कोरोना काल में निजी स्कूल संचालक व शिक्षकों की मजबूरी, कोई बेच रहा गोलगप्पे तो कोई कर रहा मजदूरी

कोरोना के चलते हुए लॉक डाउन के कारण निजी स्कूल संचालकों ने मजबूरन दूसरे काम की ओर रुख किया है, कोई गोलगप्पे बेच रहा है तो कोई मजबूरी कर रहा है

By: Lubhavan

Published: 20 Jul 2020, 03:35 PM IST

हितेश भारद्वाज

अलवर. कोरोना संक्रमण के कारण हुए लॉकडाउन ने एक ओर जहां लोगों के सामने रोजगार का संकट पैदा कर दिया, वहीं कुछ लोगों को अपने मूल कार्य को बदल अन्य कार्यो को करने के लिए मजबूर कर दिया। गौरतलब है कि लॉक डाउन के कारण निजी विद्यालयों को करीब बंद हुए 4 माह हो गए, ऐेसे में विद्यालयों के संस्था प्रधान, शिक्षक, व्यवस्थापक और अन्य स्टाफ आदि के रोजगार खत्म हो गए। शिक्षण संस्थाओं के खुलने की अभी निश्चितता नहीं है , ऐसे में अलवर जिले के शिक्षण संस्थाओं से जुड़े कर्मचारियों ने अपने परिवार के पालन पोषण के लिए दूसरे धंधों को करना ही मुनासिब समझा।

अध्यापन कार्य छोड गोलगप्पे बेचने को मजबूर

अलवर जिले के नौगांवा निवासी बिजेन्द्र सैनी जो लम्बे समय से निजी विद्यालयों में बच्चों को अध्यापन का कार्य करा रहे थे, लेकिन कोरोना के लॉक डाउन में बन्द हुए निजी विद्यालयों के कारण उनके सामने कार्य का संकट पैदा हो गया, दो ,माह तो उन्होने इस आस में निकाल दिए कि शायद अब विद्यालय खुल जाए, लेकिन विद्यालयों के खुलने की अनिश्चितता के चलते अब गोलगप्पे की ठेली लगा अपने परिवार का पालन पोषण करने का मजबूर होना पड़ा। बिजेंन्द्र सैनी बताते है कि पूर्व में उनके भाई रमेश सैनी इस कार्य से लम्बे समय से जुड़े हुए है, जिसके कारण उन्होने इस कार्य को सीख यह काम करना ही उचित समझा। इस कार्य में ठीक ठाक कमाई कर लेता है, जिससे परिवार का भरण पोषण हो जाता है। भविष्य में भी अगर विद्यालय खुलते है तो वो अध्यापन के साथ इस कार्य को भी जारी रखेंगे ।

स्कूल संचालक बेचने लगा विद्यालय के बाहर सब्जी

सुन्हैडा गांव के ज्ञानधारा पब्लिक स्कूल व्यवस्थापक एवं संस्था प्रधान हुकम सैनी ने बताया कि उनके विद्यालय में लगभग 282 विधार्थी अध्यनरत है। लॉकडाउन के कारण बन्द हुए विद्यालयों के कारण अभिभावकों ने न तो गत वर्ष की स्कूल फीस का भुगतान किया गया और न ही वर्तमान सत्र में कोई फीस जमा नहीं कर रहा है, जिसके कारण रोजगार का संकट पैदा हो गया और मजबूरन उन्होंने अपने स्कूल के बाहर ही फल और सब्जी बेचने का काम चालू कर दिया है और साथ साथ खेती का काम कर रहे है, जिससे परिवार का गुजारा कर रहे है ।


संस्था प्रधान नरेगा में निभा रहे मैट की भूमिका

शेरपुर गांव के दिनायत पब्लिक स्कूल के व्यवस्थापक और संस्था प्रधान शाहिद खां ने बताया कि विद्यालय बन्द होने से परेशानी का सामना करना पड रहा है, जिसके कारण वो मनरेगा में कार्य करने को मजबूर है। मनरेगा में वो मैट की भूमिका निभा रहे है, वहीं विद्यालय के कुछ अध्यापक मजदूरी कर रहे है। विद्यालयों के खुलनें की कोई निश्चितता नहीं है, ऐसे में कोई तो कार्य घर गुजारे के लिए करना पडेगा। विद्यालय में विधार्थी संख्या लगभग 240 थी ।

विद्यालय बन्द तो कम्पनी में मजदूरी करना ही उचित

मुबारिकपुर निवासी सुनीता सोनी लॉक डाउन से पूर्व क्षेत्र के एक निजी विद्यालय में चर्तुथ श्रेणी कर्मचारी के रूप में कार्य करती थी और उनकी बेटी अध्यापन का कार्य कराती थी। लाँकडाउन के बाद से विद्यालय बन्द है । सुनीता विधवा है घर में कोई कमाने वाला नहीं है। अब घर चलाने के लिए वे स्वंय और उनकी बेटी टपूकडा स्थित कम्पनी में मजदूरी का काम कर रही है।

विद्यालय संचालक कर रहा ड्राईवरी

खोहर गांव के लक्ष्य पब्लिक स्कूल जिसमें करीब 260 बच्चें अध्यनरत थे । विद्यालय संचालक राकेश कुमार मजोका विद्यालय बन्द होने के बाद ड्राईवरी का काम कर रहे है और पास के गांव की गाडी को किराये पर लेकर गाडी चला रहे है। मजोका बताते है कि लाँकडाउन के कारण लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है, ऐसे में पिता के द्वारा गाडी सिखाने का हुनर उनके आज काम आया है।

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Lubhavan Desk
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