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आंगनबाड़ी केंद्रों में कैसे आएंगे नौनिहाल, सीलन और बदबू से बैठना हुआ मुश्किल

अलवर. बारिश का मौसम शुरू हो चुका हैं। ऐसे में आंगनबाड़ी केंद्रों के हाल खराब है। सरकार को बदले हुए छह माह से अधिक हो चुके हैं लेकिन केंद्रों के हालात आज भी जैसे के तैसे ही बने हुए हैं। ज्यादातर आंगनबाड़ी केंद्र कच्ची बस्तियों में कोठरी में संचालित हो रहे हैं। बारिश के चलते […]

अलवरJun 29, 2024 / 06:59 pm

Jyoti Sharma

अलवर. बारिश का मौसम शुरू हो चुका हैं। ऐसे में आंगनबाड़ी केंद्रों के हाल खराब है। सरकार को बदले हुए छह माह से अधिक हो चुके हैं लेकिन केंद्रों के हालात आज भी जैसे के तैसे ही बने हुए हैं। ज्यादातर आंगनबाड़ी केंद्र कच्ची बस्तियों में कोठरी में संचालित हो रहे हैं। बारिश के चलते इन कोठरियों में बैठना मुश्किल है। ज्यादातर आंगनबाड़ी केंद्रों में सीलन और बदबू है जिसके चलते यहां पर नौनिहाल रूक ही नहीं पाते हैं। इसके चलते आंगनबाड़ी केंद्र खाली ही पडे़ हुए हैं। राजस्थान पत्रिका ने शनिवार को शहर के आंगनबाड़ी केंद्रों की वास्तविक िस्थति का जायजा लिया तो हालात बहुत खराब मिले।

किराए के भवन में चल रहे हैं आंगनबाड़ी केंद्र

गौरतलब है कि आंगनबाड़ी केंद्र के किराए में पिछले दस सालों से कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। शहर के आधे से ज्यादा केंद्र किराए के भवन में संचालित किए जा रहे हैं। पूर्व सरकार ने केंद्रों का किराया बढ़ाने के लिए केंद्रों का नक्शा भी तैयार करवाकर विभाग को जमा करवा दिया लेकिन इसके आज तक किराया नहीं बढ़ाया है।

जर्जर केंद्र वह भी सीलन से भरा हुआ

गोपाल टाकीज पेट्रोल पंप का आंगनबाड़ी केंद्र पिछले कई सालों से इस जर्जर और पुराने मकान में चल रहा है। केंद्र के बाहर आंगनबाड़ी केंद्र का बोर्ड तक नहीं है । शनिवार को बारिश के दौरान केंद्र के अंदर सीलन थी। अंदर का कमरा पूरी तरह से जर्जर था। ऐसे में यहां बैठना मासूमों के लिए मुश्किल था। केंद्र के बाहर ही आवारा पशुओं का जमावड़ा था। जिससे बच्चों को भी हर समय खतरा रहता है।

टीनशेड की कोठरी में चल रहा केंद्र, गाय का तबेला भी है यहां

आंगनबाड़ी केंद्र नयाबास के हाल बहुत खराब मिले। यहां एक छोटे से टीनशेड की कोठरी में केंद्र का संचालन किया जा रहा है। इसके समीप ही एक टीनशेड के नीचे गाय और बछडे़ भी बंधे हुए थे। कोठरी इतनी छोटी है कि यहां पर पोषाहार, गैस का सामान भी रखना मुश्किल है। सालों से इसी हालात में केंद्र चल रहा है। बारिश के मौसम में यहां एक मिनट भी रूकना मुश्किल है।पास में ही गाय के गोबर की दुर्गंध आती रहती है।

अलग से भ्ररना पड़ रहा है बिजली का बिल

आंगनबाड़ी केंद्र भैरू का चबूतरा पर कार्यकर्ता रजिस्ट्रेशन में पोषाहार का विवरण भर रही थी। इस केंद्र के हालत अन्य केंद्रों से सहीं थे। कार्यकर्ता ने बताया कि सालों बीतने के बाद भी किराया नहीं बढ़ाया है। मात्र साढे सात सौ किराए में अच्छा कमरा नहीं मिलता है। इसलिए बिजली का बिल अपनी जेब से दे रहे हैं। किराया बढ़ जाए तो अच्छा कमरा मिल सकता है।

फैक्ट फाइल

जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों की संख्या – 3435शहर में संचालित केंद्र                         154

मिनी आंगनबाड़ी केंद्र                         4शहर में किराए के भवन में चल रहे केंद्र 150

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