आधार और राशन कार्ड लिंक होेने के बाद कोटेदारों ने खोला मोर्चा, अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे

आधार और राशन कार्ड लिंक होेने के बाद कोटेदारों ने खोला मोर्चा, अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे
Protest

गल्ला विक्रेता संचालकों का आरोप, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत नहीं दी जा रही मिलने वाली सुविधाएं

इलाहाबाद. सस्ता गल्ला दुकानों पर बायोमैट्रिक में अंगूठा लगाकर राशन देने के लिए आधार कार्ड लिंक कराया जा रहा है। इसके लिए जारी निर्देश सहित अन्य चीजें गल्ला दुकान संचालकों के लिए गले की हड्डी बन गए हैं। बायोमैट्रिक प्रणाली शुरू होने के साथ ही दुकान संचालक भी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर धरने पर बैठ गए हैं। आज करीब 200 दुकान संचालकों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।


धरने पर बैठे सस्ता गल्ला विक्रेता संचालकों ने आरोप लगाया कि उन्हें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मिलने वाले लाभ और सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। जिसके कारण उन्हे काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। सस्ता गल्ला विक्रेता संघ जिला अध्यक्ष शिव प्रकाश पांडेय ने आरोप लगाते हुए कहा कि दुकानदारों का लगातार शोषण हो रहा है। दुकानदारों पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है कि आधार कार्ड जमा कर उन्हें दिया जाए। ताकि अक्टूबर के अंदर प्रक्रिया को पूरा किया जा सके। जो कि संबंधित विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों का कार्य है।


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इसके अलावा नियमानुसार राशन का डोर स्टेप डिलीवरी की व्यवस्था है। बावजूद इसके अपनी जेब से पैसा लगा कर राशन उठाना पड़ रहा है। हड़तालियों का कहना है कि शासन जितना राशन पर कमीशन नहीं देती, उससे ज्यादा उसका खर्च पड़ जाता है। मालूम हो कि शासन की ओर से प्रति कुंटल पर इन्हें 70 रूपये का कमिशन दिया जाता है। इन्होंने शासन से वेतन की भी मांग की है। इसके अलावा उन्होंने प्रति महीने गल्ले की दुकान का किराये की भी मांग की है।

चार क्विंटल राशन की हो रही घटतौली
धरने पर बैठे कोटेदारों का आरोप है कि गोदाम से हर महीने घटतौली हो रही है, यानि गोदाम से जो राशन कोटेदारों को दिया जा रहा है। उसके प्रत्येक 50 किलो राशन की बोरी में 3 से 5 किलो तक कम राशन दिया जा रहा है। इस तरह उचित दर विक्रेताओं को 100 रूपये प्रति क्विंटल खर्च के अलावा दो से चार क्विंटल तक घटतौली का शिकार होना पड़ रहा है। इसकी शिकायत कई बार की गई लेकिन आज तक सुनवाई नहीं हुई।
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