scriptalwar krishi in change | तिलहन गायब, कपास कम होने लगी और बाजरे का रकबा बढ़ा | Patrika News

तिलहन गायब, कपास कम होने लगी और बाजरे का रकबा बढ़ा

अलवर. जिले में किसानों का ध्यान बाजरे की फसल की ओर अधिक है। इस साल 2 लाख 85 हजार हैक्टेयर में बाजरा की बुवाई हुई है, जबकि कपास की बुवाई का आंकड़ा कम होता जा रहा है।पानी की कमी और जमीन में होने वाले परिवर्तनों के कारण बुवाई के आंकड़े भी बदलने लगे हैं। पिछले कुछ सालों में बाजरे की बुवाई अलवर जिले में बढ़ी है। इस साल बाजरा 2 लाख 85 हजार हैक्टेयर में बोया गया है

अलवर

Published: July 27, 2022 10:20:26 pm

अलवर जिले में किसानों का ध्यान बाजरे की फसल की ओर अधिक है। इस साल 2 लाख 85 हजार हैक्टेयर में बाजरा की बुवाई हुई है, जबकि कपास की बुवाई का आंकड़ा कम होता जा रहा है।पानी की कमी और जमीन में होने वाले परिवर्तनों के कारण बुवाई के आंकड़े भी बदलने लगे हैं। पिछले कुछ सालों में बाजरे की बुवाई अलवर जिले में बढ़ी है। इस साल बाजरा 2 लाख 85 हजार हैक्टेयर में बोया गया है। बाजरे की खेती में कम पानी की आवश्यकता होती है जिसके कारण यह फसल किसानों को भा रही है। दूसरी ओर बाजरे की फसल के साथ ज्वार 20 हजार हैक्टेयर में बोया गया है जो पशुओं के लिए चारे के रूप में काम आता है।
तिलहन गायब, कपास कम होने लगी और बाजरे का रकबा बढ़ा
तिलहन गायब, कपास कम होने लगी और बाजरे का रकबा बढ़ा
कपास की बुवाई होने लगी कमसहायक कृषि निदेशक के.एल. मीणा ने बताया कि इस साल कपास की बुवाई 18 हजार हैक्टेयर में हुई है जो पांच साल पहले तक 55 से 60 हजार हैक्टेयर में होती थी। इसकी बुवाई गर्मियों में होती है जिस समय जिले में वैसे ही पानी की कमी रहती है जिसके चलते किसानों का रुझान कपास के प्रति कम हो गया है। यही हाल ग्वार को हो गया है जिसकी बुवाई का रकबा मात्र 4 हजार हैक्टेयर तक रह गया है जो कभी 40 हजार हैक्टेयर था।
------------जिले से तिलहन की फसल खत्म

अलवर जिले में तिलहन की फसल पूरी तरह खत्म हो गई है। यहां सफेद तिल 25 हजार हैक्टेयर में होते थे जो अब पैदा होना ही बंद हो गए हैं। इसका कारण जल स्तर का नीचे जाना है। इसी प्रकार ग्वार दस साल पहले 60 हजार हैक्टेयर तक होती थी जो इस साल बहुत कम हुई है जो खत्म भी हो सकती है।

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