करंट के बीच से फटटा लगा निकालते है दलाल, जान दाव पर लगा करते है सीमा पार

गलती से तार छिटक गया या लकड़ी टूट गई तो करंट से जान जाना तय

By: Prem Pathak

Published: 25 Apr 2018, 01:49 PM IST

करंट लगे तारों के बीच में फट्टा लगाकर निकाल रहे

अलवर. बांग्लादेश का बॉर्डर दलालों के कब्जे में है।तभी तो तीन से पांच हजार रुपए में आसानी से बॉर्डर पार होकर बांग्लादेशी इतनी बड़ी संख्या में देश में घुस रहे हैं। जबकि बांग्लादेश बॉर्डर पर तारबंदी में करंट भी रहता है।फिर भी दलाल इस घुसपैठ को अंजाम दे रहे हैं। ऐसा खुद बांग्लादेशियों ने भारत की गुप्तचर एजेंसियों को जानकारी दी है।
राजस्थान पत्रिका ने माजरी में बांग्लादेशियों के होने की एक्सक्लूसिव खबर प्रकाशित की तो अब यह परतें उखड़ रही हैं। उल्लेखनीय हैकि एक ही दिन में 250 से 300 से अधिक बांग्लादेशी अलवर जिले व आसपास चिह्नित किए गए हैं।इससे अंदाजा लगाया जा सकता हैकि राजस्थान, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, बिहार व पश्चिमी बंगाल सहित देश भर में कितनी संख्या में होंगे।सबको चिह्नित कर पकडऩा बड़ा मुश्किल है।

फैक्ट फाइल

माजरी से पकड़े - 33 बांग्लादेशी
हरियाणा निकले- करीब 200 संदिग्ध
बानसूर में पकड़े - 10 बांग्लादेशी
भिवाड़ी में चिह्नित - 70 बांग्लादेशी
नीमकाथाना में चिह्नित - करीब 60 बांग्लादेशी

जान जोखिम में

बॉर्डर पर तारबंदी में करंट होता है। दलाल तारबंदी के बीच लकड़ी का फट्टा फंसाते हैं। फिर दूसरी लकड़ी से एक तार को और अधिक ऊपर करते हैं। फिर इसके बीच में से निकल आते हैं। गलती से तार छिटक गया या लकड़ी टूट गईतो करंट से जान जाना तय है।ऐसा भी होता रहता है। इसके बावजूद भी बांग्लादेशी जान जोखिम में डालकर निकल आते हैं। रोहिंग्या मुसलमानों की घुसपैठ के बाद गुप्तचर एजेंसी अधिक सक्रिय हुई हैं। इसके बावजूद भी देश में इस तरह बांग्लादेशियों का घुसकर आना सुरक्षा पर बडा सवालिया निशान है।

पश्चिमी बंगाल के कूच बिहार बॉर्डर से आ रहे

माजरी में एक ही दिन 33 संदिग्ध बांग्लादेशियों को पकडऩे के बाद जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय की स्पेशल टीम ने जांच पड़ताल की।जिसमें यह सामने आ गया कि अधिकतर बांग्लादेशी पश्चिमी बंगाल के कूच बिहार की तरफ वाले बॉर्डर को पार करके भारत आ रहे हैं।भारत की सीमा में घुसते ही पहले पश्चिमी बंगाल में इधर-उधर घूमते रहते हैं। इधर, माजरी व बहरोड क्षेत्र में कई ईँट भट्टों पर पुलिस पहुंची और भट्टा संचालकों से जानकारी जुटाई। कार्रवाई के डर से ईंट-भट्टों पर मजदूरों की संख्या कम दिखाई दी।

दलालों के जरिए दूसरे राज्यों में

बांग्लादेश से बॉर्डर पार करने के बाद ईंट-भट्टे, निर्माण कार्य सहित फैक्ट्रियों में काम करने के लिए स्थानीय दलालों के जरिए ये अलग-अलग राज्यों में पहुंच जाते हैं। वहां कुछ समय अस्थाई रूप से ठहरते हंैं। धीरे-धीरे स्थानीय भाषा को पकडऩे लगते हैं।फिर आधार कार्ड, राशन कार्डव मतदाता पहचान पत्र तक बनवा लेते हैं।जबकि इनके पास पहले को कोईपुराना रिकॉर्ड दस्तावेज नहीं है। जो यह साबित कर सके कि ये भारत के किसी राज्य के रहने वाले हैं।

चिह्नित जगह पर है नजर

यह सही है कि बांग्लादेशी कूच बिहार पश्चिमी बंगाल से दलालों के जरिए आ रहे हैं। यह खुद संदिग्ध बांग्लादेशियों के बयान हैं। निश्चित रूप से इसे गंभीरता से लिया जा रहा है। चिह्नित जगह सब पर नजर हैं। बड़ी संख्या में संदिग्ध बांग्लादेशी हैं।
बलदेवराज, डीएसबी, शाखा अलवर

Prem Pathak Reporting
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