राजस्थान में कम्पनी ने बिजली चोरी करने के लिए बनाया जुगाड़, मीटर के 4 मीटर दूर रखने पर नहीं आता बिल

ऐसा उपकरण बनाने के बाद कम्पनियां लगातार बिजली की चोरी कर रही थी, अब इन पर 6 करोड़ 40 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है।

जयपुर डिस्कॉम के सतर्कता दल ने सोमवार देर रात अलवर जिले की उद्योग नगरी भिवाड़ी स्थित तीन औद्योगिक इकाइयों में बड़े पैमाने पर बिजली चोरी पकड़ 6.40 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। सतर्कता दल ने उद्योग इकाइयों के खिलाफ बिजली चोरी का मामला दर्ज किया है। इन तीनों इकाइयों पर जुगाड़ तकनीक से इलेक्ट्रिक मीटरों की चाल रोक बिजली चोरी की जा रही थी। यह उपकरण मीटर के 3-4 मीटर दूर रख दिया जाता था, इस जुगाड़ में मैगनेट लगी है। इससे यह मीटर के सम्पर्क में आता। इस उपकरण को बनाने में 1 लाख से ज्यादा का खर्चा आया है। अब टीम इस उपकरण की जांच में जुट गई है।

विद्युत निगम अधिकारियों का दावा है कि संभवतया देश के किसी भी राज्य में इतनी बड़ी बिजली चोरी करने का यह पहला बड़ा मामला सामने आया है। दल ने उपभोक्ताओं को रंगेहाथों पकड़ बिजली चोरी में प्रयुक्त उपकरण एवं विद्युत मीटर जब्त कर लिए हैं। साथ ही दोषी उपभोक्ताओं के बिजली कनेक्शन भी विच्छेद कर दिए है।
जयपुर डिस्कॉम के प्रबंध निदेशक एके गुप्ता के निर्देशन में विद्युत सतर्कता दल ने आरोपी तीनों इकाइयों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच प्रारम्भ कर दी है। निगम की इस औचक एवं गोपनीय बड़ी कार्रवाई से भिवाड़ी के अन्य उद्योगपतियों में भी हडक़म्प मच गया है। तीनों इकाइयों में बिजली यूनिट छह माह के मुकाबले काफ ी कम आ रही थी। जिससे तीनों शक के दायरे में आ रही थी। इसी को आधार बना तीनों इकाइयों पर सघन रूप से नजर रखी जा रही थी।

एटीएम भी कर सकते हैं स्वीप

सतर्कता दल में शामिल एएसपी वीरेन्द्र मीणा ने बताया कि जिन उपकरणों से बिजली चोरी की जा रही थी, इन्हें एटीएम के सामने रख उसे भी स्वीप किया जा सकता है। इस तकनीक को बनाने वाले आरोपित शातिर नजर आते हैं। सतर्कता दल मामले में गहनता से जांच कर रहा है। बिजली चोरी में प्रयुक्त उपकरणों की भी गहनता से जांच कराई जाएगी। ताकि पता चल सके कि किन-किन धातुओं का इस्तेमाल किया गया है।

आम आदमी बन करते रहे ट्रेकिंग

एएसपी वीरेन्द्र मीणा ने बताया कि बिजली चोरी की शिकायत मिलने पर सतर्कता दल सदस्य छह फरवरी को भिवाड़ी पहुंच गया। होटलों, रेस्ट हाउस में ठहरने के साथ आम आदमी की तरह बारी-बारी से सुबह, शाम, दिन व रात को इन औद्योगिक इकाइयों में एक्सरसाइज करते रहे। इस दौरान यह जानकारी भी जुटाते रहे कि तीन शिफ्टों में बिजली चालू रहने और उपभोग होने के बाद भी 15-15 घंटे तक मीटर बंद है। साथ ही मीटर से किसी प्रकार की छेड़छाड़ भी नजर नहीं आई। दल सदस्य चार दिन तक घूमते रहकर टोह लेते रहे तथा सूचनाओं का आदान-प्रदान जयपुर स्थित सतर्कता दल कार्यालय को करते रहे।

दल के पास उपकरणों से बंद मीटरों की आमआदमी के रूप में चोरी-छिपे जांच की तो पता चला कि बिना छेड़छाड़ के बिजली चोरी की जा रही है। इस कार्रवाई का सारा कंट्रोल वहीं से संचालित किया जाता रहा और दबिश व कार्रवाई का समय तय कर सोमवार रात को अंजाम तक पहुंचाया।

Lubhavan Desk
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