उबर नहीं पाया अलवर का पर्यटन उद्योग

अलवर जिले का पर्यटन उद्योग कोरोना से पूरी तरह प्रभावित हो गया है जो उबर ही नहीं पा रहा है। अब ऐसे हालात हो गए हैं कि जिले के नामी होटलों में रुकने के लिए पर्यटक नहीं आ रहे हैं। मार्च माह से खराब हुए यह हालात सुधरने का नाम नहीं ले रह हैं। अब दिल्ली में कोरोना का संक्रमण तेज गति से बढऩे के कारण इसका प्रभाव अलवर के पर्यटन उद्योग पर विपरीत पड़ रहा है।

By: Dharmendra Adlakha

Published: 21 Nov 2020, 09:48 AM IST

अलवर जिले का पर्यटन उद्योग कोरोना से पूरी तरह प्रभावित हो गया है जो उबर ही नहीं पा रहा है। अब ऐसे हालात हो गए हैं कि जिले के नामी होटलों में रुकने के लिए पर्यटक नहीं आ रहे हैं। मार्च माह से खराब हुए यह हालात सुधरने का नाम नहीं ले रह हैं। अब दिल्ली में कोरोना का संक्रमण तेज गति से बढऩे के कारण इसका प्रभाव अलवर के पर्यटन उद्योग पर विपरीत पड़ रहा है।

अलवर जिले के धार्मिक पर्यटन ने भी हालात बिगाड़ दिए हैं।यहां प्रतिवर्ष चार लाख पर्यटक आते हैं। इस बार कोरोना के लोक डाउन के कारण पर्यटकों की संख्या आधी रह गई है। वर्ष 2020 में जनवरी से अक्टूबर माह तक 159367 पर्यटक अलवर भ्रमण के लिए आए । वर्ष 2019 में पर्यटकों की संख्या 3 लाख 66 हजार 289 थी जो अब घटकर 1 लाख 59 हजार 367 रह गई है।

लॉक डाउन खुलने के बाद जून से अक्टूबर तक 41 हजार 355 देशी पर्यटक और 350 विदेशी पर्यटक अलवर आए हैं।होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ अलवर के महासचिव धीरज कटारिया ने बताया कि कि यहां वीक एंड पर आने का चलन है लेकिन वो भी बिल्कुल कम हो गया है। अलवर में धार्मिक पर्यटक स्थल भी बहुत ज्यादा है।संरक्षक पवन खंडेलवाल बताते हैं कि इनसे पर्यटन व्यवसाय से जुड़े होटल रेस्टोरेंट टूर एंड ट्रैवल एजेंट गाइड और स्थानीय दुकानदारों को करीब 5 करोड़ की आय होती है जो इस साल एक करोड़ से भी कम रह गई है। ज्यादातर होटल लोग डाउन खुलने के बाद भी खाली ही पड़े हुए हैं। लोग अभी कोरोना वायरस के चलते यात्रा करना पसंद नहीं कर रहे हैं इससे पर्यटन उद्योग खत्म होने लगा है।अलवर के धार्मिक पर्यटन पर विप

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