स्वामी निश्चलानंद का मोदी सरकार पर हमला, कहा- गंगा का राजनीतिक हथकंडे के रूप में हुआ इस्तेमाल

 स्वामी निश्चलानंद का मोदी सरकार पर हमला, कहा- गंगा का राजनीतिक हथकंडे के रूप में हुआ इस्तेमाल
Swami Nishchalanand

कहा- गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर देने पर गोरक्षा सुनिश्चित हो जायेगी, यह तय नहीं

इलाहाबाद. संगम नगरी पहुंचे शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला। केंद्र सरकार को घेरते हुए उन्होंने कहा कि गंगा को राजनीतिक हथकंडे के रूप में इस्तेमाल किया गया और सबका मुंह बंद करने के लिए राजनीतिक कारणों से गंगा राष्ट्रीय नदी घोषित तो हुई  लेकिन आज तक गंदगी साफ नही हुई।उन्होंने कहा राजनितिक हथकंडे और लाभ लेने के चलते गोवंश को राष्ट्रीय पशु घोषित कर देने पर गोरक्षा सुनिश्चित हो जायेगी यह तय नही है। पहले तो यह समझना होगा की राजनेताओं का मनोबल शुद्ध है कि नहीं।


शंकराचार्य निश्चलानंद फर्जी शंकराचार्य और महामंडलेश्वर पर सवाल उठाते हुए कहा कि संत समाज में अराजक तत्वों का प्रवेश हो गया है। उन्होंने बताया कि बीते दिनों उज्जैन के पूर्ण कुम्भ में उन्होंने भाग लिया और देखा कि शंकराचार्य के रूप में तमाम अराजक तत्वों को सम्मानित किया गया नासिक के कुंभ में भी यही हाल रहा। जबकि जिन राज्यों में पूर्ण कुंभ लगा वहां पर भाजपा की ही सरकार रही। और यहां अराजक तत्वों को पूरी सुविधा संतो वाली मुहैया करायी गई किसी भी राजनीतिक दलों में यह मनोबल नहीं देखने को मिलता है। आस्था और संस्कृति के  साथ अन्याय ना होने दें ।


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शंकराचार्य ने सवाल उठाया कि धर्म और आस्था से जुड़े हुए संस्थाओं में अराजक तत्वों कैसे प्रवेश किए। उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि अराजकतत्व सम्मानित कैसे हुए शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद ने कहा कि जब मुझे मंदिर और मस्जिद के मुद्दे पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया तो मैंने नहीं किया उसी के विरोध में मेरे खिलाफ षड्यंत्र रचा गया। अराजक तत्वों को धार्मिक रूप से प्रोत्साहित और प्रवेश दिया गया।





गोरक्षकों के सवाल पर स्वामी निश्चलानंद महाराज ने कहा कि अभी तो केरल में गोवंश को ही राजनितिक लोगों ने दंडित किया है और गोवंश रक्षकों को गोपालक को राष्ट्र द्रोही घोषित करने पर तुले हैं। उन्होंने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सरकार के मनोबल से काम नहीं कर रही है, इस मामले में यह सोचने की बात है कि कौन किसको दंड देगा और किसे न्याय मिलेगा। राष्ट्र की परख जब हमारी राष्ट्र की संस्कृति के अनुरूप होगी निश्चित ही अपने आप बेहतर काम होंगे। जिन लोगों की आस्था राष्ट्रीय संस्कृति और विश्वास नही करते नही वह लोग भारत में राजनीति करने और राजनीतिक रुप से सक्रिय होने के अधिकारी नहीं है । भारत को नए तरीके से सैद्धांतिक रूप से स्वतंत्र कराने की जरूरत है, जिसके लिए नए सिरे से प्रयास करना होगा।
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