इस जिले में किसानों की हालत खराब, 650 करोड़ के कर्ज तले कर रहे आत्महत्या

अलवर जिले के किसानों पर 650 करोड़ का कर्ज है। इस वजह से कई किसान आत्महत्या करने पर मजबूर हो रहे है।

By: Dharmendra Adlakha

Published: 11 Dec 2017, 05:29 PM IST

अलवर. बीते चार साल में अन्नदाता से प्रकृति के साथ राज भी रुठा है। अलवर जिले के किसान 650 करोड़ के कर्ज के बोझ से दबते जा रहे हैं। जिले के किसान परम्पारगत खेती से आगे नहीं निकल पा रहे हैं। बीते कई वर्षों से प्याज के भाव कम रहे जिससे किसानों की कमर टूट गई। ऐसे में किसानों को खेती से मोह भंग होता जा रहा है। जीएसटी ने बीज सहित सभी कृषि उपकरण महंगे हो गए हैं।

जिले में बैंक कर्जे से परेशान एक किसान ने तो आत्महत्या ही कर ली। जिले में खेती आजीविका का मुख्य साधन है। पिछले चार वर्ष में राज्य सरकार की नीतियों के कारण किसानों के लिए परम्परागत खेती से बाहर निकलने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए हैं। अलवर जिले की मुख्य फसल सरसों और गेहूं हैं जिसका रकबा निरन्तर कम होता जा रहा है।


जिले में दो वर्ष पहले सरसों व गेहूं का रकबा घटता जा रहा है। दो वर्ष पूर्व इनका रकबा 2 लाख 60 हजार हैक्टेयर था जो इस वर्ष घटकर 2 लाख 25 हजार हैक्टेयर रह गया है। बीते चार साल में सरसों व गेहूं के भाव कई बार नीचे आए, लेकिन इस अवधि में इनकी समर्थन मूल्य पर खरीदारी से किसानों को कोई लाभ नहीं हुआ। इन वर्षों में मात्र 35 हजार किसानों ने ही समर्थन मूल्य पर अपना गेहूं बेचा जबकि अन्य फसलों की खरीद का किसान लाभ नहीं उठा सके। समर्थन मूल्य के प्रति किसानों का रुझान नहीं था।

इस समर्थन मूल्य की खरीद में औपचारिकताओं की अधिकता के कारण व भाव ऊंचे नहीं होने से यह समस्या आई। जीएसटी के कारण बीज सहित सभी कृषि उपकरण महंगे हो गए हैं जिनकी सरकार को कतई परवाह नहीं है। अलवर जिले में जलस्तर निरंतर नीचे गिर रहा है।

देश में प्याज का नाम, मंडी तक नहीं बनाई
अलवर जिले को देश में प्याज की पैदावार के लिए जाना जाता है, इसके बावजूद यहां वर्षों से प्याज मंडी को प्लेटफार्म तो तैयार कर दिया, लेकिन इसका आवंटन तक नहीं किया गया। वर्षों से यह प्याज मंडी अधूरी है जिसके कारण प्रति वर्ष प्याज की आवक के समय किसान ही नहीं व्यापारी भी परेशान होते हैं। यहां बना किसान भवन वर्षों में बंद पड़ा है। यदि यह प्रारम्भ हो जाता है तो किसानों को रहने व भोजन की सुविधा मिल सकेगी।

बरसात और घटते भावों ने किया निराश


बीते चार वर्षों में ग्वार के भाव उभर नहीं पा रहे हैं। सरसों के भाव भी औसत पर हैं जिसके कारण किसानों को इनकी फसल में अधिक मुनाफा नहीं हो रहा है। ग्वार के भाव 2 वर्षों में 4 हजार रुपए प्रति क्विंटल से अधिक नहीं बढ़ रहे हैं जिसके कारण अलवर में ग्वार गम की फैक्ट्रियां तक बंद पड़ी है। बीते वर्ष सर्दी के दिनों में हुई ओलावृष्टि से गेहूं की फसल खराब हो गई। इस साल मानसून सत्र में बरसात का औसत 300 मिमी को भी नहीं छू पाया है जिसके कारण रबी व खरीफ की फसल दोनों पर ही प्रभाव पड़ा है।


अलवर जिले में किसान आत्महत्या को मजबूर


अलवर जिले के खेरली रेल में बीते वर्ष एक किसान ने कर्ज अधिक होने के कारण आत्महत्या कर ली थी। किसान मदन सिंह राजपूत ने बीते वर्ष आत्महत्या कर ली। इस किसान को कई बार बैंक के नोटिस मिले जिसके कारण वह निराश हो गया और उसने आत्महत्या कर ली। इसके बाद भी सरकार नहीं जागी और किसानों के लिए कोई विशेष पैकेज की घोषणा नहीं की।

अलवर एक दृष्टि में


कुल भौगोलिक क्षेत्रफल- 8380 वर्ग किमी.।
राजस्थान का भौगोलिक क्षेत्रफल- 2.45 प्रतिशत।
कुल भूमि- 783281 हैक्टेयर।
वन क्षेत्र- 84899
कृषि योग्य भूमि- 126794 हैक्टेयर।
सिंचित क्षेत्रफल- 458682


जिले में मुख्य फसलें
सरसों, गेहू, जौ, चना, ग्वार, कपास, बाजरा, प्याज, मक्का।
जोत का आकार हैक्टेयर-1.28


अब तक जारी हुए मृदा कार्ड

5 लाख 95 हजार 609 कार्ड।


जिले में किसानों की संख्या- 6 लाख 710
किसानों पर विभिन्न बैंकों व अन्य संस्थाओं का कर्जा- 650 करोड़।

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