राजस्थान में गोतस्करों की नई तैयारी से पुलिस की चिंता बढ़ी, पुलिस को देखते ही कर देते हैं फायरिंग

राजस्थान में गोतस्करों की नई तैयारी से पुलिस की चिंता बढ़ी, पुलिस को देखते ही कर देते हैं फायरिंग
राजस्थान में गोतस्करों की नई तैयारी से पुलिस की चिंता बढ़ी, पुलिस को देखते ही कर देते हैं फायरिंग

Sujeet Kumar | Updated: 12 Oct 2019, 05:27:40 PM (IST) Alwar, Alwar, Rajasthan, India

Cow Smugglers firing On Police : राजस्थान पुलिस में गोतस्करों की नई तैयारी चिंता का विषय बना हुआ है। गोतस्कर अब हथियार साथ रखकर तस्करी कर रहे हैं।

अलवर. Cow Smuggling In Rajasthan : सर्दी की दस्तक के साथ ही गोतस्करों ने नई तैयारी शुरू कर दी है, जिससे पुलिस की चिंता बढ़ गई है। हथियारों से लैस होकर गोतस्कर अलवर और भरतपुर के रास्ते गोवंश ले जा रहे हैं। पुलिस से सामना होते ही गोतस्कर फायरिंग करने से भी नहीं चूक रहे हैं। पिछले करीब डेढ़ माह में अलवर जिले में अचानक से फिर गोतस्करी के मामले बढ़ गए हैं।

मेवात के अलवर और भरतपुर गोतस्करी के गढ़ हैं। गोतस्कर अलवर और भरतपुर के रास्ते हरियाणा और उत्तरप्रदेश से गोवंश की तस्करी कर रहे हैं। सर्दी की शुरुआत होते ही गोतस्करी बढ़ जाती है। पिछले करीब एक माह से अलवर और भरतपुर जिले में अचानक से गोतस्करी बढ़ गई है। गोतस्कर बेखौफ होकर गायों को उठाकर ले जा रहे हैं।

पुलिस के पीछा करने व नाकेबंदी से भी गोतस्कर नहीं घबरा रहे हैं। पुलिस को पीछे या सामने देख गोतस्कर देसी कट्टों से सीधे फायरिंग और पथराव कर रहे हैं। अलवर जिले की बात करें तो पिछले करीब एक माह में आधा दर्जन से ज्यादा गोतस्करी के मामले सामने आ चुके हैं।

सर्दी में गोमांस की बढ़ जाती है डिमांड

गोमांस काफी गरम होता है। इस कारण सर्दी आते ही गोमांस की डिमांड बढ़ जाती है। राजस्थान और हरियाणा के मेवात क्षेत्र, उत्तरप्रदेश सहित महानगरों के बड़े होटलों में गोमांस खूब परोसा जाता है। इतना ही डिब्बा बंद मीट के नाम पर गोमांस विदेशों तक भेजा जा रहा है।

आधा दर्जन से ज्यादा मामले सामने आए

अलवर जिले में एक माह में गोतस्करी के आधा दर्जन से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। शाहजहांपुर, भिवाड़ी, तिजारा, गोविंदगढ़, लक्ष्मणगढ़, खेरली और कठूमर में गोतस्करी के मामले सामने आ चुके है। इनमें कई मामलों में पीछा करने पर गोतस्करों ने पुलिस और ग्रामीणों पर फायरिंग की। वहीं, हत्थे चढऩे पर ग्रामीणों ने गोतस्करों को पकडकऱ पीटा भी है।

मोटे मुनाफे के लालच में गोतस्करी

मोटा मुनाफा कमाने के लालच में कुछ लोग गोतस्करी कर बड़ा अपराध कर रहे हैं। गोतस्कर 2-3 हजार रुपए में बीमारू गाय खरीदते हैं या फिर गली-मोहल्ले और सडक़ों पर घूमने वाली गायों को उठाते हैं और उन्हें वध के लिए हरियाणा और उत्तरप्रदेश के बूचडख़ानों में ले जाते हैं। गोमांस, खाल और हड्डी आदि को 20 से 25 हजार रुपए तक बेचते हैं।

ग्रामीण बच रहे गोतस्करों को पकडऩे से

जिले में गोतस्करी को रोकने के लिए ग्रामीण पुलिस के कंधे से कंधा मिलाकर साथ देते थे। पिछले कुछ मामलों में गोतस्करों को पकड़ पीट-पीटकर हत्या व मारपीट तथा फायरिंग से गुस्साए ग्रामीणों ने गोतस्करों को धुन डाला था। ऐसे कई मामलों में ग्रामीणों के खिलाफ प्रकरण दर्ज हुए और जेल तक जाना पड़ा। इस कारण ग्रामीण अब गोतस्करों को पकडऩे से बचने लगे हैं।

रोकथाम के प्रयास जारी

जिले में गोतस्करी रोकने के लिए पुलिस की ओर से विशेष प्रयास जारी हैं। गोतस्करी की घटनाएं बढ़ते ही रात्रि नाकेबंदी और पुलिस गश्त व्यवस्था को और सुदृढ कर दिया गया है। पुलिस की प्रभावी कार्रवाई के कारण पिछले दिनों जिले में कई जगह गोतस्कर गायों को ले जाने में विफल रहे हैं।
परिस देशमुख, जिला पुलिस अधीक्षक, अलवर।

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