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प्रयागराज का उभरता सितारा संजय शिव नारायण ने, देख भर में लहराया परचम..

locationप्रयागराजPublished: Dec 26, 2023 05:49:53 pm

Submitted by:

Pravin Kumar

बिहार के आरा जिले में हुआ जन्म इलाहाबाद में पला बढ़ा पिताजी की मृत्यु बचपन में हो गईं मां ने घर संभाला। मां से प्रेरणा मिली। इस युवा ने अपने इस काम की वजह से देश भर में लहरा दिया परचम जो है चर्चा का विषय..

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इनके द्वारा निभाए गए ये किरदार

हाल ही में अमेज़न प्राइम पर रिलीज़ हुई "शहर लखोट" नामक नोयर वेब सीरीज़, देविका भगत और नवदीप सिंह द्वारा लिखित मनोरंजक ( कसी हुई gripping) कहानी और बहुस्तरीय ग्रे किरदारों के साथ सभी शैलियों के दर्शकों के बीच अपनी लोकप्रियता हासिल कर रही है, जिससे यह शहर में चर्चा का विषय बन गई है। नवदीप सिंह द्वारा निर्देशित (मनोरमा सिक्स फीट अंडर, एनएच 10 और लाल कप्तान जैसी प्रतिष्ठित फिल्मों से प्रसिद्ध) और खलील बचूअली द्वारा निर्मित, कलाकारों प्रियांशु पेनयुली, चंदन रॉय सान्याल, कुब्रा सैत, अभिलाष थपलियाल के पावर पैक्ड प्रदर्शन और विशेष उल्लेखनीय "अतरंगी" "अप्रत्याशित" किरदार भो और भी संजय शिव नारायण और मंजरी पुपला द्वारा निभाए गए ।
"अतरंगी" किरदार के बारे में बात करते हुए, हमें शो में "भो" का किरदार निभाने वाले संजय शिव नारायण से बात करने का मौका मिला। उन्होंने हमसे अपनी यात्रा के बारे में बात की कि कैसे वह फिल्म उद्योग में आए और उन्हें शो में प्राथमिक पात्रों में से एक को निभाने का अवसर मिला।
यंहा से शुरु हुई जीवन की यात्रा

वे कहते हैं, ''मैं इस पागलपन से भरे और अप्रत्याशित किरदार के लिए नवदीप सर को सबसे पहले बहुत आभार प्रकट करना चाहता हूँ जिन्होंने मुझ पर इतना भरोसा किया। आगे उन्होंने बताया की कैसे नवदीप सर के साथ काम करने के लिए उत्सुक और घबराया हुआ था क्योंकि मैं इलाहाबाद से हूं और यह किरदार राजस्थान के दूरदराज के इलाके से है, लेकिन यह किरदार मेरे साथ कुछ हद तक समानता भी रखता है क्योंकि किरदार भो की तरह मैंने भी अपने जीवन के शुरुआती चरण में ही अपने पिता को खो दिया था, मैं अपने किरदार के विपरीत शर्मीली हूं जो अपने आप में चुनौतीपूर्ण था लेकिन मैंने अपनी भूमिका के लिए अपना 100% देने की पूरी कोशिश की। संजय ने इंस्पेक्टर अविनाश और फिल्म joon जैसे विभिन्न प्रोजेक्ट्स में भी काम किया है, joon जो बरनाली रे शुक्ला द्वारा निर्देशित फिल्म है जो विभिन्न फिल्म समारोहों में यात्रा कर रही है।
प्रयागराज से है यह रिश्ता

अपनी यात्रा के बारे में बात करते हुए, वह कहते हैं, "मैं बिहार के आरा ज़िले मे पैदा हुआ और इलाहाबाद में पला-बढ़ा एक छोटे शहर का लड़का हूँ जब मैं केवल 10 साल का था, तब मेरे पिता का निधन हो गया। मेरी मां ने हमें पालने में बहुत संघर्ष किया लेकिन उन्होंने हमें वह सब कुछ दिया जो वह संभवतः दे सकती थी, चाहे वह अच्छी शिक्षा हो या अच्छे संस्कार हों। उनकी कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प ने ही मुझे यहां तक पहुंचाया है क्योंकि वह मुझे किसी भी स्थिति में कुछ भी करने और आगे बढ़ने के लिए बहुत ऊर्जा और प्रेरणा देती है।'' इसके अलावा, वह कहते हैं, ''बचपन में तमाम अनुभवों के बावजूद, मैंने लखनऊ से मेरी इंजीनियरिंग की और जल्द ही मुझे एहसास हुआ कि मैं 9-5 डेस्क की नौकरी के लिए नहीं बना हूं और अपने क्षेत्र की खोज के उत्साह में मेरा थिएटर से सामना हुआ, जिसका मुझे स्कूल में थोड़ा एक्सपोजर हुआ था और फिर ग्रेजुएशन के बाद 2-3 नाटक लखनऊ थिएटर सर्किट मे किया और फिर मैंने फैसला किया कि यह वह जगह है जहां मेरा मन बसता है और मुझे आनंद मिलता है, मैं जीवन भर इसे करते रहने में खुश रहूंगा।
अगले 6-7 वर्षों तक मैंने लखनऊ में कई प्रतिष्ठित थिएटर निर्देशकों के साथ खूब थिएटर किया। और बाद में मैंने अभिनय में अपना करियर बनाने के लिए मुंबई आने का फैसला किया और अब यहां मैं अपने सपने जी रहा हूं। वर्कफ्रंट पर वह 2-3 प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं, जो अगले साल के लिए लाइन में हैं और, और भी चुनौति पूर्ण किरदारों की उम्मीद कर रहे हैं।

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