Alwar Bandh : कैसा रहा अलवर में बंद का असर, 300 करोड़ का व्यापार हुआ प्रभावित, यहां जानिए दिनभर का माहौल

Alwar Bandh : कैसा रहा अलवर में बंद का असर, 300 करोड़ का व्यापार हुआ प्रभावित, यहां जानिए दिनभर का माहौल

Hiren Joshi | Publish: Sep, 06 2018 10:41:38 PM (IST) Alwar, Rajasthan, India

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अलवर. एससी/एसटी संशोधन विधेयक को लेकर भारत बंद के आह्वान पर सवर्ण समाज ने गुरुवार को अलवर जिला शांतिपूर्ण बंद रखा। जिससे करीब 250 से 300 करोड़ रुपए का कारोबार प्रभावित हुआ। आपात सुविधाओं को छोडकऱ जिला मुख्यालय सहित कस्बे, गांव व ढाणियों में शिक्षण संस्थाएं और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे। कुछ इलाकों में जरूर छुटपुट घटनाएं सामने आई, लेकिन पुलिस प्रशासन ने स्थिति को पूरी तरह से नियंत्रण में रखा और कानून व्यवस्था नहीं बिगडऩे दी। दोपहर बाद जिला मुख्यालय पर जिला कलक्टर तथा उपखण्ड व तहसील स्तर पर उपखण्ड अधिकारी व तहसीलदार को ज्ञापन सौंपे गए। शाम को बाजार में कुछ प्रतिष्ठान खुले नजर आए।सर्व समाज संघर्ष समिति अलवर ने एससी/एसटी संशोधन विधेयक को लेकर गुरुवार को अलवर बंद रखने का ऐलान किया। जिसके समर्थन में विभिन्न सामाजिक एवं व्यापारिक संगठन भी उतर आए। गुरुवार को व्यापारियों ने स्वत: ही अपने प्रतिष्ठान बंद रखे और अपने-अपने मुख्य बाजारों में इक_े हो गए। वहां से व्यापारी और सवर्ण समाज के लोग बाजार बंद कराने के लिए निकल पड़े। बंद समर्थक दुपहिया-चौपहिया वाहनों से दिनभर घूमते रहे। जहां भी उन्हें शिक्षक संस्थान, निजी ऑफिस और दुकानें खुली मिली, उन्हें बंद करा दिया। जिला मुख्यालय पर व्यापारी और बदं समर्थक सुबह करीब साढ़े 8 बजे भगतसिंह चौराहे पर एकत्रित हुए। वहां उन्होंने चौराहे के चारों तरफ रास्ता बंद करते हुए जाम लगा दिया। पुलिस अधिकारियों की समझाइश पर करीब आधे घंटे बाद जाम खोला। इसके बाद सभी होपसर्कस पहुंचे। वहां सर्व समाज संघर्ष समिति अलवर के पदाधिकारियों ने समर्थकों को सम्बोधित किया।

इसके बाद बंद समर्थक शहर में बाजार बंद कराने के लिए रवाना हो गए। बंद समर्थक दोपहर तक शहरभर में घूम-घूमकर बाजार बंद कराते रहे। सभी लोग दोपहर करीब एक बजे फिर से होपसर्कस पर एकत्रित हुए। वहां सवर्ण समाज के लोगों ने अपने एससी/एसटी संशोधन विधेयक को लेकर अपने विचार रखे। इसके बाद पैदल और दुपहिया वाहनों से कलक्ट्रेट पहुंचे। इसके बाद सवर्ण समाज के प्रतिनिधि मण्डल ने अपनी मांगों के सम्बन्ध में जिला कलक्टर प्रकाश राजपुरोहित को ज्ञापन दिया। इसके बाद फिर होपसर्कस पहुंचे। वहां भोजन करने के बाद वापस शहर में टोलियों के रूप में रवाना हो गए। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने शाम 3.55 बजे रैली समाप्ति की घोषणा कर दी। बंद समर्थक को थाने में बैठाने पर थाने के बाहर हंगामाबंद समर्थक कुछ युवा हनुमान चौराहे के समीप मार्बल मार्केट में खुली कुछ दुकानें बंद कराकर जीप में सवार होकर लौट रहे थे।

इसी दौरान एनईबी थाने से कुछ दूर स्थित 200 फीट रोड टी-प्वाइंट पर पुलिस उपाधीक्षक (शहर) डॉ. प्रियंका ने उनकी गाड़ी को रोका। शोर-शराबा करने पर पुलिस उपाधीक्षक एक युवक और उनकी जीप को थाने ले आई। इस घटना का पता लगते ही बंद समर्थक और व्यापारी एनईबी थाने के बाहर एकत्रित हो गए और हंगामा शुरू कर दिया। लोगों ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। बंद समर्थकों और पुलिस अधिकारियों की एनईबी थाने के अंदर बैठकर वार्ता हुई। इसके बाद युवक को छोड़ दिया गया तथा गाड़ी को चालान भरकर छोड़ा गया। गाड़ी बजरंग दल के जिला उपाध्यक्ष संजय पंडित की थी। मण्डी मोड़ पर भी तनाव की स्थिति बनीशहर के मंडी मोड़ स्थित शराब की दुकान खुली हुई थी। बंद समर्थक वहां पहुंचे और दुकान बंद करा दी। इस दौरान दुकान के बाहर रखे कोल्ड-ड्रिंक के कैरेट गिर गए, जिससे बोतलें फूट गई।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस उपाधीक्षक (दक्षिण) अशोक चौहान तत्काल मौके पर पहुंचे और लोगों को वहां से रवाना किया।कलक्ट्रेट में बिना नारेबाजी करते हुए घुसेसवर्ण समाज के लोग नारेबाजी करते हुए होपसर्कस से बजाजा बाजार, त्रिपोलिया, सुभाष चौक होते हुए कलक्ट्रेट पहुंचे। गेट पर तैनात पुलिस अधिकारियों ने उन्हें बेरिकेट लगाकर रोक दिया। इसके बाद संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने पुलिस अधिकारियों से कोर्ट परिसर में बिना नारेबाजी किए शांतिपूर्वक तरीके अंदर जाने की अपील की। पुलिस अधिकारियों की अनुमति के बाद सभी लोग कलक्ट्रेट परिसर में घुसे। जिला कलक्टर कार्यालय को जाने वाली सीढिय़ों से पहले पुलिस ने उन्हें रोका और 11 सदस्यों को प्रतिनिधि मण्डल के रूप में ज्ञापन के लिए जाने दिया। इस दौरान भी कुछ देर के लिए तनातनी की स्थिति बनी।

डीएसपी ने मेडिकल कराने को कहा तो उखड़ा समर्थककरीब 20-25 बंद समर्थकों की टोली दोपहर करीब 12 बजे बस स्टैण्ड पहुंची और रोडवेज बसों के संचालन को रोकने का प्रयास किया। इसकी सूचना मिलते ही डीएसपी डॉ. प्रियंका वहां पहुंची। उन्होंने लोगों को रोका तो पुलिस अधिकारी और बंद समर्थकों के बीच तनातनी हो गई। जब अधिकारी ने एक समर्थक पर शराब के नशे में होने का आरोप लगाते हुए मेडिकल कराने की बात कही तो वह समर्थक उखड़ गया और बोला कि आज का क्या आप मेरा कभी भी मेडिकल करा लो।

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