अलवर में बोले अन्ना हजारे, मन कह रहा है जाना होगा रामलीला मैदान

अलवर में बोले अन्ना हजारे - आंदोलन से सत्ता प्रवर्तन तो हुआ, लेकिन व्यवस्था परिवर्तन नहीं, मन कह रहा है जाना होगा रामलीला मैदान

गौरव मिश्रा 

अलवर. वर्ष 2011 में अन्ना आंदोलन का गवाह रामलीला मैदान ही नहीं समूची दुनिया रही। आंदोलन भी एेसा कि तत्कालीन सरकार को आगामी चुनाव में सत्ता ही गवानी पड़ गई। लेकिन आंदोलन के परिणाम जनता के लिए उतने सुखद नहीं साबित हुए। लोकपाल का कानून तो बन गया, लेकिन नई सरकार तीन साल बाद भी  अमल में नहीं लाई है। यह बात आंदोलन के नायक सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे को बेचैन कर रही है।  अलवर के भीकमपुरा में शनिवार को सामाजिक कार्यकर्ताओं के कार्यक्रम में भाग लेने आए अन्ना ने कह दिया है कि उनका मन कह रहा है कि रामलीला मैदान जाना ही होगा। 



लोकपाल कानून तो बन गया लेकिन  अमल में नहीं आया


अन्ना हजारे ने बताया कि आंदोलन के बाद लोकपाल कानून तो बन गया। लेकिन तीन साल बाद भी अमल में नहीं आया। अगर अमल में आया होता तो आज कम से कम 50 प्रतिशत भ्रष्टाचार समाप्त हो गया होता। आज भी सरकारी कार्यालयों में पैसे दिए बिना लोगों का काम नहीं हो रहा है। आम आदमी को टरकाया जाता है। जबकि वह देश का मालिक है । 26 जनवरी 1950 को प्रजा की सत्ता आ गई थी। प्रजा मालिक है, दफ्तर में बैठे लोग नौकर हैं। जनता ही असल सरकार है, लेकिन देश का दुर्भाग्य यह है कि उसको ही भटकना पड़ रहा है। आज भी लोकपाल और लोक आयुक्त का अमल नहीं हो रहा है।



इच्छाशक्ति का  अभाव


 लोकपाल का नहीं बनना सरकार की इच्छाशक्ति के अभाव को दर्शाता है। अभी मैं राह देख रहा हूं। मैं किसी पार्टी का विरोधी नहीं हूं। लेकिन मैं जनता के लिए लड़ता रहा हूं और आखिरी सांस तक लडूंगा। अभी तो मैंने सरकार को पत्र लिखा है। याद है कि लोकपाल और लोकायुक्त के लिए पूरा देश रास्ते पर आया था। फिर भी उसका अमल नहीं हो रहा है। मुझे यह सहन नहीं हो रहा है। मुझसे मेरा मन कह रहा है कि मुझे फिर से रामलीला मैदान जाना होगा। 



पीछे मुड़कर देखता हूं तो...


अन्ना ने कहा कि लोग नारा लगा रहे हैं कि अन्ना तुम संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं, लेकिन जब पीछे मुड़कर लोगों को देखता हूं तो कोई नजर नहीं आता। इसके बाद कार्यक्रम में जलपुरुष राजेन्द्र सिंह ने भाग ले रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं के हाथ उठवाकर अन्ना को विश्वास दिलाया कि जनता उनके साथ है। हालांकि मौजूदा हालात में अब अगर अन्ना आंदोलन की राह पर निकलते हैं तो एक मजबूत टीम खड़ी करना कड़ी चुनौती होगी।


kamlesh Desk
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