भंवर म्हाने पूजन दो गणगौर, सहेलिया जोह बांट

महिलाओं का लोकप्रिय पर्व गणगौर २० मार्च को परंपरागत रूप से उत्साह व उमंग के साथ मनाया जाएगा।

By: Prem Pathak

Published: 13 Mar 2018, 10:11 PM IST

महिलाओं का लोकप्रिय पर्व गणगौर २० मार्च को परंपरागत रूप से उत्साह व उमंग के साथ मनाया जाएगा। इससे एक दिन दिन महिलाएं गणगौर के रूप में शिव व पार्वती की पूजा करती हैं। नवविवाहिताएं इन दिनो बड़ी उमंग के साथ गणगौर की पूजा अर्चना कर रही है।

राजस्थान परंपरा में गणगौर की पूजा हर महिला के लिए आवश्यक मानी गई है। भले ही आज की युवतियां उच्च शिक्षित हो गई हो, यहां की बहुएं घर के काम के साथ नौकरी कर रही हो । लेकिन इन सबके बावजूद वो गणगौर की पूजा करना नहीं भूली हैं।


नव विवाहिताओं के लिए पहली गणगौर है खाससागर ऊपर निवासी प्रीति पंडित ने बताया कि उनकी बहन की इस साल पहली गणगौर है। पहली गणगौर बडे़ शौक से पूजी जाती है। इसलिए प्रतिदिन सुबह सामूहिक पूजा की जाती है। नर्सिंग कर्मचारी पूर्णिमा शर्मा ने बताया कि उनकी शादी इसी साल हुई है, परंपराओं को ध्यान में रखकर सौलह दिन की गणगौर पूज रही है। इसके लिए नौकरी पर जाने से पहले जल्दी ही गणगौर की पूजा करती हैं।

गणगौर की झारी निकालने के लिए भी बहुत तैयारी की है। इस दिन पूरा श्रृंगार कर झारी निकालेंगी। बडेरिया पाड़ी निवासी जया शर्मा ने बताया कि उनकी शादी दिसंबर माह में हुई है। गणगौर पूजा के लिए पीहर आई हुई हैं। अलवर में राज परिवार भी गणगौर की सवारी निकालता है।

गणगौर पर सागर जलाशय पर उत्सव का माहौल बनता है। इस दिन सिटी पैलेस से गणगौण की सवारी बैंड बाजे के साथ निकाली जाती है जो सागर जलाशय पहुंचती है। गणगौर से एक दिन पहले 19 मार्च को सिंजारे का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन नव विवाहिताओं के ससुराल से उपहार व मिठाईयां आती हैं। गणगौर के दिनों में शाम को महिलाएं झारी निकाल रही हैं। गणगौर राजस्थान का प्रसिद्ध पर्व है जो किसी और प्रदेश में नहीं मनाया जाता है।

Prem Pathak Reporting
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