जानकी के हुए जगन्नाथ, भक्त बने विवाह के साक्षी

रूपबास में हुआ वरमाला महोत्सव , कन्यादान को उमड़े श्रद्धालु

By: Prem Pathak

Published: 24 Jul 2018, 10:56 AM IST

अलवर. कोई हाथों में माला लिए हुए था तो कोई रंग बिरंगी फूलों का गुलदस्ता भगवान को चढ़ाना चाहता था, हाथों में श्रृंगार सामग्री व वस्त्र आदि लिए हुए बड़ी संख्या में महिलाएं कन्यादान करने को आतुर थी। ये सभी उस अदभुत पल का इंतजार कर रही थे, जब भगवान जगन्नाथ जानकी मैया के होने वाले थे। दूल्हा व दुल्हन की मनमोहक छवि को आंखों में बसाने का सपना लिए हर कोई इंतजार करता हुआ दिखाई दिया।
यह मौका था देवशयनी एकादशी पर होने वाले भगवान जगन्नाथ व जानकी मैया के विवाह का। दूल्हे के रूप में सजे धजे भगवान जगन्नाथ व दुल्हन बनी जानकी के विवाह का साक्षी बनने के लिए मंदिर में शाम से ही भक्तों का पहुंचना शुरु हो गया था। सोमवार की रात दस बजे रूपबास स्थित रूपबिहारी मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ भगवान की वरमाला का कार्यक्रम हुआ। जैसे ही भगवान ने वरमाला डाली श्रद्धालुओं ने जय जगन्नाथ व जानकी मैया के जयकारे लगाए। ग्रामीण महिलाएं गीत गाते हुए मंदिर तक पहुंची। मंदिर के नीचे नोहरे में बैठी जानकी मैया को बैंडबाजे के साथ उस स्थान पर लाया गया जहां विवाह संस्कार संपन्न होना था। विवाहस्थल पर ले जाने से पूर्व पुलिस की ओर से महिलाओं को गार्ड ऑफ ऑनर का सम्मान दिया गया।

कलश यात्रा रही मुख्य आकर्षण:

सुबह 8 बजे पुराना कटला स्थित जगन्नाथ मंदिर से जानकी मैया की सवारी बैंडबाजे के साथ रवाना हुई। इस सवारी का मुख्य आकर्षण महिलाओं की कलशयात्रा थी। शहर के विभिन्न मार्गो से होती हुई यह रथयात्रा रूपबास पहुंची । यहां पर रूपबास गांव की महिलाओं ने जानकी मैया की खातिरदारी की। रथयात्रा में शामिल कलश यात्रा करीब एक किलोमीटर लंबी थी। जो सभी के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई थी। जानकी मैया को विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं मंदिर में पहुंची। जब उनको विवाह के लिए विदा किया जा रहा था तो विदाई गीत गाते हुए अनेक श्रद्धालु महिलाएं भावुक हो उठे, उन्हें बेटी की विदाई के पल याद आए। माता जानकी को रथ में विराजमान करने के बाद महिलाएं उनके रथ के पीछे पीछे चल रही थी । रथयात्रा के दौरान छोटे बच्चों को किसी भी प्रकार की बुरी नजर से बचाने के लिए रथ के नीचे से भी निकाला गया।

बैंडवादन से हुई आरती:

भगवान के विवाह के मौके पर मनोज राजस्थानी एंड पार्टी की ओर से मनोरंजन से भरपूर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयेाजित किए गए। इसके बाद शाम को बैंडवादन से आरती करने की परंपरा को भी निभाया गया। इसके चलते प्रेमबैंड की ओर से आरती की गई। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु रूपबिहारी जी मंदिर में सजी भगवान की प्रतिमाओं का भी दर्शन कर रहे हैं।

मेले में जमकर की खरीददारी :

रूपबास में आयेाजित मेले में लगे झूले सबका मनोरंजन कर रहे हैं। इसके साथ ही यहां पर हाथ पर टैंटू लगवाने व गोदने लगाने का युवाओं में बड़ा उत्साह दिखाई दिया। इसके साथ ही मौत का कुआं व लड़कियों का डांस भी लोगों को अपनी ओर खींच रहा है। मेले में सबसे ज्यादा बिक्री मीठे व नमकीन खजलों की हो रही है। मेले में आए दुकानदारों ने बताया कि इस बार बारिश से उनकी दुकानदारी प्रभावित हो रही है। दुकानों के आगे कीचड़ होने से श्रद्धालु यहां तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। इससे नुकसान हो रहा है।

शहर में लग रही है प्याऊ व भंडारे हुए आयोजित:

जगन्नाथ व जानकी मैया के विवाह उत्सव के चलते सारे शहर में भक्ति व आस्था का माहौल बना हुआ है। शहर में कंपनी बाग, नंगली चौराहा, बिजलीघर चौराहा, बस स्टैंड सहित अन्य जगहों पर विभिन्न संगठनों व संस्थाओं की ओर से प्याऊ लगाई गई है और भंडारे आयोजित किए जा रहे हैं। इसमें चलने वाले भक्ति गीत राह चलते लोगों को अपनी ओर खिंच लेते हैं। यहां श्रद्धालु सुबह से लेकर शाम तक सेवा कर रहे हैं।

स्काउट व गाइड दे रहे सेवा:

जगन्नाथ मेले की व्यवस्थाओं को संभालने के लिए पुलिस, होमगार्ड के जवानों के अलावा स्काउट व गाइड भी सहयोग कर रहे हैं। मेला स्थल पर श्रद्धालुओं को दर्शन कराने से लेकर उनको सुरक्षा देने तक ये महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सीओ स्काउट प्रमोद शर्मा ने बताया कि प्रतिवर्ष लगने वाले इस मेले में सेवा देने के लिए स्काउट सदैव तत्पर रहते हैं।

Prem Pathak Reporting
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