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भाजपा के अलवर से संघर्ष शुरू करने के क्या हैं मायने क्यूं टिकी है पूर्वी राजस्थान पर है सियासी दलों की नजर

भाजपा की ओर से प्रदेश की कांग्रेस सरकार के खिलाफ संघर्ष का बिगुल अलवर से बजाने के सियासी क्षेत्र में कई मायने हैं। भाजपा व कांग्रेस समेत अन्य दलों के प्रदेशाध्यक्ष, केन्द्रीय मंत्री व अन्य वरिष्ठ नेता अलवर का दौरा कर सियासी नब्ज टटोल चुके हैं।

अलवर

Published: May 04, 2022 11:14:36 pm

अलवर. भाजपा की ओर से प्रदेश की कांग्रेस सरकार के खिलाफ संघर्ष का बिगुल अलवर से बजाने के सियासी क्षेत्र में कई मायने हैं। भाजपा व कांग्रेस समेत अन्य दलों के प्रदेशाध्यक्ष, केन्द्रीय मंत्री व अन्य वरिष्ठ नेता अलवर का दौरा कर सियासी नब्ज टटोल चुके हैं।
अलवर जिला पूर्वी राजस्थान का सिंहद्वार माना जाता है। वहीं पूर्वी राजस्थान का प्रदेश की राजनीति में अहम रोल रहा है। पूर्व में यही पूर्वी राजस्थान कई सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर चुका है। इसलिए ज्यादातर राजनीतिक दलों की नजर इन दिनों पूर्वी राजस्थान पर टिकी है। भाजपा ने कांग्रेस की गहलोत सरकार के खिलाफ प्रदेशव्यापी संघर्ष की शुरुआत अलवर से करने का निर्णय किया है।
भाजपा के अलवर से संघर्ष शुरू करने के क्या हैं मायने क्यूं टिकी है पूर्वी राजस्थान पर है सियासी दलों की नजर
भाजपा के अलवर से संघर्ष शुरू करने के क्या हैं मायने क्यूं टिकी है पूर्वी राजस्थान पर है सियासी दलों की नजर
पिछले चुनाव में पूर्वी राजस्थान के परिणाम रहे महत्वपूर्ण

पिछले विधानसभा चुनाव में अलवर सहित पूर्वी राजस्थान के चुनाव परिणाम प्रदेश की सरकार के गठन में अहम रहे थे। पूर्वी राजस्थान के अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली, जयपुर, दौसा सहित अन्य जिलों में कांग्रेस को अच्छी सफलता मिली और यही प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनाने का आधार रही। गत विधानसभा चुनाव में अलवर जिले की 11 विधानसभा सीटों में कांग्रेस को 5 व भाजपा को दो सीट मिली थी। वहीं दो सीटों पर बसपा व दो पर निर्दलीय जीते थे। चुनाव बाद बसपा के दो विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए, वहीं दो निर्दलीयों का भी कांग्रेस को समर्थन मिला, यानि अलवर जिले से कांगेस को 9 विधायकों का साथ मिला। कांग्रेस को ऐसा समर्थन ही पूर्वी राजस्थान से मिला, जिससे वह प्रदेश में सरकार बना सकी।
पहले से ही अलवर पर भाजपा व कांग्रेस की नजर
पूर्वी राजस्थान के अलवर जिले में भाजपा व कांग्रेस की नजर पहले से लगी है। यही कारण है कि राज्य सरकार के खिलाफ जिला भाजपा ने गत 16 दिसम्बर को अलवर में जन आक्रोश रैली का आयोजन किया। इसमें पार्टी की राष्ट्रीय मंत्री अलका गुर्जर समेत ज्यादातर जिला स्तरीय नेता मौजूद रहे। वहीं भाजपा के केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव, राज्य सभा सांसद ओम माथुर, डॉ. किरोड़ीलाल मीणा, भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री व प्रदेश प्रभारी अरूण सिंह, प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, उप नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़, पूर्व मंत्री अरूण चतुर्वेदी अलवर का दौरा कर चुके हैं। इसमें भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष पूनिया करीब तीन बार अलवर जिले के दौरे पर आ चुके हैं। वहीं कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद डोटासरा भी पिछले दिनों अलवर में दो बार दौरा कर चुके हैं। वहीं पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय निरूपम भी डिजिटल सदस्यता अभियान में अलवर आ चुके हैं।
चार सांसदों का जिला है अलवर

अलवर जिले का चार सांसद लोकसभा में प्रतिनिधित्व करते हैं। इनमें अलवर सांसद महंत बालकनाथ योगी, भरतपुर सांसद रंजीता कोली, दौसा सांसद जसकौर मीणा एवं जयपुर ग्रामीण सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़ शामिल हैं। अलवर सांसद जिले के आठ विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, वहीं भरतपुर सांसद कठूमर, दौसा सांसद थानागाजी व जयपुर ग्रामीण सांसद बानसूर विधानसभा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। चार सांसदों के चलते भी अलवर जिले का राजनीतिक महत्व है।

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