उम्र कैद की सजा पाए अभियुक्त की सजा रद्द

इस सजा के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी

प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में उम्र कैद की सजा पाए रामपुर के नंदलाल की सजा रद्द कर दी है । कोर्ट ने कहा कि यदि वह किसी अन्य मुकदमे में वांछित ना हो तो उसे रिहा किया जाए। दीनदयाल और नंदलाल को सेशन कोर्ट रामपुर ने 28 मई 1993 को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। इस सजा के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी ।

अपील पर न्यायमूर्ति पंकज नकवी और सुरेश कुमार गुप्ता की पीठ ने सुनवाई की । अधिवक्ता सुधांशु कुमार गौर का कहना था कि उपरोक्त मामले में वादी मुकदमा श्री कृष्ण जो मृतक राम अवतार का पिता है कि घटनास्थल पर मौजूदगी संदिग्ध है। वादी का कहना है कि उसका पुत्र और वह 17 दिसंबर 1990 को सुबह 9:30 बजे खेत में पानी लगाने के लिए सरकारी ट्यूबवेल पर गया था। लाइट ना होने के कारण वह और उसका पुत्र वहीं बैठ कर इंतजार कर रहे थे । तभी गांव के नंदलाल और दीनदयाल वहां पर आए और पहले अपने खेत में पानी लगाने की जिद करते हुए झगड़ा करने लगे । इसी बात को लेकर अभियुक्तों ने राम अवतार को चाकू मारकर घायल कर दिया ।

वादी अपने बेटे को बचाने दौड़ा तो उसे भी चाकू लेकर दौड़ा लिया गया। इसके बाद अभियुक्तों ने राम अवतार को पुआल में आग लगाकर उसमें फेंक दिया। अस्पताल ले जाते समय उसकी मृत्यु हो गई। अधिवक्ता का कहना था कि वादी मुकदमा की घटना स्थल पर मौजूदगी संदिग्ध है क्योंकि उसके मुताबिक वह अपने बेटे को कंधे पर उठाकर के घर तक ले गया ।मगर उसके शरीर और कपड़ों पर कहीं भी खून का दाग नहीं लगा ।

इसी प्रकार से मृतक के सिर में आई गंभीर और गहरी चोट का जिक्र ना तो वादी ने अपने बयान में किया है और ना ही प्राथमिकी में किया गया है कि वह चोट कैसे लगी। कोर्ट ने बचाव पक्ष की दलील मंजूर करते हुए अभियुक्त नंदलाल को संदेह का लाभ देकर के रिहा कर दिया है । जबकि दीनदयाल की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई थी। इसलिए उसका मुकदमा समाप्त कर दिया।

Ashish Shukla Desk
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