नवयुवाओं के लिए कॉलेज की दहलीज में प्रवेश करना हुआ मुश्किल, जाने क्या है कारण

Prem Pathak

Publish: Jun, 14 2018 11:55:11 AM (IST)

Alwar, Rajasthan, India
नवयुवाओं के लिए कॉलेज की दहलीज में प्रवेश करना हुआ मुश्किल, जाने क्या है कारण

बोर्ड परीक्षा में अंक बढ़े, कॉलेजों में प्रवेश कट ऑफ रहेगी ऊंची

अलवर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान अजमेर और केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की सैकंडरी व सीनियर सैकंडरी परीक्षा का परिणाम प्रतिशत प्राप्तांक बढ़ता जा रहा है। इसके साथ ही जिले के कॉलेजों में प्रवेश का प्रतिशत भी अब कम होने की बजाय प्रति वर्ष बढ़ रहा है।
कुछ वर्ष पूर्व ही अलवर जिले में बोर्ड परीक्षाओं का प्राप्तांक इतना अधिक नहीं होता था। पांच वर्ष पूर्व तक बोर्ड परीक्षाओं में 90 प्रतिशत सर्वाधिक अंक होते थे। अब विज्ञान वर्ग में 97 से 98 प्रतिशत तक अंक आने लगे हैं। इसी प्रकार कॉमर्स और कला संकाय में प्राप्तांक प्रतिशत बढ़ता जा रहा है। इसमें कला संकाय में बोर्ड परीक्षाओं में प्रतिशत का दायरा 60 से बढ़कर 85 से 90 प्रतिशत तक आने लगा है। इसी प्रकार कॉलेजों में भी प्रवेश के समय प्रतिशत का दायरा इतना बढ़ा है कि जो चौकाने वाला है। बीते वर्ष आट्र्स में प्रवेश में पहली कट ऑफ 87, बीकॉम में 72, बीएससी बॉयो में 90 तथा बीएससी मैथ में 95 परसेंटाइल तक पहुंच रही है।

डीयू की तरह अलवर के कॉलेजों में भी बढ़ा प्रवेश प्रतिशत

अलवर जिले के महाविद्यालयों में स्नातक प्रथम वर्ष के प्रवेश प्रक्रियाशुरू हो चुकी है। अलवर जिले के राजकीय महाविद्यालयों में अब डीयू की तरह ही बेहद अधिक कट ऑफ रहने लगी है। इस बार 12वीं कक्षा के अच्छे प्राप्तांक प्रतिशत को देखते हुए महाविद्यालयों की प्रथम वरीयता सूची के 95 परसेंटाइल रहने के आसार हैं।

इन विषयों में अधिक रहती है कट ऑफ

जिला मुख्यालय के सरकारी महाविद्यालयों में सबसे अधिक बी.एससी मैथ की कट ऑफ जाती है। इसके बाद कैमस्ट्री का नम्बर आता है, जिसकी कट ऑफ पिछले कुछ सालों से 92 प्रतिशत के आसपास रही है। पिछले साल गौरी देवी महाविद्यालय में बी.ए. प्रथम वर्ष की कट ऑफ 95 परसेंटाइल से अधिक रही थी। कॉमर्स की पहली कट ऑफ महज 60.67 परसेंटाइल ही रही थी।

एससी-एसटी में भी बढ़ रही प्रतिस्पर्धा

पिछले कुछ वर्षों में सामान्य वर्ग ही नहीं, एससी-एसटी की कट ऑफ भी काफी अधिक जाने लगी है। कुछ वर्ष पहले तक इस वर्ग की कट ऑफ औसतन 70 के आसपास रहती थी। गत वर्ष राजर्षि महाविद्यालय में गणित की कट ऑफ औसतन 88 प्रतिशत रही थी।

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