scriptRate-o-wall will not remain cheap due to increase in the price of bric | घर बनने का अब सपना रह जाएगा सपना, ईंट की कीमत में बढ़ोतरी से दर-ओ-दीवार नहीं रहेंगे सस्ते | Patrika News

घर बनने का अब सपना रह जाएगा सपना, ईंट की कीमत में बढ़ोतरी से दर-ओ-दीवार नहीं रहेंगे सस्ते

ईंट-भट्ठा कारोबारी इनपुट टैक्स क्रेडिट के बिना छह प्रतिशत जीएसटी देने से जुड़ी एक कंपोजीशन स्कीम को चुन सकते हैं। जो कारोबारी कंपोजीशन योजना का विकल्प नहीं चुनना चाहते हैं, उन पर आइटीसी के साथ 12 प्रतिशत जीएसटी लगेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक जीएसटी बढऩे से हर तरह की ईंट महंगी हो गई है। इसका असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है।

इलाहाबाद

Published: April 06, 2022 06:05:11 pm

प्रयागराज: लगातार महंगाई मार अब घर बनवाने में भी पड़ने लगी है। पेट्रोल, डीजल, सीएनजी जैसे आप जरूरत की वस्तुओं की कीमत तेजी के साथ बढ़ रहे हैं। इसी तरह अब घर बनवाना भी महंगा हो गया है। ईंट की कीमत बढ़ने से मकान बनवाने वाले लाेगों की जेब पर अतिरिक्‍त दबाव पड़ने लगा है। जानकारी के लिए बतादें कि ईंट-भट्ठा कारोबारी इनपुट टैक्स क्रेडिट के बिना छह प्रतिशत जीएसटी देने से जुड़ी एक कंपोजीशन स्कीम को चुन सकते हैं। जो कारोबारी कंपोजीशन योजना का विकल्प नहीं चुनना चाहते हैं, उन पर आइटीसी के साथ 12 प्रतिशत जीएसटी लगेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक जीएसटी बढऩे से हर तरह की ईंट महंगी हो गई है। इसका असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है।
घर बनने का अब सपना रह जाएगा सपना, ईंट की कीमत में बढ़ोतरी से दर-ओ-दीवार नहीं रहेंगे सस्ते
घर बनने का अब सपना रह जाएगा सपना, ईंट की कीमत में बढ़ोतरी से दर-ओ-दीवार नहीं रहेंगे सस्ते
प्रयागराज में जाने ईंट के दाम

देश में तेजी के साथ बढ़ रही महंगाई के साथ ही अब घर बनवाने वाले मैटीरियल के दामों में बढ़ोत्तरी शुरू है। ईंट-भट्ठाें पर बढ़ी जीएसटी का असर ईंटों पर भी पड़ा है। अब 7000 प्रति हजार का आने वाले ईंट 8000 रुपये की हो गई है। अब प्रति ईंट की कीमत सिर्फ 8 रुपये हो गए हैं। अब इसका सीधा मीडियम वर्ग पर पड़ रहा है। अब सरकार ने 31 मार्च को जीएसटी दरों को अधिसूचित किया है, जो एक अप्रैल से लागू हो गई है।
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वाणिज्यकर विभाग के डिप्टी कमिश्नर मनोज कुमार त्रिपाठी ने जानकारी देते हुए बताया कि जो ईंट-भट्ठा संचालक यदि योजना का लाभ लेना चाहता है, तो कंपोजीशन स्कीम को चुनकर वह छह प्रतिशत तक जीएसटी चुका सकता है। वहीं योजना का लाभ नहीं लेकर आइटीसी का लाभ लेने वाले कारोबारियों को 12 प्रतिशत का टैक्स चुकाना होगा।

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