अलवर में सालों से जांच की सुविधा कमरे में बंद, जाने आखिर क्यों सुविधा देने से कतरा रहे है चिकित्सक

पांच साल से कमरे में कैद लाखों की टीएमटी जांच मशीन

By: Prem Pathak

Published: 07 Jun 2018, 10:34 AM IST

अलवर के राजीव गांधी सामान्य अस्पताल के कमरा नम्बर 19 में लाखों रुपए लागत की टीएमटी जांच मशीन बंद है। जबकि मरीजों को मजबूरी में महंगे दामों में यह जांच निजी लैब में करानी पड रही है। निजी लैबों में मरीज को जांच के लिए 1500 से 2000 रुपए तक खर्च करने पड़ रहे हैं। हृदय रोग के मरीजों को टीएमटी जांच कराना जरूरी होता है। सामान्य अस्पताल में पांच साल से यह मशीन एक कमरे में बंद है। सालभर में 10 से 12 मरीजों की यह जांच की जाती है। उस समय कमरा खोला जाता है, वैसे ज्यादातर यह कमरा बंद रहता है। अस्पताल में मरीजों को इस जांच की जानकारी तक नहीं है। जबकि अस्पताल में प्रतिदिन दो से तीन हार्ट सम्बन्धी बीमारियों के मरीज आते हैं। सरकारी अस्पताल में यह जांच केवल 300 रुपए में करने का प्रावधान है।

 

क्या है टीएमटी जांच

टीएमटी जांच में हृदय के संचालन में किसी गड़बड़ी के शुरुआती संकेत मिलते हैं और यह हृदय की देखभाल का प्रारंभिक टेस्ट होता है। जिसके बाद अन्य टेस्ट कराए जा सकते हैं। स्ट्रेस टीएमटी से शरीर को पहले थकाया जाता है और फिर ईसीजी लेकर देखा जाता है कि तनाव से हृदय की गतिविधि में कोई बदलाव तो नहीं आया है।

ठीक है मशीन
डॉक्टर के लिखने पर जांच होती है। मशीन बिलकुल ठीक है व चालू हालत में है। अगर कोई मरीज आता है तो, उसकी यह जांच की जाएगी।
डॉ. भगवान सहाय, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी, अलवर

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ग्रामीण डाक कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त
अलवर. अखिल भारतीय ग्रामीण डाक कर्मचारी यूनियन के आह्वान पर ग्रामीण डाक कर्मचारियों की ओर से की जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल बुधवार को समाप्त हो गई है। यूनियन के सचिव सुरेन्द्र शर्मा ने बताया कि यूनियन की सभी मांगों पर सहमति बनने पर हड़ताल समाप्त कर दी गई है।इधर पिछले कई दिनों से अटकी ग्रामीण डाक सेवा का लाभ आमजन को मिलना शुरू हो जाएगा।

Prem Pathak Reporting
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