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मॉडल स्कूलों में प्री-प्राइमरी और प्राइमरी कक्षाओं के संचालन का नौनिहाल कर रहे इंतजार…पढ़ें यह न्यूज

महात्मा गांधी विद्यालयों की वाहवाही में स्वामी विवेकानन्द मॉडल स्कूलों को भूल गई तत्कालीन राज्य सरकार। करोड़ों की लागत के बने भवन हो रहे अनुपयोगी साबित।

अलवरJun 07, 2024 / 07:29 pm

Ramkaran Katariya

अलवर. तत्कालीन राज्य सरकार और शिक्षा विभाग महात्मा गांधी अंग्रेजी विद्यालयों को खोलने की वाहवाही में प्रदेश में पहले से चल रहे स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूलों की तरफ ध्यान देना भूल गए, जिसके कारण कई सालों बाद भी यहां प्री-प्राइमरी और प्राइमरी कक्षाओं का संचालन प्रारम्भ नहीं हो पाया। अब प्रदेश में सरकार बदली है तो नौनिहाल इन माॅडल स्कूलों में प्री-प्राइमरी और प्राइमरी कक्षाओं के संचालन की बांट देख रहे हैं। हालांकि गत साल खुले महात्मा गांधी में क्रमोन्नत सरकारी विद्यालयों में प्री-प्राइमरी के लिए बाल वाटिकाओं की शुरुआत कर दी गई।
वर्तमान में राज्य के 27 जिलों में कुल 134 स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल

गौरतलब है कि प्रदेश में वर्ष 2014-15 में नौनिहालों को अंग्रेजी शिक्षा मुहैया कराने के लिए स्वामी विवेकानन्द मॉडल स्कूलों की स्थापना प्रत्येक जिले में ब्लॉक स्तर पर की गई थी और इस दौरान प्रदेश में 134 विद्यालय खोले गए थे। वर्तमान में राज्य के 27 जिलों में कुल 134 स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल हैं, जिनमें कक्षा 6 से 12वीं तक लगभग 60 हजार से भी ज्यादा विद्यार्थी अंग्रेजी माध्यम में अध्यनरत हैं। इसके अलावा भविष्य में कक्षा एक से पांच के लिए इन विद्यालयों में करोडों की लागत के प्री-प्राइमरी के भवन तैयार किए गए। कई वर्ष बीत जाने के बाद भी इन भवनों में प्राइमरी और प्री-प्राइमरी कक्षाओं की शुरुआत नहीं हो पाई है और ये भवन नाकारा साबित हो रहे है। शिक्षा विभाग इन भवनों का उपयोग महज शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए कर रहा है।
वर्तमान में जिले में माँडल स्कूलों की स्थिति

समसा के एडीपीसी मनोज शर्मा ने बताया कि वर्तमान में अलवर जिले 10 स्वामी विवेकानन्द मॉडल स्कूल संचालित हैं, जिनमें बानसूर ब्लॉक के शाहपुर, लक्ष्मणगढ़ ब्लॉक के हरसाना, रैणी ब्लॉक के डेरा, रामगढ़ ब्लॉक के बगड़ राजपूत, तिजारा ब्लॉक के हीगवाहेड़ा, किशनगढ़ के चोरबसई, उमरैण के बालेटा, राजगढ़़ के खोहदरीबा, थानागाजी के नाथूसर और कठूमर के बडौदाकान में स्वामी विवेकानन्द मॉडल स्कूल संचालित है। इन विद्यालयों में कक्षा 6 से 8 में 60-60 विद्यार्थियों के दो सेक्शन एवं कक्षा 9 से 12 तक कक्षा में 40-40 के दो सेक्शन संचालित हैं। प्रत्येक विद्यालय में लगभग 500 के आसपास का नामांकन है।
स्थानान्तरण का जरिया बन रहे मॉडल स्कूल

प्रदेश के मॉडल स्कूल इन दिनों अध्यापकों के लिए महज अन्य जिलों से स्थानान्तरण का जरिया बने हुए हैं। जहां सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के पद रिक्त चल रहे हैं, वहीं इन मॉडल स्कूलों में अधिकतर पद भरे हुए हैं, जिसका कारण इस जिले के वह अध्यापक जो अन्य जिलों में कार्यरत हैं, वो स्थानान्तरण न होने के कारण इन विद्यालयों में प्रतिनियुक्ति स्थानान्तरण पर लगे हुए हैं। इन विद्यालयों में प्रतिनियुक्ति के कारण इनकी वरीयता का लैप्स नहीं होता, जिसके कारण अन्य जिलों से प्रतिनियुक्ति स्थानान्तरण पर शिक्षक यहां कार्यरत है।
राज्य सरकार स्तर का मामला है

इधर मामले में जिला शिक्षा अधिकारी अलवर नेकीराम का कहना है कि मॉडल स्कूल में प्री-प्राइमरी और प्राइमरी कक्षा का संचालन राज्य सरकार स्तर का मामला है। सरकार और विभाग के जो भी आदेश होंगे उनकी पालना की जाएगी।

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