मन्नतों के बाद मिली बेटी, चिकित्सा कर्मियों की लापरवाही ने छीन ली खुशी की सांसें

मन्नतों के बाद मिली बेटी, चिकित्सा कर्मियों की लापरवाही ने छीन ली खुशी की सांसें

By: Kailash

Published: 03 Jan 2020, 01:22 AM IST

६७ साल बाद परिवार में हुआ था बेटी का जन्म
अलवर. तीन पीढियों से घर में किसी नन्हीं बालिका की किलकारी सुनाई नहीं दी, घर में सबको इंतजार था तो बस एक बेटी का, जिसकी चहक से सारे घर में रौनक आ जाए। बेटी के लिए ईश्वर के मंदिर में प्रार्थना की, मस्जिद में दुआ मांगी, चर्च में प्रार्थना की तब जाकर दिसंबर में एक बेटी का मूंह देखने को मिला। लेकिन अस्पताल के कर्मचारियों की लापरवाही से यह खुशी मातम में बदल गई। बेटी के जन्म की यह खुशी जब तक दरवाजे की चौखट पर पहुंचती उससे पहलीे ही ईश्वर ने उसकी सांसें छीन ली।

यह कहना है अलवर के शिशु चिकित्सालय की एफबीएनसी यूनिट में आग लगने से मरने वाली नवजात की परिजनों का। जिनका रो-रोकर बुरा हाल है।
३१ दिसंबर को शिशु अस्पताल में एफबीएनसी यूनिट में शार्ट सॢकट से आग लगने से नवजात बालिका झुलस गई थी। इसके बाद बालिका को जयपुर रैफर कर दिया गया। वहां उसकी मौत हो गइ।

बालिका का शव गुरुवार की दोपहर को अलवर लाया गया। शव को घर पर ना ले जाकर उसे परिजन सीधे ही प्रतापबंध स्थित शमशान घाट ले गए। मेरी लाडो एक बार घर तो देख जाती -इधर, नवजात की मौत के बाद मां की हालत नाजुक बनी हुई है। घर में महिलाएं रो रही है लेकिन बालिका की मां को इस बात की भनक नहीं लगने दी की बालिका का शव आ चुका है। नवजात बालिका की दादी का रो रोकर बुरा हाल था, वह बार बार यही कह रही थी कि मेरी लाडो एक बार तू अपने घर तो आ जाती, तूने तो घर की चौखट भी नहीं देखी, एेसी क्या गलती हुई हमसे जो तु हमसे रूठकर चली गई। मेरी लाडो तू एक बार लौट आ।
मृतका नवजात बालिका के पिता राहुल ने बताया कि उसके परिवार में ६७ साल बाद एक बेटी का जन्म हुआ है। उसके पिता के कोई बहन नहीं थी, उसकी भी कोई बहन नहीं है। दो बड़े भाई है़ उनके भी एक एक बेटा है। पहली बार बाबा ने अपनी दादी का मंूह देखा था।

Kailash Reporting
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