गर्दन पर लगाते हैं इंजेक्शन, गले में ही दब जाती है पशु की आवाज

गर्दन पर लगाते हैं इंजेक्शन, गले में ही दब जाती है पशु की आवाज

Rajeev Goyal | Updated: 28 Dec 2017, 10:55:40 AM (IST) Alwar, Rajasthan, India

पुलिस ने गोतस्करों से पकड़ी दवाइयां और इंजेक्शन, गोवंश से निर्दयता से पेश आते हैं गोतस्कर। पुलिस पूछताछ में उगले कई रौंगटे खड़े कर देने वाले राज।

अलवर. गोवंश को गाड़ी में भरने के लिए गोतस्कर जिस तरीके का इस्तेमाल करते हैं, उससे गोवंश की आवाज गले में ही दफन हो जाती है। गोतस्कर गोवंश की गर्दन पर इंजेक्शन लगाते हैं। इससे पशु का गला सुन्न हो जाता है और उसका घंटों तक रंभाना बंद हो जाता है। पशु के मूक होने पर वे पूंछ पर चुटकी काट उसे गाड़ी में पटक लेते हैं। इस दौरान पशु विरोध भी नहीं जताता।

गत दिनों नीमराणा पुलिस ने कुछ गोतस्करों को पकड़ा, जिनके कब्जे से पुलिस ने कुछ दवाइयां व सिरिन्ज भी बरामद की। चिकित्सकों की मानें तो यह दवा खाल, मांसपेशियों को सुन्न करने के काम आती है। चिकित्सक मरीज के फेफड़ों से पानी निकालने आदि के दौरान इस दवा का इस्तेमाल करते हैं।

ज्यादा दवा से हो सकती है मौत

चिकित्सकों के अनुसार इस दवा का इस्तेमाल ज्यादातर ऑपरेशन के दौरान सर्जन करते हैं। दवा से मरीज के शरीर का कुछ हिस्सा आधा-पौना घंटे के लिए सुन्न हो जाता है। इसके लिए दवा की एक निश्चित मात्रा दी जाती है। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. केके शर्मा के अनुसार गोतस्करों से बरामद दवा बेहद खतरनाक है। इसमें लिग्नोकेन के साथ-साथ एड्रीनलिन भी मिला हुआ है। इस दवा की एक निश्चित मात्रा से 3 से 4 घंटे के लिए किसी को सुन्न किया जा सकता है। पशुओं के इस दवा का इंजेक्शन लगाने से उनका रंभाना बंद हो जाता है। खास बात ये है कि खाल की जगह नस में इस दवा के जाने एवं दवा की अधिक मात्रा से पशु की मौत भी हो सकती है।


सस्ता व आसानी से उपलब्ध

गोतस्करी के लिए गोतस्करों की ओर से गोवंश को लगाए जाने वाला यह इंजेक्शन व दवा काफी सस्ती है। करीब 30 एमएल दवा से दस पशुओं को दो से तीन घंटे के लिए आसानी से सुन्न किया जा सकता है। खास बात ये है कि यह दवा मेडिकल स्टोरों पर आसानी से उपलब्ध है। इससे गोतस्करों को इसे खरीदने में जोखिम नहीं उठाना पड़ता।

पूरा का पूरा नेटवर्क करता है काम


गोतस्करी में एक-दो लोग नहीं बल्कि गोतस्करों का पूरा का पूरा नेटवर्क काम करता है। गोतस्करी के लिए ये तेज गति से गाड़ी चलाने वाला चालक भी लेकर चलते हैं। जो कच्चे-पक्के रास्तों पर गाड़ी चलाने का अभ्यस्त हो। इतना ही नहीं गोवंश को इकट्ठा करने के लिए इनके लोग पहले से तैनात रहते हैं। जो गोवंश को इकट्ठा कर इसकी सूचना अपने साथियों को देते हैं। इसके बाद उनके साथी आते हैं और गोवंश को इंजेक्शन लगा गाड़ी में भरकर ले जाते हैं। पुलिस पूछताछ में गोतस्करों ने बताया कि वे गोवंश को इकट्ठा करने वालों को भी पैसे देते हैं।

सस्ता व आसानी से उपलब्ध


गोतस्करी के लिए गोतस्करों की ओर से गोवंश को लगाए जाने वाला यह इंजेक्शन व दवा काफी सस्ती है। करीब 30 एमएल दवा से दस पशुओं को दो से तीन घंटे के लिए आसानी से सुन्न किया जा सकता है। खास बात ये है कि यह दवा मेडिकल स्टोरों पर आसानी से उपलब्ध है। इससे गोतस्करों को इसे खरीदने में जोखिम नहीं उठाना पड़ता।

फैक्ट फाइल-

वर्ष दर्ज प्रकरण गिरफ्तार आरोपित बरामद गोवंश
2015 140 226 823

2016 94 116 863
2017 77 82 429

(आंकड़े जनवरी से अक्टूबर तक के)
- पुलिस ने गोतस्करों के कब्जे से दवाइयां व इंजेक्शन बरामद किए थे। ये गोवंश की गर्दन पर इंजेक्शन लगाते हैं। इससे उसकी आवाज निकलना बंद हो जाती है। गोतस्करों का पूरा का पूरा नेटवर्क काम करता है। ये गोवंश को इकट्ठा करने के भी पैसे देते हैं।

हितेश शर्मा, थाना प्रभारी नीमराणा।

Show More

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned