अपनों की रुसवाई पड़ सकती है भारी, ये भाजपाई दिलाएंगे कांग्रेस को जीत

निकाय चुनाव में जीत और हार की बिछने लगी बिसात

By: प्रसून पांडे

Published: 10 Nov 2017, 02:26 PM IST

इलाहाबाद नगर निकाय चुनाव में नामाकंन के बाद लगातार रोमांचकता बढती जा रही है।राजनितिक दिग्गजो ने अपनी अपनी गोट बिछाना शुरू कर दिया है। जीत हार की बिसात बिछने के साथ ही हर दिन मेयर चुनाव परवान चढ़ रहा है। बीते चुनाव में एक लाख वोटो से विरोधियो को पछाड़ने वाली निवर्तमान मेयर अभिलाषा गुप्ता एक बार फिर बीजेपी से मैदान में हैं। सत्ताधारी बीजेपी ने चार दर्जन से ज्यादा आवेदनकर्ताओं को छोड़ वर्तमान महापौर पर विश्वास जता कर नंदी परिवार की राजनीती को मजबूत बना दिया है। तो वही वरिष्ठ बीजेपी के नेता विजय मिश्रा ने चुनावी समय में बीजेपी का साथ छोड़ कर कांग्रेस से महापौर उम्मीदवार होकर कांग्रेस को लड़ाई में ला दिया है।

मेयर चुनाव के लिये दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी ने अपने पुराने समाजवादी नेता एवं अधिवक्ता विनोद चंद दुबे पर भरोसा किया है। जबकि बहुजन समाज पार्टी ने पुराने नेता रमेश केसरवानी को अपना प्रत्याशी बनाया है। तो वही निर्दलीय उम्मीदवार इस चुनाव में वोट कटवा साबित हो हैं।वही आखिरी समय तक असमंजस में रही कांग्रेस विजय मिश्रा के सहारे कांग्रेस एक बार फिर चौधरी जीतेन्द्र नाथ सिंह की तरह इतिहास दोहराने की कोशिश में है। विजय मिश्रा के नाम इसलिए भी उम्मीद है। की शहर भर में कैबिनेट मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नंदी और उनके परिवार का बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच अंदर ही अंदर विरोध है।जिसका फायदा सीधे विजय मिश्रा को मिल सकता है। क्योकि विजय मिश्रा जिले के ब्राह्मण नेता माने जाते हैं।और कांग्रेस इस बात बात का संदेश देने की कोशिश कर रही है।कि मेयर के चुनाव से सरकार नहीं बदलती है। इस तरह भाजपा से सीधे जाति विशेष को जुड़ने की कोशिश कर रही है।

विधानसभा और लोकसभा में भाजपा के साथ रहने वाले ब्राह्मण वोट को सीधे जुड़ने में जुटी कांग्रेस कभी अपने रहे परम्परागत वोट बैंक को साधने की कोशिस कर रही है। राजनितिक लोगो की माने तो जिस तरह सपा से बीते चुनाव ब्राहण दूर रहे है। उसे इस चुनाव में भी बनाये रखना चाहते है। तो वही नंदी परिवार के बढ़ते कद के सामने कई बीजेपी नेताओं के अस्तित्व को लेकर खतरा मंडराता दिख रहा है। जो अंदर ही अंदर नंदी का विरोध कर रहे है। इस बात को भाजपा के कई बड़े नेता जानते है , की अगर विधानसभा की तरह नंदी परिवार के पास मेयर की सीट भी गई तो।आने वाले समय में कई दिग्गजों का पत्ता गोल हो रहा है।जिसके खिलाफ कई बड़े नेता अपनी अपनी चाल चल रहे है। जिसका फायदा कांग्रेस को मिल सकता है।

वही विधानसभा में भाजपा में स्थानीय तौर पर उपेक्षित रहे कायस्थ वैश्य समुदाय का भी बड़ा वर्ग विजय मिश्रा को पसंद कर रहा है।अल्पसंख्यक समुदाय में जो भी उहापोह थी।उसे विजय मिश्रा खुद मिल कर खत्म करने में लगे है। साथ ही अल्पसंख्यक उसे ही वोट करेगा।जो बीजेपी को हराएगा तो इसका भी फायदा कांग्रेस को मिल सकता है। सालो बाद किसी चुनाव में कांग्रेस लड़ाई में दिख ही नहीं रही है।अगर कांग्रेस मजबूत होती है, तो एक बार कांग्रेस 2007 का इतिहास दोहराने में सफल होगी। वैसे अभी तक की लड़ाई में नंदी परिवार के जरिये भाजपा को लड़ाई कम भी नहीं आका जा सकता है।भाजपा के लिये यह लड़ाई आम चुनाव से कम नही है।

प्रसून पांडे
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