इलाहाबाद के इन दो चेहरों में से किसी एक को बीजेपी बना सकती है यूपी का मुख्यमंत्री

इलाहाबाद के इन दो चेहरों में से किसी एक को बीजेपी बना सकती है यूपी का मुख्यमंत्री
Sidharthnath Singh and Keshav Prasad Maurya

एक चेहरे को खुद बीजेपी दे चुकी है बड़ी जिम्मेदारी का संकेत तो दूसरे के आने से बीजेपी में आयी जान।

PRASOON PANDEY

इलाहाबाद. यूपी चुनाव में भारतीय जनता पार्टी प्रचंड बहुतमत के साथ सूबे में ऐतिहासिक जीत हासिल की है। और यह भी साफ है कि जनता आज भी प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी के वादों पर विश्वास करती है और आज भी अच्छे दिन को उम्मीद में है। देश के सबसे बड़े सूबे में सबसे बड़ी जीत हासिल करने के बाद सरकार का चेहरा कौन होगा इस पर मंथन शुरू हो गया है। सूबे के मुखिया के तौर पर भाजपा अपने किस नेता का चेहरा सामने लाती है इस बात को।लेकर कयास शुरू हो गए है।


यूपी चुनाव के पहले प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर इलाहाबाद जिले के फलपुर के सांसद केशव प्रसाद मौर्या को प्रदेशअध्यक्ष बना कर सब को चैका दिया था क्यों की उसके पहले तक केशव के नाम की चर्चा प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर नही थी। जिले की फलपुर सीट पर पहली बार कमल खिला तो वही इलाहाबाद की धरती पर पार्टी ने अपना सबसे बड़ा आयोजन राष्ट्रिय कार्यकारिणी का करके यूपी सहित पूर्वांचल की धरती पर बड़े उलट फेर की सम्भना के संकेत दे दिए थे।


यूपी चुनाव में महत्वपूर्ण सर्वाधिक सीट वाले इलाहाबाद जिले की भूमिका सरकार में भी अहम मानी जा रही है और सूबे के प्रदेश अध्यक्ष सहित पार्टी के राष्ट्रीय सचिव सिद्धार्थ नाथ सिंह का नाम मुख्यमंत्री की रेस में सामिल है। हालांकि ये नेता खुद से कुछ भी कहने से बच रहे है। केशव प्रसाद के नेतृत्व में 66 साल बाद 325 सीटों का प्रचंड बहुमत भाजपा को मिला है इसके पहले कांग्रेस को 1951में 388 सीटों पर जीत मिली थी और उस समय कांग्रेस का गढ़ था इलाहबाद और स्वराज भवन में पार्टी का दफ्तर था।


केशव के नाम पर चर्चा
यूपी की सत्ता पर फतह करके अब सिंघासन का चेहरा तय होना है। प्रदेश के कई बड़े नाम चर्चा में उनमें से इलाहाबाद जिले के दो नाम प्रमुख है जिसमे खुद प्रदेश अध्यक्ष और  सिद्धार्थ नाथ सिंह का नाम प्रमुख है। केशव के नाम की चर्चा इसलिए है कि उनकी अगुवाई में पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला है ।और पिछड़ों को जोड़ने में कामयाब रहे है। खास तौर पर यह माना जा रहा है सपा बसपा के फिक्स वोट बैंक की घेरा बन्दी और उनमें सेंध लगाने में कामयाब रहें है। विहिप के प्रचारक रहे है और हिंदू वादी नेता माने जाते है। लेकिन पिछड़ी जाति को इकट्ठा करने के नाम पर अगड़ो को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के बाद मुख्यमंत्री बनाने पर पार्टी में विरोध हो सकता है वही सरकार और प्रशासन दोनों का अनुभव केशव का नही रहा है।


राजनितिक सफर
केशव प्रसाद मौर्या मूल विहिप के कार्यकर्ता के रूप में रहे है इन्हें विहिप अध्यक्ष अशोक सिंघल का आजीवन खास माना जाता रहा है।केशव प्रसाद 2002 में शहर पश्चिमी से भजापा उम्मीदवार रहे लेकिन अपने पहले चुनाव में सफलता नही मिली 2007 में दूसरी बार पार्टी ने फिर केशव को यही से चेहरा बनाया लेकिन फिर बड़े अंतर से केशव को हराना पड़ा। वही 2012 के चुनाव में केशव प्रशाद अपने गृह नगर सिराथू से मैदान में उतरे और पहली बार इस सीट पर भाजपा को जीत मिली । 2014 के लोकसभा में पार्टी ने जिले की फूलपुर सीट से मैदान में उतरे और ऐतिहासिक जीत हासिल कर फूलपुर सीट पर पहली बार कमल खिलाया। 2017 चुनाव से पहले केशव को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली और भाजपा को प्रचंड 325 सीटों पर जीत मिली।



खुद प्रधानमंत्री की पसंद है सिद्धार्थ
वही पार्टी के राष्ट्रीय सचिव और पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश के प्रभारी सिद्धार्थ नाथ सिंह खुद प्रधानमंत्री मोदी के एक्सपेरीमेंटल ब्याय है जिन्होंने इलाहबाद की शहर पश्चिमी पर पहली बार कलम खिलाया है। सिद्धार्थ नाथ मोदी और अमित शाह के करीबी माने जाते है।गुजरात विधानसभा 2012 के चुनाव में गुजरात के चुनाव प्रचार प्रमुख की अहम जिम्मेदारी निभायी है। सिद्धार्थ नाथ पार्टी में बेहतर संतुलन वाले नेता माने जाते है। सिद्धार्थ नाथ लम्बे समय से पार्टी में राष्ट्रीय स्तर से काम देखते आये है,सरकार चलाने और काम करने के तरीकों से वाकिफ है ।और सबसे बड़ी बात यह भी है कि पार्टी में निर्वावद चेहरे है किसी गट कस उन पर दाग नही है।



राजनितिक सफर
सिद्धार्थ नाथ सिंह 1977 से भारतीय जनता पार्टी से जुड़े दिल्ली यूनिवर्सिटी में छात्र जीवन में ही विद्यार्थी परिषद् के कार्यकर्ता के तौर पर जुड़े रहे। राजनितिक तौर पर सिद्धार्थ नाथ को चुनाव और पार्टी में मैनेजमेंट का मास्टर माना जाता है वर्तमान समय में पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश के प्रभारी है,2012 में गुजरात में चुनाव प्रमुख रहे गुजरात की सूरत बेल्ट पर जँहा पार्टी कमजोर थी 20 सीट पर पार्टी हारने की कगार पर वहाँ से 17 सीटो पर बीजेपी को जीता मोदी और अमित शाह के करीबी हो गए।सिद्धार्थ नाथ शहर पश्चिमी में पहली बार बीजेपी को जीत दिलाने में सफल रहे है। सिद्धार्थ नाथ पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नाती है शहर पश्चिमी पर ही 1980 में नाना चैधरी नौनिहाल सिंह विधायक हुए थे और यूपी के शिक्षा मंत्री रहे।



क्यूँ है जिले से सीएम बनाने की चर्चा
संगम नगरी से फिर कोई मुख्यमंत्री का चेहरा होगा इसकी चर्चा इसलिये सबसे ज्यादा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के बाद यूपी चुनाव के आगाज के तौर प्रप्रधानमंत्री मोदी ने पहली सभा इलाहाबाद से की और जीत का शंखनादकिया ।वही चुनाव से पहले फूलपुर कर अंदावा में रैली को संबोधित करने आये प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अगला प्रधानमंत्री इलाहाबाद से होगा और यही से यूपी का भाग्य निराधित होगा और सिद्धार्थ नाथ उनके ही एक्सपेरीमेंटल ब्याय है। वही चुनाव के आखिरी समय में रोड शो के दौरान भजापा के  राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी अपने रोड शो के दौरान मुख्यमंत्री इलाहाबाद से होगा इसके संकेत दिए थे। पार्टी के दोनों अहम् नेताओ के कहने के बाद यह तो तय है कि इलाहाबाद अहम भूमिका में होगा।
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