जानिए सरिस्का के बाघों को कैसे बचाता है मुखबिरों का कवच

अलवर. वनकर्मियों का टोटा झेल रहे सरिस्का बाघ परियोजना में बाघों की सलामती मुखबिरों के भरोसे हैं। बाघिन एसटी-5 के शिकारियों को पकडऩे में मुखबिर बड़ी भूमिका भी निभा चुके हैं। महत्वपूर्ण सूचना पर सरिस्का प्रशासन की ओर से मुखबिरों को इनाम से नवाजा जाता है।

Prem Pathak

January, 1411:16 PM

अलवर. वनकर्मियों का टोटा झेल रहे सरिस्का बाघ परियोजना में बाघों की सलामती मुखबिरों के भरोसे हैं। बाघिन एसटी-5 के शिकारियों को पकडऩे में मुखबिर बड़ी भूमिका भी निभा चुके हैं। महत्वपूर्ण सूचना पर सरिस्का प्रशासन की ओर से मुखबिरों को इनाम से नवाजा जाता है।

सरिस्का में बाधों की सुरक्षा में 152 वनकर्मी, 100 होमगार्ड एवं 30 नागरिक सुरक्षा के कर्मचारी लगे हैं, लेकिन बाघों की सलामती एवं जंगल की सुरक्षा मुखबिरों पर टिकी है। ये मुखबिर कोई और नहीं, बल्कि सरिस्का व आसपास के गांवों के लोग हैं, जो समय-समय पर सरिस्का प्रशासन को सूचना मुहैया कराते रहे हैं। मुखबिरों की इन सूचनाओं के आधार पर सरिस्का में कई अनसुलझे मामले भी खुलने में मदद मिली है। इनमें सबसे बड़ा अनसुलझा मामला बाघिन एसटी-5 का रहा। यह बाघिन सरिस्का के रिकॉर्ड में लगभग एक साल तक गायब दिखाई गई। बाघिन को ढूंढने के लिए कई लाखों रुपए खर्च करके कैमरे लगाए गए। कई महीनों तक सरिस्का का पूरा स्टाफ अन्य कामकाज को छोड़ बाघिन की खोज में पहाड़ी की चोटी से लेकर नदी नाले नापता रहा। आखिर में मुखबिर की सूचना पर ही सरिस्का प्रशासन बाघिन एसटी-5 के शिकार के राज को खोल पाया। इसी प्रकार सरिस्का स्थित खरेटा गांव में कुएं में पैंथर का शव गिराने की घटना का राज भी मुखबिर की सूचना पर ही खुल सका। सरिस्का में कई महत्वपूर्ण घटना व शिकारियों के राज भी मुखबिरों की सूचना के आधार पर ही खुल पाए।

शिकारियों की गिरफ्तारी में मुखबिरों की सूचना अहम

सरिस्का में पकड़े जाने वाले शिकारियों के मामलों में मुखबिर की सूचना अहम रही हैं। सरिस्का में बाबरिया गिरोह से जुड़े शिकारियों की गिरफ्तारी होती रही है। वहीं कई बार जंगली सूअर, सांभर, चीतल सहित अन्य वन्यजीवों के शिकार की घटनाएं हुई हैं। इन घटनाओं में शिकारियों की गिरफ्तारी भी हुई, जिनकी सूचना मुखबिर के जरिए ही सरिस्का प्रशासन तक पहुंच पाई।

मुखबिरों के लिए बजट नाम मात्र का

राज्य सरकार की ओर से सरिस्का प्रशासन को मुखबिरी के लिए नाम मात्र का बजट मिलता है। मुखबिरों की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाती है एवं पुरस्कार आदि का भी सार्वजनिक तौर पर जिक्र नहीं होता।

हर अधिकारी के अपने मुखबिर

सरिस्का में वनकर्मी से लेकर हर अधिकारी के अपने-अपने मुखबिर हैं। ये ग्रामीण वनकर्मी व अधिकारियों के विश्वास के आधार पर ही उन्हें सूचना उपलब्ध कराते रहे हैं। मुखबिरों के सूचना उपलब्ध कराने के भी कई कारण हैं, इनमें पुरस्कार, राशि, अधिकारियों के विश्वास, स्वयं का स्वार्थ सहित कई कारण शामिल होते हैं। यही कारण है कि करीब 1213 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले सरिस्का बाघ परियोजना की सुरक्षा 152 वनकर्मी व 150 होमगार्ड के भरोसे हो पाती है।

ग्रामीणों से बाघों को नुकसान भी

सरिस्का में बसे एवं आसपास के गांवों के लोगों की बाघ व जंगल की सुरक्षा में बड़ी भूमिका रहने के साथ ही कई ग्रामीण बाघों के सफाए व जंगल को नुकसान पहुंचाने में भी पीछे नहीं है। इनमें बाघ एसटी-1 व 11 तथा बाघिन एसटी-5 की मौत घटनाओं में ग्रामीणों की संदिग्ध भूमिका रही है। वहीं वर्ष 2005 से पहले सरिस्का में बाघों के सफाए में भी कई ग्रामीणों का हाथ रहा है।

Prem Pathak Reporting
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