फर्ज निभाते अपाहिज बने इस जवान की दर्दभरी दास्तान पढऩे के बाद खड़े हो जाएगे रोंगटें,जाने क्यों हुआ यह हाल

सरिस्का में डेढ़ साल पहले शिकारियों से हुई थी मुठभेड, अब भी पांवों में बंदूक के छर्रे लेकर इलाज को भटक रहा है वनकर्मी

By: Prem Pathak

Published: 07 Jun 2018, 11:30 AM IST

फर्ज निभाने के लिए शिकारियों की गोली लगने से गंभीर घायल हुए वनकर्मी केवल कुमार वैद्य को बहादुरी के लिए पदोन्नति मिलना तो दूर, ठीक से इलाज भी नसीब नहीं हो पाया। नतीजतन घायल वनकर्मी अब भी पांवों में बंदूक के छर्रे लेकर इलाज को भटक रहा है।
सरिस्का बाघ परियोजना में 19 जनवरी 2017 को पृथ्वीपुरा के डाबली नाका स्थित खाताका जोहड़ में रात के समय शिकारियों से संघर्ष में दादर निवासी केवल कुमार पांव में छर्रे लगने से घायल हो गया। शिकारियों से संघर्ष में एक होमगार्ड का जवान ओमप्रकाश जांगिड़ भी घायल हुआ। बाद में घटना में शामिल ज्यादातर शिकारी पकड़े भी गए। उस दौरान तो वनकर्मी व होमगार्ड जवान की बहादुरी को सबने सराहा और सम्मान व पदोन्नति की मांग की। बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला गया। सरिस्का प्रशासन ने भी वनकर्मी को इस बहादुरी के लिए प्रमाण पत्र देकर दायित्व की इतिश्री कर ली।
पुलिस व अन्य विभाग होता तो मिल जाती पदोन्नति

पुलिस या अन्य किसी विभाग में ड्यूटी के दौरान ऐसी घटना होती तो संभवत: उसे अब तक पदोन्नति मिल चुकी होती, लेकिन सरिस्का में रात के समय शिकारियों से लोहा लेते गंभीर घायल होने के बाद भी केवल कुमार को अभी तक विभाग से पदोन्नति या किसी बड़े सम्मान का इंतजार है। उधर, सरिस्का अधिनस्थ कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष रामवीर सिंह गुर्जर ने उच्चाधिकारियों से डयूटी के दौरान शिकारियों की गोली लगने से घायल हुए वनकर्मी को जल्द पदोन्नति देने की मांग की है।

वनकर्मी का चल रहा इलाज

शिकारियों की गोली से घायल हुए वनकर्मी का गत डेढ़ साल से इलाज चल रहा है। वनकर्मी केवल कुमार की पीड़ा है कि अब तक वह इलाज पर दो से ढाई लाख रुपए खर्च कर चुका है। इससे वह चलने लायक हुआ है, लेकिन गोली के जख्म पूरी तरह भर नहीं पाए। चिकित्सकों का कहना है कि पांव की नसों में बंदूक की गोली के छर्रे फंसे हैं, इस कारण पांव का जल्द ऑपरेशन जरूरी है। इस ऑपरेशन में बड़ा खर्च बताया गया है। पूर्व सैनिक की पेंशन मिलने से उसने अब तक किसी तरह स्वयं के खर्चे पर पांव का इलाज कराया, लेकिन अब वह ऑपरेशन कराने में समर्थ नहीं है। इलाज के लिए सरिस्का प्रशासन की ओर से उसे अब तककोई आर्थिक सहायता नहीं मिल सकी है।

Prem Pathak Reporting
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