पॉलिटिकल प्रेशर और गुडवर्क के चक्कर में बेकसूर असद अली को भेजा था जेल, अपनी ही जांच में खुली पुलिस की पोल

पॉलिटिकल प्रेशर और गुडवर्क के चक्कर में बेकसूर असद अली को भेजा था जेल, अपनी ही जांच में खुली पुलिस की पोल

Mohd Rafatuddin Faridi | Publish: Sep, 08 2018 11:03:24 PM (IST) Allahabad, Uttar Pradesh, India

यूपी पुलिस का एक और हैरतअंगेज कारनामा।

 

सुनील सोमवंशी

प्रतापगढ़. यूपी के प्रतावगढ़ में पुलिस ने गुडवर्क के चक्कर में बेगुनाह को ही सलाखों के पीछे भेज दिया था। बाद में पुलिस की अपनी जांच में ही पूरा मामला कुछ और निकला इसके बाद उसी अपराध में दूसरों का नाम आया जिसमें बेगुनाह को पुलिस ने पकड़ा था। पुलिस ने इस मामले में कई नाम लिये हैं और उनमें से कुछ की गिरफ्तारी की बात भी कही है। पुलिस ने अब खुलासा किया है कि ठेकेदार हरिश्चंद्र सिंह की हत्या की साजिश छाता का पुरवा गांव निवासी कलाम ने अपने आमान का बदला लेने के लिये दोस्त इमरान के साथ मिलकर रची थी। इसमें सेबू और अशरफ को हत्या की सुपारी मिली।


ये है पूरा मामला

बीते 14 अगस्त को प्रतापगढ़ के अंतू थानान्तर्गत लोहंगपुर गांव निवासी हरिश्चंद्र सिंह की पूर्व सपा विधायक मुन्ना यादव के गांव पुरेअंती में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गयी और बाइक सवार बदमाश भाग निकले। मृतक हरिश्चंद्र सिंह नागेन्द्र सिंह उर्फ़ मुन्ना यादव का बेहद करीबी था और सपा का सेक्टर प्रभारी होने के साथ ठेकेदार भी था। इस हत्या के बाद लोगों ने सड़क जाम कर दिया। पुलिस दबाव में आयी और मामले में चार नामजद समेत पांच लोगो पर एफआईआर दर्ज कर ककरहा गांव निवासी ठेकेदार असद अली उर्फ़ मुन्ना को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। हालांकि असद हत्या के वक्त वह घर होने की बात कर रहा था।

 

 

 

बावजूद इसके पुलिस ने आपसी रंजिश का मामला मानकर उसे सलाखों के पीछे भेज दिया और अन्य आरोपियो की तलाश में जुट गयी। इस दौरान इस मामले में पकड़े गए असद अली को बेगुनाह बताते हुए उसे जेल भेज देने को लेकर सियासत गर्म हो गई और पुलिस को दोबारा जांच शुरू करनी पड़ी। जब पुलिस ने दोबारा जांच की तो मामला कुछ और ही निकला। पुलिस हत्थे जब इस दौरान शातिर बदमाश अशरफ लगा तो मामले से पर्दा उठ गया।

 

मीडिया के सामने पुलिस अधीखक ने बताया कि मृतक के रिश्तेदार भगत सिंह ने छाता का पुरवा निवासी कलाम की बहन तहसीन बानो को घर से भगाकर प्रेम विवाह कर लिया। इस मामले में कलाम ने आरोपी के खिलाफ कार्यवाही के लिए नगर कोतवाली में एफआईआर दर्ज करायी। पर राजनैतिक प्रभाव में कोई कार्यवाही नही हुई। इससे अपमानित कलाम ने अपने रिश्तेदार की पैरवी करने वाले पूर्व विधायक के खास ठेकेदार हरिश्चंद्र सिंह को ही रास्ते से हटाने का फैसला कर लिया।

 

कलाम ने अपने दोस्त इमरान और रिश्तेदार इरफ़ान के साथ पूरा प्लान बनाया। इसी प्लान के तहत गजराही गांव के शातिर बदमाश अशरफ़ और कंधई इलाके के सेबू को दो लाख की सुपारी हत्या के लिए दी गयी। इसमें से 50 हजार एडवांस दिया गया। अशरफ ने अपने साथियों के साथ मिलकर घर से शहर आते समय ठेकेदार हरिश्चन्द्र की हत्या कर दी और बाइक से भाग खड़े हुए।

 

पुलिस ने अशरफ के पास से हत्या में प्रयुक्त पिस्टल और बाइक भी बरामद कर लेने का दावा किया है और उसके फरार साथियों की तलाश में जुटी है। इस मामले ने पुलिस की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सिर्फ राजनैतिक दबाव और गुडवर्क के चक्कर में बेगुनाह को जेल भेज देने का यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

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