scriptalwar World Hindi Day news | शताब्दी पूर्व अलवर ने दिया था हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा | Patrika News

शताब्दी पूर्व अलवर ने दिया था हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा

विश्व हिंदी दिवस पर विशेष पूर्व अलवर रियासत में 1910-11 में प्राथमिक शिक्षा का माध्यम हिंदी किया गया

अलवर

Published: January 10, 2022 01:29:20 am

अलवर. हिंदी भाषा को वैश्विक भाषा के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिवर्ष 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है। भारत वर्ष में हिंदी भाषा को सम्मान दिलाने में अलवर पूर्व रियासत सदैव अग्रणी रहा है।
अलवर की पूर्व रियासत पर रिसर्च कर चुके एवं श्रीप्रताप सिंह बारहठ राजकीय महाविद्यालय शाहपुरा भीलवाड़ा के सहायक आचार्य इतिहास डॉ.हंसराज सोनी बताते हैं कि ब्रिटिश शासन काल के दौरान ही अलवर पूर्व रियासत में हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिल गया था। तत्कालीन पूर्व अलवरेन्द्र जयसिंह ने शासन में हिंदी भाषा के प्रयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 21 सितंबर 1908 को समस्त राजकाज की भाषा हिंदी में करने की आज्ञा प्रसारित की, जो 4 अक्टूबर 1908 ( विजयदशमी ) से समस्त पूर्व रियासत में प्रभावी हुई। पूर्व महाराजा जयसिंह ने इस संदर्भ में अपने संबोधन में कहा कि नीति और धर्म का पालन तथा अभ्यास उन्नति का कारण है, पर जो मातृभाषा ही नहीं जानता, वह अपने यहां की नीति और धर्म को क्या जानेगा।
प्रशासन में हिंदी को व्यवहार मे लाने पर दिया था जोर : पूर्व रियासत में पूर्व महाराजा जयसिंह ने राजकाज में हिंदी को अधिक व्यवहार में लाने के लिए 1908 से 1932 तक दिए आदेशों के तहत राज्य कर्मचारियों और अधिकारियों को हिंदी भाषा का ज्ञान प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। तहसील स्तर पर हिंदी परिषदों की स्थापना की, हिंदी सीखने के लिए उन्हें सवैतनिक अवकाश दिया गया तथा हिंदी भाषा में उनकी कुशलता पता लगाने के लिए समय-समय पर परीक्षाएं भी आयोजित की गई। साथ ही हिंदी भाषा में योग्यता प्राप्त न करने तक उनके वेतन को रोकने की चेतावनी भी दी गई।
हिंदी को बनाया रोजगार की भाषा : पूर्व अलवर रियासत में 1910-11 में प्राथमिक शिक्षा का माध्यम उर्दू और फारसी के स्थान पर हिंदी भाषा किया गया। राज्य शासन का मानना था कि मातृभाषा के ज्ञान से ही उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकेंगे। राज्य शासन की ओर से हिंदी को संरक्षण दिए जाने के फलस्वरूप कवि जयदेव, पं. कृष्ण दत्त शास्त्री, अलखधारी, स्वामी हंसस्वरूप, कवि संपतराम, पिनाकी लाल जोशी, पं. हरिनारायण किंकर, महेश चंद्र जोशी जैसे अनेक लेखक हुए, जिन्होंने अपनी विशिष्ट लेखन परंपरा से हिंदी साहित्य की महती सेवा कर यहां के साहित्यिक परिवेश को भी समृद्धशाली बनाया।
शताब्दी पूर्व अलवर ने दिया था हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा
शताब्दी पूर्व अलवर ने दिया था हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा
राजकीय पदों और संस्थाओं का किया गया हिंदी नामकरणराज्य शासन की ओर से 1915 में आदेश प्रसारित कर देवनागरी लिपि और हिंदी भाषा के शुद्ध प्रयोग पर जोर दिया गया। जिसके तहत समस्त राजकीय पदों, मार्गों, भवनों तथा वाहनों के नाम भी हिंदी भाषा में रखे गए। इसमें पूर्व महाराजा को 'अलवरेन्द्रÓ, प्रधानमंत्री को 'सुमंतÓ तथा न्याय मंत्री को 'धर्मराजÓ आदि कहा गया। राजकीय मार्गों का रघुमार्ग, कुशमार्ग, मनुमार्ग आदि तथा राजकीय भवनों का हंस आश्रम, प्रेम कुंज, भक्त निकेतन आदि नामकरण किया गया। हिंदी भाषा के हिमायती होने के कारण ही जयसिंह के सुझाव पर देसी रियासती शासकों की ओर से गठित चैंबर ऑफ प्रिंसेस का नाम नरेंद्र मंडल रखा गया।

सबसे लोकप्रिय

शानदार खबरें

Newsletters

epatrikaGet the daily edition

Follow Us

epatrikaepatrikaepatrikaepatrikaepatrika

Download Partika Apps

epatrikaepatrika

Trending Stories

ससुराल में इस अक्षर के नाम की लडकियां बरसाती हैं खूब धन-दौलत, किस्मत की धनी इन्हें मिलते हैं सारे सुखGod Power- इन तारीखों में जन्मे लोग पहचानें अपनी छिपी हुई ताकत“बेड पर भी ज्यादा टाइम लगाते हैं” दीपिका पादुकोण ने खोला रणवीर सिंह का बेडरूम सीक्रेटइन 4 राशियों की लड़कियां जिस घर में करती हैं शादी वहां धन-धान्य की नहीं रहती कमीकरोड़पति बनना है तो यहां करे रोजाना 10 रुपये का निवेशSharp Brain- दिमाग से बहुत तेज होते हैं इन राशियों की लड़कियां और लड़के, जीवन भर रहता है इस चीज का प्रभावमौसम विभाग का बड़ा अलर्ट जारी, शीतलहर छुड़ाएगी कंपकंपी, पारा सामान्य से 5 डिग्री नीचेइन 4 नाम वाले लोगों को लाइफ में एक बार ही होता है सच्चा प्यार, अपने पार्टनर के दिल पर करते हैं राज

बड़ी खबरें

India-Central Asia Summit: सुरक्षा और स्थिरता के लिए सहयोग जरूरी, भारत-मध्य एशिया समिट में बोले पीएम मोदीAir India : 69 साल बाद फिर TATA के हाथ में एयर इंडिया की कमानयूपी चुनाव से रीवा का बम टाइमर कनेक्शननागालैंड में AFSPA कानून को खत्म करने पर विचार कर रही केंद्र सरकारजिनके नाम से ही कांपते थे आतंकी, जानिए कौन थे शहीद बाबू राम जिन्हें मिला अशोक चक्रUP Election 2022: भाजपा सरकार ने नौजवानों को सिर्फ लाठीचार्ज और बेरोजगारी का अभिशाप दिया है: अखिलेश यादवतमिलनाडु सरकार का बड़ा फैसला, खत्म होगा नाईट कर्फ्यू और 1 फरवरी से खुलेंगे सभी स्कूल और कॉलेजपीएम नरेंद्र मोदी कल करेंगे नेशनल कैडेट कॉर्प्स की रैली को संभोधित, दिल्ली के करियप्पा ग्राउंड में होगा कार्यक्रम
Copyright © 2021 Patrika Group. All Rights Reserved.