अब सरकारी नियम पड़ रहे गोशालाओं पर भारी, इस वजह से गौमाता का पेट भरना हो रहा है मुश्किल

सरकार के कुछ नियम गौमाता के लिए मुश्किल खड़ी कर रहे है। परेशानी यह है कि इन नियमों की वजह से गौमाता का पेट भरना तक भारी पड़ रहा है।

By: Jyoti Sharma

Published: 15 Jan 2018, 04:01 PM IST

अलवर. राज्य सरकार ने भले ही गो सेवा व उसका पेट भरने के लिए गोपालन विभाग बना दिया हो, गोमाता के नाम पर स्टांप डयूटी में सेस लिया जा रहा हो। लेकिन इसके बावजूद जिले में चल रही गौशालाओं में रहने वाली गो माता का साल भर पेट भरना मुश्किल हो रहा है। इसकी वजह है गोपालन विभाग की ओर से बनाए गए कठोर नियम। जिसमें गो माता की संख्या 200 होने या फिर तीन माह का ही बजट दिए जाने की अनिवार्यता रखी गई है।

राज्य में शुरू हुई प्रक्रिया, अलवर में अटकी

गोपालन विभाग की ओर से राज्य भर में संचालित गौशालाओं में 10 जनवरी से सर्वे की प्रक्रिया शुुरू हो चुकी है। जो कि 20 जनवरी तक चलेगी। 23 जनवरी को रिपोर्ट तैयार की जाएगी। 25 जनवरी को यह रिपोर्ट विभाग के मुख्यालय को भेजी जाएगी। इसके बाद 5 फरवरी तक तक गौशाला संचालक सहायता राशि के लिए आवेदन कर सकेंगे। इसके लिए सक्षम पदाधिकारी की ओर से श्पथपत्र भी देना होता है। आवेदन जमा होने के दस दिन बाद तहसीलदार और पशु चिकित्सक गौशाला संचालक की ओर से संयुक्त भौतिक सत्यापन किया जाएगा। अलवर में उपचुनाव के चलते इस बार प्रक्रिया शुरू ही नहीं हो पाई है।

पंजीकरण के लिए 200 गोवंश की अनिवार्यता

गोपालन विभाग की ओर से दी जाने वाली यह सहायता उन्हीं गोशालाओं को मिलती है जो कि पशुपालन विभाग में पंजीकृत है। पंजीकृत होने के लिए गोशालाओं में 200 गोवंश होने जरूरी है। यदि गोवंश की संख्या कम है तो पंजी करण नहीं किया जाता है । ऐसे में जिन गांवों में चलने वाली गोशालाओं को परेशानी होती है क्योंकि यहां लोग घरों में गो माता को रखते हैं जो गोशाला में जाती है वो मजबूरी में जाती है।

बजट के बाद क्या खाएंगी

गो पालन विभाग की ओर से प्रतिवर्ष 90 दिन के लिए गोशालाओं व कांजी हाउस में रहने वाले गौवंश के लिए बजट दिया जाता है। इसमें 2 साल से छोटे पशु के लिए 16 रुपए और इससे बड़े पशु के लिए 32 रुपए दिए जाते हैं। यह बजट साल में एक बार जनवरी से मार्च तक के लिए ही दिया जाता है। पहले यह सहायता 45 - 45 दिन के अंतराल पर दी जाती थी लेकिन अब यह 90 दिन में एक मुश्त दी जाती है।

कम से कम 9 माह का खर्चा दे विभाग

बहरोड के समीप जखराना में गोशाला चलाने वाले रमाकांत तिवाड़ी ने बताया कि मेरी गोशाला में अभी 30 गो माता है। मुझे कोई सरकारी सहायता नहीं मिल रही है। जिन गोशालाओं में संख्या कम है उनको यदि मदद मिलती है तो अधिक लोग गोसेवा से जुडेंगे। तीन माह का बजट देने से कुछ नहीं होता कम से कम 9 महिने का बजट दिया जाना चाहिए।

Show More
Jyoti Sharma
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned