हरियाली सिमटने से घुट रही सांसें, पेड़ कटाई से सरकार भर रही खजाना

अलवर. हरे पेड़ों की निरंतर कटाई से अलवर जिला गैस चैम्बर में तब्दील होने लगा है, वहीं सरकार सडक़ निर्माण के दौरान हरे पेड़ों की कटाई से अपनी तिजोरी भरने में व्यस्त है।

By: Prem Pathak

Published: 06 Jan 2020, 12:30 AM IST

अलवर. हरे पेड़ों की निरंतर कटाई से अलवर जिला गैस चैम्बर में तब्दील होने लगा है, वहीं सरकार सडक़ निर्माण के दौरान हरे पेड़ों की कटाई से अपनी तिजोरी भरने में व्यस्त है। अलवर-रामगढ़ रोड के चौडा करने के कार्य के दौरान तीन हजार से ज्यादा हरे दरख्तों पर आरी चलनी है, इनमें से ज्यादातर पेड़ों की कटाई हो चुकी है और इन पेड़ों की कटाई से सरकार के खजाने में अब तक करीब 4 करोड़ 30 लाख रुपए जमा भी हो चुके हैं।

पीडब्ल्यूडी एनएच की ओर से अलवर-रामगढ़ रोड को चौड़ा करने का निर्माण कार्य शुरू किया गया है। नौगांवा की ओर सडक़ चौड़ाइकरण का कार्य प्रगति पर है। अलवर से हरियाणा सीमा तक सडक़ निर्माण में तीन हजार से ज्यादा हरे पेड़ हैं, सडक़ निर्माण के लिए इन हरे पेड़ों की कटाई जरूरी है। इतनी बड़ी संख्या में हरे पेड़ों की कटाई की एवज में पीडब्ल्यूडी एनएच ने 2.90 करोड़ की राशि सरकार को जमा करा दिया। इस राशि से वन विभाग को तीन हजार से ज्यादा नए पेड़ लगाने हैं।

सरकार की भरी तिजोरी, नए पेड़ लगाने की चर्चा भी नहीं

पीडब्ल्यूडी एनएच की ओर से 3 हजार पेड़ काटने की एवज में नए पेड़ लगाने के लिए सरकार को 2 करोड़ 90 लाख रुपए पहले ही जमा कराए जा चुके हैं। वहीं पेड़ों की कटाई के बाद नीलामी से अब तक सरकार को एक करोड़ 40 लाख रुपए अलग से मिल चुके हैं। इस तरह सरकार के खजाने में अब तक 4 करोड़ 30 लाख रुपए जमा हो चुके हैं। नियमानुसार इस राशि से वन विभाग को नए पेड़ लगाने होते हैं, जिससे पर्यावरण संतुलन बना रहे। जिले में अब तक 2 हजार से ज्यादा हरे पेड़ काटे जा चुके हैं, लेकिन काटे गए हरे पेड़ों की एवज में जिले में अलग से कोई नए पेड़ लगाने की योजना पर चर्चा नहीं हुई।

पर्यावरण को नुकसान और पेड़ों की कटाई भी बेतरतीब

लगातार हरे पेड़ों की कटाई से अलवर जिले का पर्यावरण संतुलन गड़बड़ाने का नतीजा है कि अलवर जिला गैस चैम्बर में तब्दील होने से लोगों की सांसें घुटने लगी है। अलवर जिले में प्रदूषण की समस्या भी गहराने लगी है। भिवाड़ी समेत अन्य क्षेत्र प्रदूषण की चपेट में आने लगे हैं। पर्यावरण को नुकसान के साथ ही हरे पेड़ों की बेतरतीब कटाई ने इस मार्ग पर लोगों की समस्या बढ़ा दी है। पेड़ों की कटाई से लेकर क्रेन से ट्रैक्टरों में लदाई तक किसी भी स्तर पर लोगों व वहां से गुजरने वाले वाहन चालकों की सुरक्षा का ध्यान नहीं रखा जा रहा। अलवर शहर के बख्तल चौकी से आगे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से मार्ग के पास स्थित कई जमीन की चारदीवारी टूट गई। सुरक्षा उपायों के बिना की जा रही हरे पेड़ों की कटाई से दुर्घटना की आशंका बढऩे के साथ ही जमीन मालिकों पर चारदीवारी निर्माण का अतिरिक्त खर्च का भार डाल दिया है। साथ ही कई स्थानों पर खातेदारी की जमीन में भी पेड़ काटने की शिकायत मिली है, जबकि ऐसे पेड़ों का मुआवजा खातेदार को नहीं दिया गया है।

जिम्मेदार विभागों के अपने-अपने तर्क

सडक़ निर्माण के दौरान तीन हजार पेड़ों की कटाई की एवज में वन विभाग के मद में सरकार को 2.90 करोड़ की राशि जमा करा दी गई है। इस राशि से नए पेड़ लगाने का कार्य वन विभाग का है। पेड़ कटाई का कार्य विभाग की ओर से वन विभाग की मॉनिटरिंग में कराया जा रहा है।

गोरधन सिंह
सहायक अभियंता, पीडब्ल्यूडी एनएच

पेड़ कटाई के बाद वन विभाग के डिविजन स्टाफ की ओर से दिए गए चालान के अनुसार डिपो में पेड़ों को जमा कर नीलामी की जाती है। हर माह की 13 व 25 तारीख नीलामी के लिए तय है। अवकाश होने पर आगामी दिन नीलामी होती है।

अनिल गुप्ता
एसीएफ, वन विभाग (स्टेट ट्रेडिंग)

जिले में 10 हजार से ज्यादा हरे पेड़ों पर संकट

अलवर जिले में विकास कार्यों के नाम पर हरे पेड़ों पर आरी चलने का रामगढ़ इकलौता उदाहरण नहीं है, बल्कि करीब सवा साल के दौरान जिले में 10 हजार से ज्यादा हरे पेड़ों पर सडक़, हाइवे, विद्युत निगम के जीएसएस निर्माण के नाम पर आरी चलने का संकट खड़ा हो गया है। इनमें करीब 5279 हरे पेड़ स्टेट हाइवे माजरी से हरियाणा, राजस्थान सीमा तथा माजरी से नीमराणा हाइवे प्रोजेक्ट में शामिल हैं। हाइवे निर्माण के लिए इनकी कटाई तय है। इससे पूर्व गत वर्ष अक्टूबर में खैरथल में वन विभाग के क्षेत्र में विद्युत जीएसएस निर्माण के लिए कई सौ हरे पेड़ों को काट दिया गया। वहीं अलवर जिले से होकर निकले वाले एक्सप्रेस हाइवे निर्माण के दौरान भी कई हजार हरे दरख्तों पर आरी चलना तय है। इन हरे पेड़ों की कटाई की एवज में सरकार को सम्बन्धित एजेंसी से राशि मिलने एवं कटे पेड़ों की नीलामी से करोड़ों की आय होना तय है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में हरे पेड़ काटने के बाद पर्यावरण के लिए इतनी ही संख्या में नए पेड़ लगाने का अभी इंतजार है।

Prem Pathak Reporting
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned