपने पूर्वजों के आत्मा की शान्ति के लिए पितृ विसर्जन करते हैं। संगम किनारे यह विधि करने से उनको पुनः शांति मिलती है। इसके साथ पूर्वजों के आशीर्वाद से परिवार में भी खुशहाली आती है। संगम घाट को त्रिवेणी कहा जाता है इसीलिए यहां पिंडदान करने से मनोकामना भी पूर्ण होती है।

Pitru Paksha 2021: प्रयागराज में पिंडदान को उमड़ा श्रद्धालुओं का हुजूम, संगम घाट के किनारे पिंडदान का है विशेष महत्व

सभी कष्टों से मिलता है निवारण
तीर्थ पुरोहित मनोज पांडा ने कहा कि जो कोई व्यक्ति अभी गया श्राद्ध नहीं किया है वह भी पितृ अमावस्या के दिन संगम किनारे आकर पिंडदान करता है। यह मान्यता है कि संगम किनारे पिंडदान विसर्जन करने से पूर्वज खुश रहते हैं। जब घर पितृ खुश रहते हैं तो परिवार कष्टों से दूर रहता है। इसलिए दूर-दूर से लोग संगम आकर आखिरी दिन पूर्वजों का पितृ विसर्जन करते हैं।

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पितृ अमावस्या के दिन होता है शुभ मुहूर्त
प्रयागराज के तीर्थपरोहित मनोज पांडा ने कहा कि पित्तरों का पिंडदान के लिए पितृ अमावस्या का दिन शुभ माना जाता है। इसीलिए यात्री संगम किनारे आते हैं और मां त्रिवेणी के गोद में पूर्वजों का पिंडदान करते हैं। सबसे शुभ और अच्छा मुहूर्त पितृ अमावस्या माना जाता है।

Hariom Dwivedi
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