मां को ले गया लालची मालिक, बछड़े की जिम्मेदारी युवाओं ने सम्भाली

-टूटे पैर पर प्लास्तर कर चलने लायक बनाया

 

अलवर.

अपनाघर आश्रम में जिस तरह अपनों से दूर बुजुर्गों की सार-संभाल होती है ठीक वैसे ही बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय में लावारिस पशुओं की देखभाल भी होने लगी है। यह काम कोई सरकार या प्रशासन नहीं बल्कि करीब एक दर्जन गे्रजुएट युवाओं की टीम मिलकर कर रही है। पशु चिकित्सालय की केवल जगह हैं। हाल में यहां तीन दिन का बछड़ा जिसके दोनों पैर टूटे हैं। प्लास्टर बांधने के बाद चलने लगा है। दूध के लालच में बछड़े की मां पशु मालिक के पास हैं। करीब 8 अंधे पशु है। जिनको समय पर चारा और बीमार होने पर दवा दी जाती है। एक दर्जन पशु ऐसे हैं जिनके चार में से तीन पैर हैं। किसी का आधा पैर तो किसी का पूरा पैर ही नहीं है। आधा दर्जन पशु ऐसे हैं जिनकी चमड़ी जल चुकी है। यहां इलाज मिला तो नई चमड़ी आने लगी है। सबके अलग-अलग बाड़े हैं।

2 हजार से ज्यादा पशु ठीक कर चुके

युवाओं की टीम पिछले करीब पांच साल में तीन हजार पशुओं का इलाज कर चुकी है। इलाज के बाद पशुओं को कांजी हाउस भेजा जाता है। फिर वहां जाने के बाद प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। इतनी बड़ी संख्या में पशुओं का इलाज करने में उनकी सबसे बड़ी मदद हाइड्रोलिक एंबुलेंस ने की है। जिससे पशु को लाने में आसानी होती है। एंबुलेंस में लिफ्ट, ट्रॉली, जैक है। जिसकी मदद से पशुओं को उठाया जाता है।

युवाओं की टीम में महेन्द्र सैनी, विपिन योगी, हेमन्त मीणा, लवनीश सैनी, परशुराम शर्मा, डॉ. राकेश सक्सेना, हेमन्त गुप्ता, तारेश, रवि सैनी, धर्मेन्द्र कुमावत, रमेश, धीरज गुप्ता, अर्जुन बैरवा, मनोज मीणा व दीपू सैनी सहित कई अन्य युवा भी हैं। ये सब ग्रेजुएट हैं। नौकरी व खुद का काम करते हैं। इसके अतिरिक्त कुछ घण्टे नियमित देते हैं। इनके अलावा गौ जीव परमार्थ सेवा संस्था को आमजन का सहयोग मिलता है। जिससे पशुओं की दवा, चारा व अन्य व्यवस्थाएं की जाती हैं।

Dharmendra Yadav
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