राजस्थान के उस स्वतंत्रता सेनानी की कहानी, जिससे भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद ने बम बनाने का प्रशिक्षण लिया था

राजस्थान के उस स्वतंत्रता सेनानी की कहानी, जिससे भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद ने बम बनाने का प्रशिक्षण लिया था

Lubhavan Joshi | Updated: 15 Aug 2019, 02:08:52 PM (IST) Alwar, Alwar, Rajasthan, India

Freedom Fighters Of India In Alwar : इस स्वतंत्रता सेनानी से मिलने सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद आते थे।

अलवर. Freedom Fighters Of India In Alwar : देश आज स्वतंत्रता दिवस ( indepencence day 2019 ) मना रहा है। सभी देशभक्ति से सारोबार हैं। देश को आजादी दिलाने वाले स्वतंत्रता सेनानियों, शहीदों और क्रांतिकारियों को याद किया जा रहा है। देश की स्वाधीनता में प्रदेश के अलवर जिले के राठ क्षेत्र का भी देश की आजादी में अपना अहम योगदान है। देश को आजाद कराने में अपनी महत्तवर्पूण भूमिका निभाने वाले महान क्रांतिकारी योद्धा अंग्रेज सरकार से मुकाबला करने के दौरान बहरोड़ में आकर शरण लेते थे और यहां रह कर देश को आजाद कराने के लिए गुप्त चर्चा कर योजनाएं बनाने के साथ यहां हथियार चलाने का अभ्यास करने के साथ बम बनाने का प्रयोग भी करते थे। यहां के निवासी पïण्डित विशंभरदयाल ने अग्रेजों के ऊंचे पदों को ठुकरा कर देश की आजादी के लिए अपना योगदान देने का काम किया।

बहरोड़ का यह महान क्रांतिकारी 1931 में देश के लिए शहीद हो गया। बहरोड़ के सबलपुरा मोहल्ला निवासी शहीद पंडित विशंभरदयाल भी अंग्रेजों के समय क्रांतिकारी रहे। सबलपुरा में पंडित के साथ क्रांतिकारी सुभाष चन्द्र बोस, भगतसिंह, राजगुरु सुखदेव, चन्द्रशेखर आजाद यहां आते थे। पंडि़त का जन्म 1893 में हुआ था। सबलपुरा मोहल्ले में हुआ।

पंडि़त की योग्यता स्नातक थी। पंडित अपने जीवनकाल में अविवाहित रहे। 19 साल की उम्र में सन 1912 में क्रांतिकारी बने व देश के लिये लड़ते लड़ते सन 1931 में शहीद हो गए थे।

 

Freedom Fighters Of India Came Behror Alwar For Making Bomb

चंद्रशेखर आजाद ने अलवर में ही लिया था बम बनाने का प्रशिक्षण

स्वतंत्रता आंदोलन में क्रांतिकारी भूमिका निभाने चंद्रशेखर आजाद का राजस्थान के अलवर जिले से गहरा नाता रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान एक बार बहरोड़ के सबलपुरा गांव में आजाद के आने का जिक्र सबलपुरा गांव के लोग करते हैं। चंद्रशेखर आजाद का अलवर जिले से जुडाव के पीछे सबलपुरा निवासी पं. विशम्भर दयाल शर्मा से उनकी दोस्ती बताया जाता है। यहां उन्होंने बम बनाने का प्रशिक्षण लिया था।

अलवर जिले के बहरोड़ कस्बे का सबलपुरा मोहल्ला पूर्व में एक गांव था। इसी गांव में पं. विशम्भर दयाल शर्मा रहते थे। पिता की मृत्यु के बाद उनके दादा विशम्भर दयाल शर्मा को दिल्ली ले गए। शर्मा के दादा उन दिनों दिल्ली में गाडोलिया बैंक में नौकरी करते थे। दिल्ली में रहते विशम्भर दयाल शर्मा ने बीएससी परीक्षा पास की और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ गए, लेकिन क्रांतिकारी विचारों के चलते वे नरम दल के बजाय क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आजार, सरदार भगतसिंह, सुखदेव, रामप्रसाद विस्मिल के सम्पर्क में आए। वर्ष 1912 में दिल्ली में वायसराय लार्ड हेस्टिंग के जुलूस पर बम फेंकने की घटना हुई। इसमें वायसराय तो बच गए, लेकिन उनका महावत मारा गया। इस घटना में विशम्भर दयाल शर्मा भी शामिल रहे। इस कारण अंग्रेज शासन की सीआईडी और पुलिस पं. विशम्भर दयाल शर्मा के पीछे लग गई। बाद में वे रिवोशनरी सोशलिस्ट पार्टी के सदस्य बन गए और चन्द्रशेखर आजाद व भगतसिंह के सम्पर्क में आए। बाद में गाडोलिया बैंक लूट की घटना हुई, उसमें भी शर्मा की संलिप्तता मानी गई।

इसी दौर में पं. विशम्भर दयाल शर्मा के साथ चन्द्रशेखर आजाद व भगतसिंह आदि क्रांतिकारी बहरोड़ के गांव सबलपुरा आए। उन्होंने यहां बम बनाए एवं बम बनाने आदि गतिविधियों का प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण के दौरान एक बम फूट गया, जिससे सबलपुरा गांव स्थित हवेली का एक हिस्सा ढह गया। हवेली का वह ढहा हिस्सा आज भी कायम है। बाद में काकोरी केस में फंसे भगतसिंह, सुखदेव आदि को जेल से बाहर निकालने की उन्होंने योजना तैयार की, लेकिन वह सफल नहीं हो पाई और 24 दिसम्बर 1931 को पं. विशम्भर दयाल शर्मा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने पुलिस गिरफ्त में अपने जख्म पर लगे टांकों को फाड़ दिया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई।

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