'गूगल' भी नहीं बता पाएगा सैकड़ों साल पुरानी ये जानकारियां, जो एक मिनट में यहां से मिल जाएंगी, दुनियां भर से आते हैं लोग

जहां पहुंचने वाले यजमान जब कल्पवास करने आते हैं तो अपने पुरोहितों के ही यहां रूकते हैं

By: Ashish Shukla

Updated: 19 Jan 2019, 02:48 PM IST

प्रयागराज. कुंभ सनातन परंपरा का बहुत बड़ा इतिहास है। सैकड़ों साल पहले इस संगम की रेती पर लोग आते रहे हैं और पुण्य की प्राप्ति के लिए आस्था की डुबकी लगाते रहे हैं। आज समय बदला है लोग डिजिटल की तरफ पूरी तरफ से रूक करते जा रहे हैं। लेकिन इस जमाने में भी हमारी परंपरायें हमारे लिए संजीवनी साबित हो रही है। ऐसी ही एक परंपरा है प्रयागराज के तीर्थ पुरोहितों की। जहां पहुंचने वाले यजमान जब कल्पवास करने आते हैं तो अपने पुरोहितों के ही यहां रूकते हैं।

बाकयदा पोथी (रजिस्टर) में उनका नाम दर्ज होता है। ये परंपरा सालों साल से चली आ रही है। इन पुरोहितों की पोथी में इनके यजमानों(शिष्यों) की पूरी वंशावली है जिसके माध्यम अपने कई पीढ़ियों तक की जानकारी लोग आसानी से हासिल कर रहे हैं। जो यहां के अलावा कहीं और नहीं मिल सकता है।

जी हां तकनीकी के इस दौर में पुरातन प्रथाओं की जड़ें पूरी मजबूती से हमें साथ लेकर चल रही हैं। ऐसी ही एक प्रथा है प्रयागराज के तीर्थ पुरोहिती की। त्रिवेणी के तट पर तीर्थ पुरोहित विभिन्न झंडों और चिह्नों के तले यजमानी करते हैं। इनके पास देशभर से यजमान आते हैं। पूरे वर्ष संगम किनारे चौकी लगाकर यजमानों के लिए पूजा-पाठ, कर्मकांड करने वाले तीर्थ पुरोहित दान-दक्षिणा लेने उनके घरों को भी जाते हैं। इस कुंभ में दूर-दूर से आए लोग अपने सात आठ पीढ़ियों के बारे में जानकारी हासिल करने के उत्सुक देखे जा रहे हैं।

तांबे का लोटा लाल क्षंडा निशान वाले अमरनाथ पंडा भी प्रयागराज के पुरोहित हैं इनकी पुरोहिती भी जौनपुर, गाजीपुर, सुल्तानपुर, कुशीनगर बस्ती समेत कई जिलों में हैं। जौनपुर का मूल निवासी एक मुंबई का व्यवसायी परिवार इनका यजमान है। जो आकर अपने पूर्वजों के बारे में जान रहा है। उनके सिग्नेचर अंगूठे के निशाने आदि को अपनी यादों में समेट रहा है। इस परिवार के मुखिया जय प्रकाश बताते हैं कि पोथी से ही सही हम इस कुंभ में अपने परिवार की बहुत सी यादों को मन में उतार पा रहे हैं।
निहाई हथौड़ा लोहे का पिजंड़ा निशान वाले अनुज तिवारी के पास यूपी बिहार से लेकर नेपाल तक के यजमान आते हैं। जो अपने पूर्वजों के बारे में थोड़ा सा भी मिल जाने पर बेहद खुश होते हैं। इस तरीके से प्रयागराज में पुरोहितों के पास सैकड़ों साल का वो दस्तावेज है जो अन्य किसी के पास नहीं है।

दुनियां भर से आते हैं लोग

अमरनाथ बताते हैं कि कई दशकों से जो परिवार अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड, जर्मनी, आदि देशों में रहते हैं। जिनके परिवार की जड़ें भारत से जुड़ी रही वो वो लोग पूर्वजों के बारे में जानने समझने के लिए यहां आते हैं और नाम, पता, कुल-खानदान, सब कुछ जानकर जाते हैं। इन पुरोहितों के पास सैकड़ों साल की पोथी रखी है।

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