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जरूरत पर सरकार को नहीं मिलती जमीन, भूमाफिया आसानी से ढूंढ निकालते हैं भूमि

सरकारी योजनाओं के लिए जिला प्रशासन को जरूरत होने पर कई सालों तक सिवायचक या अन्य सरकारी जमीन नहीं मिल पाती, लेकिन भूमाफिया जिले में मौके की सैंकड़ों बीघा जमीन तुरंत ही ढूंढ निकालते हैं। जमीन के अभाव में कई सरकारी प्रोजेक्ट उलटे कदम लौट गए या लटके पड़े हैं।

अलवर

Published: July 31, 2022 12:20:12 am

अलवर. सरकारी योजनाओं के लिए जिला प्रशासन को जरूरत होने पर कई सालों तक सिवायचक या अन्य सरकारी जमीन नहीं मिल पाती, लेकिन भूमाफिया जिले में मौके की सैंकड़ों बीघा जमीन तुरंत ही ढूंढ निकालते हैं। जमीन के अभाव में कई सरकारी प्रोजेक्ट उलटे कदम लौट गए या लटके पड़े हैं। इस समस्या का बड़ा कारण है प्रशासन की ओर से अब तक सिवायचक, बंजर या अन्य सरकारी जमीन का भूमि बैंक नहीं बनाना है।शहरी क्षेत्र में केन्द्रीय कारागार को दूसरी जगह शिफ्ट करने की बात हो या फिर किसी सरकारी प्राेजेक्ट के लिए भवन निर्माण की जरूरत हो, प्रशासन को आवश्यकता अनुसार सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं हो पाती। सरकारी योजना में भवन के लिए जमीन तलाशने में प्रशासन को कई साल लग जाते हैं। पटवारी से लेकर प्रशासन के उच्च अधिकारी भी सरकारी जमीन ढूंढने में फेल हो चुके हैं।
जरूरत पर सरकार को नहीं मिलती जमीन, भूमाफिया आसानी से ढूंढ निकालते हैं भूमि
जरूरत पर सरकार को नहीं मिलती जमीन, भूमाफिया आसानी से ढूंढ निकालते हैं भूमि
सालों तक नहीं मिली कॉलेज व विश्वविद्यालय को जमीन

अलवर जिले में राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय, कॉमर्स कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, केन्द्रीय कारागार सहित अनेक सरकारी प्रोजेक्ट के लिए प्रशासन को कई साल तक सरकारी जमीन नहीं मिल पाई। प्रशासन ने कॉमर्स कॉलेज के लिए अलवर शहर के आसपास कई दिनों तक जमीन की तलाश की, लेकिन नहीं मिल पाई। बाद में मुश्किल से कॉमर्स कॉलेज को जमीन मिल पाई। इसी तरह मत्स्य विश्वविद्यालय के लिए भी प्रशासन ने लंबे समय तक शहर के आसपास जमीन की खूब तलाश की, लेकिन नहीं मिल पाई। बाद में मालाखेड़ा के पास हल्दीना रोड पर जमीन मिल सकी। इसी तरह मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन तलाशने में भी प्रशासन को पसीने आए। बाद में जेल परिसर में जमीन मिल पाई। यह तो कुछ ही सरकारी प्रोजेक्ट हैं, जो लोगों की नजर में हैं। इसके अलावा अनेक योजनाओं के लिए भी सरकारी जमीन की जरूरत पड़ती रहती है।
इसलिए नहीं मिल पाती सरकारी जमीन

प्रशासन को सरकारी योजनाओं के लिए जमीन नहीं मिलने का बड़ा कारण ज्यादातर सरकारी जमीन पर अतिक्रमण होना है। प्रशासन के पास सरकारी भूमि का लेखा जोखा नहीं होने से जिले में भूमाफिया पनप गए। इन भूूमाफिया का काम मौेके की सरकारी जमीन तलाश उन पर कब्जा करना है। पिछले दिनों अलवर के आसपास सैंकड़ों बीघा चारागाह, यूआईटी की भूमि पर अवैध कब्जे उजागर हुए हैं।
दो दशक से चर्चा, भूमि बैंक अब तक नहीं

जिले में प्रशासन एवं यूआईटी की ओर से भूमि बैंक बनाने की चर्चा दो दशक से ज्यादा समय से हो रही है। लेकिन अब तक न तो प्रशासन भूमि बैंक बना पाया और न ही यूआईटी भूमि बैंक बना पाई। इसका नुकसान यह हुआ कि जिले में हजारों बीघा सरकारी भूमि भूमाफियाओं के हत्थे चढ़ गई।

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