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खुलकर बोले उद्यमी : मॉडल औद्योगिक क्षेत्र बने भिवाड़ी

साल में 15 हजार करोड़ का राजस्व, अनदेखी कर रही सरकार

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अलवर

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kailash Sharma

Apr 18, 2024


साल में 15 हजार करोड़ का राजस्व, अनदेखी कर रही सरकार
भिवाड़ी. अब समय आ गया है कि भिवाड़ी उद्योग क्षेत्र को एक मॉडल के रूप में पेश किया जाए। इसके लिए राज्य और केंद्र सरकार को साझा रूप से योजना तैयार करनी होगी। बुधवार को पत्रिका की ओर से आयोजित चौपाल में यह विचार उद्यमी और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने रखे। लोग औद्योगिक क्षेत्र के रूप में जो चर्चा गुरुग्राम, नोएडा की करते हैं, हमें उससे भी अच्छा विकास करना होगा। अभी हमारे पास समय है। आबादी सीमित है, निर्माण कम हुए हैं अभी क्षेत्र की दिशा व दशा को आसानी से सुधारा जा सकता है। क्षेत्र का विस्तार होने पर उसमें सुधार की गुंजाइश नहीं बचेगी।
उद्यमियों ने कहा कि चुनाव और मतदान से लोकतंत्र सशक्त होता है, उद्यमियों के मेहनत, परिश्रम एवं प्रयासों से देश निखरता है। उद्यमी फैक्ट्री के अंदर जो उत्पादन करते हैं वह देश के विकास में सहायक होता है। भिवाड़ी प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है। औद्योगिक क्षेत्र की गरिमा को ध्यान में रखते हुए विकास कार्य होने चाहिए। औद्योगिक क्षेत्र 20 किमी की लंबाई-चौड़ाई में फैल चुका है। विदेशों से लोग यहां आयात-निर्यात के सिलसिले में आते हैं, जब वह औद्योगिक क्षेत्र में अंदर प्रवेश करते हैं तो माहौल बहुत ही निराशाजनक होता है। सडक़ों की स्थिति खराब होती है। पौधारोपण नहीं होता। धूल मिट्टी उड़ती दिखती है। औद्योगिक क्षेत्र में अंदर जाने के बाद एक निराशा की स्थिति आती है। अगर सरकार ध्यान दे और जरूरी विकास कार्य कराए तो स्थिति बदल सकती है, उद्यमियों को औद्योगिक क्षेत्र में एक सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण दिया जा सकता है।
क्षेत्र में एक हजार ट्रांसपोर्ट कारोबारी है, उनके लिए अभी तक ट्रांसपोर्ट नगर नहीं बसाया गया है। डंङ्क्षपग साइट पर कचरा निस्तारण के लिए ठोस कार्ययोजना नहीं है। चौपानकी, पथरेड़ी, खुशखेड़ा, कारोली क्षेत्र में गंदे पानी की समस्या आने लगी है, इसके निस्तारण के लिए सीईटीपी प्लांट नहीं है। बिजली का तंत्र कमजोर है। अतिरिक्त भार चलता रहता है जिससे आए दिन फॉल्ट और ट्रिङ्क्षपग होती है।
औद्योगिक इकाइयों को विभिन्न प्रकार की अनुमति लेनी होती है, इसके लिए एक विभाग से दूसरे में भटकना पड़ता है। इसके लिए ङ्क्षसगल ङ्क्षवडो सिस्टम होना चाहिए। रिप्स योजना का लाभ समय पर नहीं मिलता। इसकी बैठक भी नियमित नहीं होती।
जिला स्तरीय विवाद एवं शिकायत निवारण तंत्र (डीआरएम) की बैठक नियमित नहीं होती। उद्योगों को लेकर स्पष्ट दिशा निर्देशों का अभाव देखा जाता है।

सेक्टर प्रभारी ने अति संवेदनशील मतदान केंद्रों का किया निरीक्षण
थानागाजी ञ्च पत्रिका. लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र दौसा में 19 अप्रेल को होने वाले मतदान को लेकर सेक्टर प्रभारी रामशरण मीना ने विधानसभा क्षेत्र थानागाजी के अति संवेदनशील बूथों का निरीक्षण किया। पुलिस जाप्ते के साथ व्यवस्थाओं का जायज लिया। निरीक्षण के दौरान सेक्टर प्रभारी रामशरण मीणा ने बूथ संख्या 102 राउमावि क्यारा पर बीएलओ सत्यनारायण पारीक से बूथ की जाली, खिडक़ी, दरवाजे, रैंप, विद्यालय की चारदीवारी, पानी बिजली की समस्त व्यवस्थाओं का जायजा लिया। अति संवेदनशील बूथ स्थल होने पर गांव एवं गांव की स्थिति तथा ग्रामीणों की मानसिक स्थिति का जायजा लेते हुए शांतिपूर्ण मतदान करवाने के निर्देश दिए। ग्रामीणों से मिलकर शांतिपूर्ण तरीके से अधिक से अधिक मतदान का आह्वान किया। भय मुक्त वातावरण के साथ शांतिपूर्ण मतदान के लिए ग्रामीणों को प्रेरित किया।