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राजनीतिक वर्चस्व के संघर्ष में कैसे उलझी कांग्रेस व भाजपा

locationअलवरPublished: Nov 18, 2023 12:21:38 am

Submitted by:

Prem Pathak

अलवर जिले में हर चुनाव में राजनीतिक ट्रेंड बदलता रहा है, यहां कभी भाजपा आगे तो कभी कांग्रेस का दबदबा रहा। यही कारण है इस बार भी कांग्रेस व भाजपा राजनीतिक वर्चस्व के संघर्ष में उलझी हुई हैं। वहीं विधानसभा चुनाव में उनके सामने अपने गढ़ बचाने कीे चुनौती भी है।

राजनीतिक वर्चस्व के संघर्ष में कैसे उलझी कांग्रेस व भाजपा
राजनीतिक वर्चस्व के संघर्ष में कैसे उलझी कांग्रेस व भाजपा
विधानसभा चुनाव के मतदान में केवल सात दिन का समय बचा है और इस चुनाव में अलवर जिले में राजनीतिक वर्चस्व कायम करने के लिए कांग्रेस व भाजपा ने पूरा दमखम लगा रखा है। कारण है कि चार दशक के राजनीतिक इतिहास में ज्यादातर विधानसभा चुनाव परिणाम में किसी न किसी दल का दबदबा रहा है। यही कारण है कि अलवर जिले में जिस पार्टी का राजनीतिक दबदबा रहा है, प्रदेश में अक्सर सरकार भी उसी दल की बनी है। हालांकि 2003 के बाद अलवर जिले के राजनीतिक परिदृश्य में काफी बदलाव आया है, अब विधानसभा चुनाव के परिणाम भाजपा एवं कांग्रेस के इर्द गिर्द घूमने लगे हैं, जबकि इससे पूर्व के चुनाव में लोकदल, राष्ट्रीय जनता दल, जनता दल, बसपा आदि दल भी अपनी उपिस्थति जताते रहे हैं।
अलवर जिले में इस बार विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला कांग्रेस व भाजपा के बीच है। दोनों ही दल अलवर में राजनीतिक वर्चस्व कायम कर प्रदेश में सरकार बनाने के प्रयास में जुटे हैं। यही कारण है कि अलवर जिले की 11 सीटों पर कांग्रेस व भाजपा आमने सामने हैं और कुछ सीटाें पर इन दलों के बागी अन्य दलाें का दामन थाम व निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर मुकाबले को दिलचस्प बनाने में जुटे हैं।
दो दशक में दो बार भाजपा व दो कांग्रेस का दबदबा

पिछले दो दशक में हुए विधानसभा चुनाव में अलवर जिले के परिणाम अजीबो गरीब रहे हैं, इस दौरान हुए चार विधानसभा चुनाव में दो बार भाजपा व दो बार कांग्रेस का अलवर जिले में दबदबा रहा। इसमें विधानसभा चुननाव 2003 में कांग्रेस के हाथ 7, भाजपा को 3 एवं निर्दलीय को एक सीट मिली। यानी इस चुनाव में अलवर जिले में दबदबा रहा। वहीं 2008 के विधानसभा चुनाव में 7 सीटें भाजपा, 3 सीटें कांग्रेस व एक सीट समाजवादी पार्टी को मिली। इस चुनाव में भाजपा ने वर्चस्व कायम किया। विधानसभा चुनाव 2013 में अलवर जिले में 9 सीटें भाजपा, एक सीट कांग्रेस एवं एक सीट राजपा को मिली, यानी 11 में से 9 सीटें जीतकर भाजपा ने अलवर जिले में अपना दबदबा कायम किया। वहीं 2018 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 5, भाजपा ने 2, बसपा ने 2 एवं निर्दलीयों ने 2 सीटें जीती। बाद में बसपा के दो विधायकों ने कांग्रेस का दामन थाम लिया, यानी जिले में कांग्रेस के 7 विधायक हो गए और दो निर्दलीयों ने भी कांग्रेस को ही समर्थन दिया। यानी 9 विधायकों के समर्थन से कांग्रेस ने अलवर जिले में दबदबा कायम किया।
डेढ़ दशक पहले थे कई दल, अब लुप्त हो गए

वर्ष 1985 से 98 के दौरान अलवर जिले में कांग्रेस, भाजपा, बसपा के अलावा जनता दल, लोकदल, राष्ट्रीय जनता दल का बोलबाला रहा। हालांकि ये दल अब जिले के राजनीतिक परिदृश्य से पूरी तरह लुप्त हो चुके हैं। वर्ष 1985 में कांग्रेस को 5, भाजपा को एक एवं लोकदल को 3 सीटें मिली, वहीं 1990 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 5, भाजपा को दो एवं जनता दल को 4 सीटें मिली। वहीं 1993 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा को 4, कांग्रेस को 3, जनता दल को एक सीट मिली तथा तीन सीटों पर निर्दलीय जीते, 1998 में कांग्रेस को 7, भाजपा को 2, राष्ट्रीय जनता दल को एक व बसपा को एक सीट मिली।

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