हरियाणा ने रोकी जिले में अवैध खनन पर कार्रवाई की चाल, सिकुड़ रहा पहाडि़यों का सीना

हरियाणा ने रोकी जिले में अवैध खनन पर कार्रवाई की चाल, सिकुड़ रहा पहाडि़यों का सीना
खुद खान विभाग भी स्वीकारता है कि नाखनोल व बालोज जैसे क्षेत्रों में अवैध खनन पर रोक में हरियाणा का सहयोग अपेक्षित नहीं रह पाया है।

Rajeev Goyal | Updated: 21 Aug 2017, 05:02:00 PM (IST) alwar

खुद खान विभाग भी स्वीकारता है कि नाखनोल व बालोज जैसे क्षेत्रों में अवैध खनन पर रोक में हरियाणा का सहयोग अपेक्षित नहीं रह पाया है।

अलवर.

अरावली पर्वतमाला से घिरे अलवर जिले के लिए नासूर बने अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई की चाल को हरियाणा ने कुंद कर दिया है। जिले के नाखनोल व बालोज सहित कई एेसे क्षेत्र हैं, जहां खुलेआम अवैध खनन किया जा रहा है, लेकिन राजस्थान सरकार की वहां तक पहुंच हरियाणा की रजामंदी बिना संभव नहीं है। खुद खान विभाग भी स्वीकारता है कि नाखनोल व बालोज जैसे क्षेत्रों में अवैध खनन पर रोक में हरियाणा का सहयोग अपेक्षित नहीं रह पाया है।

 

खान विभाग की ओर से वर्तमान में जिले में २५५ खान संचालित की जा रही हैं, लेकिन बाजार तक पहुंच रहा खनिज गवाह है कि जिले में वैध खानों से कई गुना ज्यादा खनन कार्य हो रहा है। जिले में अवैध खनन के लिए तिजारा उपखंड तो पहले से ही कुख्यात रहा है, वहीं अन्य क्षेत्र भी इससे अछूते नहीं रहे। सरकार का दावा तो जिले में ९० प्रतिशत अवैध खनन रोकने का है, लेकिन राजगढ़, रैणी, बानसूर, रामगढ़, बहरोड़, मुण्डावर जैसे क्षेत्र भी इस समस्या से अछूते नहीं है। खान, वन, पुलिस व प्रशासन की ओर से अवैध खनन पर रोक के लिए यदा-कदा जिले में कार्रवाई होती रही है, लेकिन परिणाम कुछ दिनों तक अवैध खनन बंद रहने तक ही सिमटे रहे। सबसे बड़ी समस्या उन क्षेत्रों में आई जहां का रास्ता ही दूसरे प्रदेशों से होकर निकलता है।

 

नाखनोल व बालोज का रास्ता हरियाणा से


जिले के नाखनोल व बालोज जैसे गांवों का रास्ता हरियाणा से निकलता है। इन गांवों में जाने से पहले हरियाणा की सीमा में प्रवेश करना होता है, फिर हरियाणा के रास्तों से होकर इन गांवों तक पहुंचा जा सकता है।

 

अंतरराज्यीय कार्रवाई के दौरान एक प्रदेश के अधिकारियों को कार्रवाई से पूर्व दूसरे राज्य के संबंधित अधिकारियों को सूचना देनी होती है। तभी उस प्रदेश की सरकार का कार्रवाई में सहयोग संभव हो पाता है। यही कारण है कि दूसरे प्रदेशों में अवैध खनन जैसी कार्रवाई पर रोक संभव नहीं है। ज्यादातर तो अलवर जिले की टीम नाखनोल व बालोज जैसे गांवों में कार्रवाई से परहेज करती है। यदि कभी योजना बनती भी है तो हरियाणा प्रशासन का सहयोग लेने के फेर में कारगर नहीं हो पाती। कारण है कि इन गांवों में अवैध खनन करने वालों में ज्यादातर लोग हरियाणा प्रदेश के हैं और वहां के प्रशासन की किन्ही भी कारणों के चलते उनसे सहानुभूति भी रही है। एेसे में राजस्थान प्रदेश की टीम ज्यादातर बार खाली हाथ ही लौटी है।

 

बहरोड़ क्षेत्र भी अछूता नहीं


बडऱ्ोद में नला के मन्दिर के पास स्थित कालरी पहाड़ी की तलहटी पर अवैध खनन हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कालरी पहाड़ी की कंक्रीट मिट्टी भवनों के भरत में अच्छी होने से प्रतिदिन सैकड़ों ऊट गाडिय़ों, ट्रैक्टरों से लाल पहाड़ी की कंक्रीट मिट्टी का अवैध तरीके से खनन किया जा रहा है। क्षेत्र में रेवाणा व अन्य स्थानों पर भी अवैध खनन पर रोक लग पाना अभी शेष है।

 

आसान नहीं कार्रवाई


अवैध खनन से तिजारा उपखंड नहीं, बल्कि पूरा जिला ही परेशान हैं। अवैध खनन के लिए पहाड़ों में अवैध तरीके से ब्लास्टिंग करने से आबादी क्षेत्र में कम्पन पैदा होने एवं पत्थरों के घरों व स्कूल परिसर में गिरने से कई बार दुर्घटना भी हो चुकी हैं। राजगढ़ क्षेत्र जिरावली व मूनपुर गांवों की पहाडि़यों में ब्लास्टिंग कर अवैध खनन किया जा रहा है।

 

ग्रामीणों का कहना है कि ब्लास्टिंग की आवाज इतनी तेज होती है कि पूरा गांव थर्रा जाता है। वहीं, कई बार स्कूल परिसर में पत्थर आकर गिरते हैं। इसके अलावा राजगढ़ व रैणी क्षेत्र में सुरेर, खरखड़ा, काली पहाड़ी, झांकड़ा, भेडोली, खोहरा चौहान खुर्द, धौराला, माचाड़ी, ईशवाना आदि गांवों में अवैध खनन कर खुले आम पहाडि़यों से पत्थर निकाला जा रहा है। इसके अलावा श्रीचन्दपुरा, नांगल धर्मू सहित अनेक गांवों की पहाडिय़ों की तलहटियों में अवैध रूप से जेसीबी से खनन कर ग्रेवल ले जाने का कार्य किया जा रहा है।

 

अलवर जिले के नाखनोल, बालोज व कई अन्य गांवों का रास्ता हरियाणा से होकर निकलता है। इस कारण वहां अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई में थोड़ी परेशानी आती है। कई बार हरियाणा प्रशासन का सहयोग भी नहीं मिल पाता। वैसे पूर्व में कई बार जिले की टीम ने वहां कार्रवाई की भी है।
केसी गोयल, खनि अभियंता अलवर

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