अंकल! भूख लग रही है, खाना ढूंढ रहे हैं, उठा लेने दो प्लीज, भिवाड़ी शहर की है यह दुखद तस्वीर

राजस्थान को सबसे ज्यादा जीएसटी देने वाला भिवाड़ी शहर, जिसकी ऊंची-ऊंची इमारतें देखकर सभी यहां के विकास की बात करते हैं, लेकिन इसका एक दूसरा चेहरा भी है।

By: Lubhavan

Updated: 23 May 2020, 12:35 PM IST

आसिफ खान

भिवाड़ी. कौन सा मजहब कौन सा रब है, भूखा इंसान ये पूछता कब है, है खबर उसको या बेखबर वो है, पेट में जलती आग जाती है। भूख रोती है, तिलमिलाती है... कवि विजय यादव की यह पंक्तियां झकझोर कर रख देती हैं। लेकिन ये पंक्तियां उस वक्त जिंदा हो उठीं, जब भिवाड़ी बाईपास स्थित एमवीएल सोसायटी की आसमान छूती इमरतों के बाहर एक ऐसी तस्वीर देखने को मिली, जिसे देखकर कलेजा कांप उठा। जिसने भी वो तस्वीर देखी, उसका दिल दहल गया। चिलचिलाती धूप में भूख से बेहाल चार मासूम बच्चे कूड़े के ढेर से खाने का सामान ढूंढ रहे थे। मासूम बच्चे भूख से छटपटाहट रहे थे।

भिवाड़ी बाईपास पर आसमान छूती इमारतों की दीवार के पास वहां के निवासी घर की सफाई कर कूडा डालते हैं जिसमें कुछ बचा हुआ खाना भी होता है। जिसमें पशु कुछ खा रहे थे। वहीं पास कुछ दूरी पर बनी झुग्गियों में रहने वाले बच्चों की उन पशुओं को देखकर वहां आते हैं और कूड़े में से कुछ बीनने लगते है और अपनी जेबों में रखना शुरु कर देते हैं। बच्चों के पास जाकर पूछने पर कुछ छुपाते हुए कहते हैं अंकल हम तो खाना ढूंढ रहे थे। भूख लगी है और वहां से जाने लगते हैं जब उनसे पूछा क्या छुपा रहे हो तो वह जेब से मास्क निकालकर दिखाते हैं जो वहां से उन्होनें उठाया है। शायद इस आस में कुछ खाने के साथ-साथ चेहरा ढकने को भी मास्क मिल गया। उन मासूमों को क्या पता ना तो यह खाना सही है और ना ही यह मास्क। उन्हें देखकर और उनकी बात सुनकर किसी का भी दिल दहल जाए।

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प्रशासन का दावा, फिर भी गरीबों को नहीं मिल रहा खाना

यह दृश्य सोचने पर विवश करता है कि कोरोना महामारी से भिवाड़ी जैसा शहर भी जो पूरे राजस्थान में सबसे ज्यादा सरकार को टैक्स देता है भुखमरी की तरफ बढ़ रहा है। प्रशासन चाहे खाना वितरित करने के लाख दावे करे, लेकिन भिवाड़ी बाईपास की हालात देखकर लग रहा था कि आज भी कई परिवार ऐसे हैं, जो दो वक्त के खाने से भी महरूम हैं।

कहां बांटे गए लाखों खाने के पैकेट

लॉकडाउन के दौरान अलग-अलग संस्थाओं व भामाशाहों के सहयोग से नगर परिषद द्वारा भिवाड़ी में जरूरतमंद लोगों को लिए लाखों अब तक लाखों खाने के पैकेट व राशन किट वितरित किए जाने का दावा किया जा रहा है। इसके साथ ही हर पात्र को 10 किलो गेहूं और अन्य खाद्य सामग्री दी जा रही है। कोरोना से बचने के लिए मास्क और सैनिटाइजर भी बांटे जा रहे हैं। इसके बाद भी भिवाड़ी में यह बच्चे खाने को मोहताज हैं। इन हालातों में नगर परिषद प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठना लाजमी है।

Lubhavan Desk
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