कोटा पर सियासत गरमाई, अलवर में रोज चार बच्चे मरने पर ध्यान ही नहीं

कोटा में पिछले करीब 1 माह में सौ से अधिक बच्चों की मौत पर चौतरफा बवाल मचा है लेकिन, असल में शिशु मृत्यु दर के आंकड़े अलवर में भी चौकाने वाले हैं। अकेले अलवर जिले के सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद रोजाना करीब 4 बच्चों की मृत्यु हो जाती है।

By: Prem Pathak

Published: 03 Jan 2020, 10:57 PM IST

अलवर.

कोटा में पिछले करीब 1 माह में सौ से अधिक बच्चों की मौत पर चौतरफा बवाल मचा है लेकिन, असल में शिशु मृत्यु दर के आंकड़े अलवर में भी चौकाने वाले हैं। अकेले अलवर जिले के सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद रोजाना करीब 4 बच्चों की मृत्यु हो जाती है। जिसे चिकित्सा की भाषा में शिशु मृत्यु दर कहते हैं, जिसमें सुधार के लिए सरकार हर साल करोड़ों रुपए खर्च करती है। फिर भी शिशु मृत्यु दर के आंकड़े चौकाने वाले हैं।
ये तीन साल के आंकड़े चौकाएंगे

साल कुल प्रसव शिशु मृत्यु
2017-18 72935 1099

2018-19 71705 1492
2019 नवम्बर तक 41555 775

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जरा गौर करें

पिछले तीन सालों में सबसे अधिक 2018-19 में सबसे अधिक शिुश मृत्यु रही है। इस साल में जिले के सरकारी अस्पतालों में 71 हजार 705 प्रसव हुए। जिसमें से 1 हजार 492 शिशुओं की मृत्यु हो गई। जो यह बताता है कि एक दिन में चार से अधिक शिशुओं की मृत्यु हुई है। इसी तरह 2017-18 में पूरे एक साल में 1099 शिशुओं की मृत्यु हुई। जो 2018-19 से कुछ कम है। जबकि प्रसव भी 72 हजार 935 हुए हैं। नवम्बर 2019 तक 41 हजा प्रसव पर 775 शिशुओं की मौत हो चुकी है।


विभाग मानता है प्राकृतिक मौत

चिकित्सा विभाग इस शिशु मृत्यु दर को प्राकृतिक मौत मानता है। चिकित्सा विभाग के जानकारों का कहना है कि अमरीका में अस्पतालों में सुविधाएं बहुत अच्छी हैं। वहां भी एक हजार पर करीब 8 से 10 शिशुओ की मौत हो जाती है। लेकिन, पूरे राजस्थान में 1 हजार पर 46 शिशुओं की मौत होती है। अलवर जिले में भी शिशु मृत्यु दर का यही औसत है। जिससे यह कहा जा सकता है कि अलवर जिले में शिशु मृत्यु दर पिछड़े जिलों की तुलना में अधिक है।
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मां की देखभाल कम


असल में गर्भधारण करने के बाद से ही मां की अधिक देखभाल करने की जरूरत होती है। समय-समय पर चिकित्सा जांच भी जरूरी होती है। इसके अलावा खान-पान भी और बेहतर करने की जरूरत होती है। इस पर कम ध्यान दिया जाता है। जिसके कारण बच्चे भी कमजोर होते हैं। यह शिशु मृत्य दर का बड़ा कारण है।

डॉ. ओपी मीणा, सीएमएचओ, अलवर

Prem Pathak Reporting
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