अलवर: लॉक डाउन 3 में मिली कुछ छूट तो मां से मिली बेटी, छलके दोनों के आंसू

सोमवार को शहर में रहने वाली बहुत से बेटियों ने अपने मां बाप के घर पहुंचकर उनका हालचाल जाना
जाना तो मां की आंखों से आंसू छलक आए उन्हें लगा कि उनकी खोई हुई बेटियां उन्हें फिर से वापस मिल रही है।

By: Lubhavan

Updated: 05 May 2020, 01:22 PM IST

अलवर. मां और बेटी का रिश्ता बड़ा अनमोल होता है इस रिश्ते में भावनाओं की गहराई होती है। बेटियां शादी के बाद पराई हो जाती है लेकिन उनका मां से रिश्ता हमेशा बना रहता है यही वजह है कि बेटियां जब तक अपनी मां को देखना ले उससे बातें ना कर ले उनको लगता है कि कुछ छूट गया है।

स्थानीय स्तर पर रहने वाली है बेटियां अक्सर सप्ताह में अपनी मां से मिलने अवश्य ही आती है ताकि मां का सुख-दुख जान सके लेकिन कोरोनावायरस के लोक डाउन काल में बेटियां इस बार मां से नहीं मिल पाई। सोमवार को शहर में रहने वाली बहुत से बेटियों ने अपने मां बाप के घर पहुंचकर उनका हालचाल जाना
जाना तो मां की आंखों से आंसू छलक आए उन्हें लगा कि उनकी खोई हुई बेटियां उन्हें फिर से वापस मिल रही है।

रामनगर निवासी 50 वर्षीय ललिता गुप्ता पिछले एक माह से लोग डाउन के कारण ही घर में ही है घर में पोते पोतिया बेटे बहू और पति की जिम्मेदारी इतनी है कि वह फोन पर भी बात नहीं कर पा रही थी !शहर में होने के बाद भी वह चाह कर भी अपनी मां से नहीं मिल पाई।

सभी को घर में रहने की हिदायत भी दे रही

वह पिछले एक माह से प्रशासन के निर्देशों का पालन भी कर रही थी, लेकिन सोमवार को जैसे ही लोक डाउन में छूट दी गई वैसे ही बेटी के मन में मां से मिलने की इच्छा होने लगी, इसलिए वह दुर्गा कालोनी स्थित अपनी मां मुन्नी देवी से मिलने चली आई। ललिता ने बताया कि उनके भी बेटियां हैं और वह बेटियां भी अलवर आकर उनसे मिलना चाहती हैं लेकिन शहर से दूर होने पर वह मिल नहीं पाती है । उन्होंने अपनी बहू को भी अपनी मां से मिलने की बात कही ताकि वह भी अपनी मां से मिलकर उसका सुख-दुख जान सके। बेटी से मिलकर उनको बहुत खुशी हो रही है फोन पर ज्यादा बातें नहीं हो पाती हैं साथ में होने पर क्या समय निकलता है सुख दुख की बातें भी होती है।

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Lubhavan Desk
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