सूचना नहीं देने में जयपुर सबसे आगे, हनुमानगढ़ सबसे पीछे

सूचना का अधिकार अधिनियम को लागू हुए 12 साल हो गए हैं लेकिन प्रदेश के सरकारी विभागों के अधिकारियों को इसकी कतई परवाह नहीं है।

By: Dharmendra Adlakha

Published: 04 Jan 2018, 01:36 PM IST

अलवर. सूचना का अधिकार अधिनियम को लागू हुए 12 साल हो गए हैं लेकिन प्रदेश के सरकारी विभागों के अधिकारियों को इसकी कतई परवाह नहीं है। प्रदेश में सूचना समय पर नहीं देने पर सूचना आयोग की ओर से कार्रवाई होने के मामले में जयपुर जिला पहले स्थान पर है जबकि कोटा इस मामले में सबसे पीछे है।

सूचना आयोग की ओर से माह जनवरी 2017 से माह अक्टूबर तक 10 माह की अवधि में सूचना नहीं देने पर जुर्माना देेने वाले जिलों में जयपुर जिला अव्वल है जिस पर 103 पर जुर्माना लगा है। इसी प्रकार अलवर जिले पर 47 बार , जोधपुर तीसरे नम्बर पर है जिस पर 29 बार जुर्माना लगा है। इसी प्रदेश में सिरोही पर 27 बार जुर्माना लगा है जबकि हनुमानगढ़ पर मात्र 1 ही बार जुर्माना लगा है।

राज्य सूचना आयोग से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस अवधि में सीकर पर 7 बार, दौसा पर 6, धौलपुर पर 2, झालावाड़ 6, टोंक पर 7 तथा बाड़मेर पर 21 बार जुर्माना लगाया गया है। इसी प्रकार बाड़मेर पर 21, सिरोही पर 27, चुरू पर 4, जालौर पर 10, चित्तौडग़ढ़ जिले पर 11 बार, सवाईमाधोपुर पर 7 बार जुर्माना लगा है। सूचना आयोग ने जोधपुर पर 29, कोटा पर 5, जयपुर पर 103, जैसलमेर पर 28, पाली पर 10 व बीकानेर पर 19 बार जुर्माना लगाया है। इधर, पाली पर 10, बीकानेर 19, बंूदी पर 5, करौली पर 8, श्रीगंगानगर पर 7, डूंगरपुर पर 2, उदयपुर पर 14, भीलवाड़ा पर 10, झुंझुनू पर 8, राजसमंद पर 3, नागौर प 3, बांसवाड़ा पर 2, अजमेर जिले पर 13 बार जुर्माना लगाया गया है।

सूचना आयोग ने बारा जिले पर 4, हनुमानगढ़ पर 1 तथा अलवर जिले पर 47 बार जुर्माना लगाया है।
सूचना आयोग की ओर से सम्बन्धित विभागीय सूचना अधिकारियों पर पेनल्टी और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए भी लिखा गया है।

 

आयोग ने समय पर सूचना नहीं देने पर 250 रुपए से 25 हजार रुपए तक का जुर्माना किया है। विभाग ने 2016 वर्ष में 8 लाख 27 हजार रुपए का जुर्माना किया था जबकि दर्ज परिवारों की संख्या 612 थी।

पंचायती राज जुर्माना में अव्वल-


प्रदेश में सबसे अधिक जुर्माना देने वाले विभागों में पंचायती राज विभाग अव्वल नम्बर पर है जबकि दूसरे नम्बर पर स्थानीय निकाय संस्थाएं हैं। आयोग को कई बार वर्षों बाद भी यह जुर्माने की राशि नहीं मिल पाती है। प्रदेश में समय पर सूचना नहीं देने पर सूचना आयोग में अपील करने वालों की संख्या का आकंडा प्रति वर्ष बढ़ता जा रहा है। इस सम्बन्ध में आरटीआई कार्यकर्ता दीपेन्द्र आर्य ने सूचना आयोग से सभी तथ्य एकत्रित किए हैं।

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