पुलिस की लापरवाही, रेलवे कर्मी को बना दिया लावारिश

पुलिस ने मृतक की तलाशी यदि सही तरीके से की होती तो एक रेलवे कर्मचारी का शव उसके परिजनों को मिल जाता 

इलाहाबाद. दारागंज थाने की पुलिस व पंचनामा भरने वाले दरोगा की लापरवाही आज एक पोस्टमार्टम के दौरान सामने आयी। पुलिस ने मृतक की तलाशी यदि सही तरीके से की होती तो एक रेलवे कर्मचारी का शव उसके परिजनों को मिल जाता है। इतना ही नहीं यहां तैनात जिम्मेदार अधिकारी भी लावारिशों के प्रति काफी लापरवाह बन चुके है। जबकि शासन से अंतिम संस्कार के लिए आने वाला धन कहा जा रहा है। यह तो पता नहीं है। लेकिन लावारिश शवों को संस्कार करने के लिए एक व्यक्ति को समाज सेवा के नाम पर शौप दिया जा रहा है। 

बतादें कि दारागंज थाना क्षेत्र के संगम चैकी क्षेत्र में एक 50वर्षीय दिलीप कुमार का शव मिला जो एक रेलवे कर्मचारी था शव लावारिश हालत में किला के समीप पाया गया। सूचना पर पहुंची दारागंज थाने की पुलिस ने खाना पूर्ती करते हुए शव का पंचनामा करके के  भेज दिया ।

 जब चिकित्सकों ने उसके शव का के लिए खुलवाया तो उसके पैंट के जेब में नार्दन सेन्टर रेलवे का एक आईकार्ड एवं उसके पास रेलवे का पास जम्बू से हाबड़ा का मिला। उसके पास से एक पेनकार्ड भी मिला। यह जानकारी होते हुए खबर नबिस जुट गये आखिर मृतक का नाम व पता क्या है। इसके बाद पता चला कि उस आई कार्ड में दिलीप कुमार 50वर्ष पुत्री हरीलाल लिखा था, उसका इम्पलाई नम्बर लिखा था जो 00538115 और एक पैनकार्ड मिला जिसका नम्बर बी.आर.यू.पी.के.035जी है। उसकी जन्म तिथि 8मई 1966 लिखा है। पंजाबनेशनल बैंक का खाता 3913000100105375 है। उसके पास से तीन लोगों को पास सुदा टिकट मिला। जिसमें पत्नी व बेटे का जिक्र किया गया हैं। 
इस तरह की लापरवाही करने वाले पुलिस कर्मियों एवं पंचनामा भरने वाले उस दरोगा को क्या कहा जाय। वह पता नहीं किस मद में डूबा था, उसने वगैर तलाशी लिये शव को शील कराया और पंचनामा करके भेज दिया। अखिर इस तरह पुलिस विभाग महेज खाना पूर्ती कर रहा है। 
सबसे अहम बात यह है कि उसके परिवार के लोग उसे कहां खोज रहें होगे और उसके परिवार के लोग कितना परेशान होंगे। लेकिन सूचना के बाद मौके पर पहुंचे दरोगा ने घोर लापरवाही किया और उसकी पहचान के लिए सही ढंग से प्रयास नहीं किया और यदि उसके पैंट की जेब को कायदे से देखा होता तो रेलवे में हेल्फर के पद पर तैनात रहे दिलीप कुमार पुत्र हरीलाल की पहचान उसी दिन हो जाती और उसके परिवार के लोग भी चीर घर पहुंच आते। लेकिन पुलिस की लापरवाही चीरघर में प्राइवेट तरीके से स्वीपर का काम कर रहे कर्मचारियों ने बड़ी बाखूबी से पकड़ लिया और इस कार्य में वहां मौजूद खबर नवीसों ने भी उसमें सहयोग किया। इसके बाद जाकर उसका नाम व पता एवं फोटो ग्राफ भी ले लिया है। हालांकि इस सम्बन्ध में चीरघर में तैनात चिकित्सकों से कोई वार्ता नहीं हो सकी।
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Ashish Shukla
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