यूपी बार काउंसिल के अध्यक्ष हरिशंकर सिंह पर गंभीर आरोपो के चलते , कार्य करने पर लगी रोक

 

उपाध्यक्ष देवेन्द्र मिश्र नगरहा को सौपा गया अध्यक्ष का कार्यभार

प्रयागराज 16 मई | बार कौंसिल आफ इंडिया के अध्यक्ष मनन मिश्र ने उ प्र बार काउंसिल के अध्यक्ष हरिशंकर सिंह को अध्यक्ष पद का उनके कार्य करने पर रोक लगा दी है। बी सी आई अध्यक्ष ने 14 मार्च के बाद इनके द्वारा जारी सभी आदेशों को स्थगित करते हुए उन्हें बार काउंसिल की आम सभा में रखने का निर्देश दिया है। इस बीच अध्यक्ष पद का कार्य ए यूपी बार काउंसिल के उपाध्यक्ष देवेन्द्र मिश्र नगरहा देखेगे । अध्यक्ष सिंह से पद का दुरुपयोग करने तथा गवन करने के आरोपो की 10 दिन में बार काउंसिल आफ इंडिया ने सफाई देने को कहा है । सिंह के खिलाफ बार काउंसिल आफ यूपी के सदस्यों की शिकायत पर बार काउंसिल आफ इंडिया ने कार्रवाई की है ।

आरोप है कि सिंह ने 15 मई को 72 लाख के गवन के आरोपी सचिव राम जीत सिंह यादव का निलंबन रद्द करते हुए बहाल कर दिया था। स्थगित आदेशों में इसका भी जिक्र है। यूपी बार काउंसिल के उपाध्यक्ष देवेन्द्र मिश्र नगरहा को अध्यक्ष का कार्यभार सौपा गया है। बार काउंसिल आफ इंडिया के सचिव श्रीमन्तो सेन ने हरिशंकर सिंह को नोटिस जारी कर सदस्यों द्वारा उनके खिलाफ लगाये गये आरोपों की 10 दिन के भीतर सफाई मांगी है।

पूर्व अध्यक्ष सिंह पर आरोप है कि उन्होंने बिना किसी प्राधिकार के ऐसे लिपिक के जरिए संयुक्त रूप से बैंक खाता खुलवाया जिसे ऐसा करने का अधिकार नहीं है। इस खाते में पंजीकरण से प्राप्त लाखो रूपये जमा कराये। बिना बार काउंसिल की सहमति के निलंबित सचिव को मनमाने ढंग से बहाल कर दिया। जो हाईकोर्ट के जज की जांच मे 72 लाख रुपये के गवन के दोषी पाये गये हैं। बार काउंसिल आफ इंडिया ने इन सभी आरोपो की सिंह से सफाई मांगी है।

मालूम हो कि उ प्र बार काउन्सिल के 8 सदस्यों ने अध्यक्ष के खिलाफ बी सी आई चेयरमैन को पत्र लिखा। प्रदेश केबार काउंसिल आफ इंडिया के सदस्य श्रीनाथ त्रिपाठी ने इस पर कार्रवाई की मांग की। कहा गया कि अध्यक्ष सिंह पद का दुरुपयोग कर मनमानी पर उतारू है। उनका कार्यकाल 8 जून को समाप्त हो रहा है। चुनाव के लिए बैठक बुलाने से सिंह ने लॉकडाउन का बहाना बता इंकार कर दिया है। बार बार काउंसिल के अध्यक्ष लूट मे लगे हैं। बिना अधिकार के निलंबित सचिव को मनमाने ढंग से बहाल कर दिया। इस पर तत्काल कार्यवाई की जाय। जिस पर भारतीय विधिज्ञ परिषद के अध्यक्ष मनन मिश्र ने सख्त कार्रवाई की है।

प्रसून पांडे
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